BJP की दलितों के घर ‘पिकनिक योजना’ की नई राजनीति

Posted by Submitted anonymously in Hindi, News, Politics
June 17, 2017

‘दलित’ शब्द अपने अस्तित्व से ही त्रासदियों और संघर्ष से जुड़ा रहा है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर दलितों के साथ हो रहे अन्याय, अत्याचार की विभत्सता किसी से छुपी नहीं है। अशिक्षा, गरीबी के कारण पिछड़ेपन का शिकार दलित वर्ग आज राजनीतिक दलों के लिए महज़ वोट बैंक से इतर कुछ नहीं है। इसलिए बाबा साहेब के फोटो पर कब्ज़ा करने की होड़, उनके विचारों को अपनाने का दिखावा सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। और इस होड़ में अब BJP सबसे आगे निकलने के लिए पुरज़ोर कोशिश कर रही है। कम से कम BJP की हालिया गतिविधियां या कार्यक्रम से तो यही लगता है।

दलितों को रिझाने, वाहवाही लूटने के लिए भाजपा के नेताओं ने दलितों के घर पर पिकनिक बनाने की नई योजना का शुभारम्भ किया है। यह पिकनिक योजना बिलकुल स्क्रिप्टेड होती है।

इस योजना के सबसे बड़े अभिनेता बनकर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उभरे हैं। वह जब कुशीनगर जिले के एक दलित गाँव में जाते हैं, तो ठीक उससे एक दिन पहले लगभग सौ दलितों के बीच लाइफबॉय साबुन और घडी डिटर्जेंट बांटा जाता है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट की माने तो केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी जब झारखंड के आदिवासीयों के घर पहुंचे तो खाना तो आदिवासियों के घर ही खाया लेकिन जो खाना परोसा गया वो सब बाहर से मंगवाया गया। यहां तक कि नकवी के लिए नमक भी बाहर से ही लाया गया। कर्नाटक पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष येदुरप्पा पर भी छुआछूत का आरोप लगाते हुए एक स्थानीय युवक ने शिकायत दर्ज करवाई थी। मामला यहां भी वही था येदियुरप्पा ने मीडिया के सामने एक दलित के घर खाना तो खाया लेकिन ये दावा किया गया कि ये खाना दलित के घर नहीं बना था बल्कि किसी 5 सितारा होटल से लाया गया था।

तेलंगना के मुख्यमंत्री बी. चंद्रशेखर राव दावा करते हैं कि भाजपा के नेता जहाँ भी, जिस भी दलित के यहाँ भोजन करने जाते हैं, वहां या तो खाना होटल से मंगाया जाता है या फिर ऊँची जाति के लोगों से बनवाया जाता है।

भाजपा की वोटों वाली इस दलित राजनीति को आगे बढ़ाया है छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने। राजनीतिक पर्यटन पर बंगाल गए रमन सिंह भी एक दलित के यहाँ पिकनिक मनाने पहुँच गए।

रमन सिंह प्रदेश से बाहर दलित के यहाँ भोजन तो कर लेते हैं लेकिन अपने राज्य में न्याय की मांगों को अनसुना कर देते हैं। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चापा जिले में आक्रोश और डर से भरा चौदह वर्षीय राहुल नोरगे अपने पिता सतीश नोरगे के कातिलों को सज़ा दिलाने हेतु उम्मीद लगाए बैठा है। कथित तौर पर सतीश नोरगे की हत्या पिछले साल मामूला पुलिस थाने में पुलिस हिरासत में कर दी गई थी। राहुल नोरगे के अनुसार घटना के कुछ घंटे पहले सतीश नोरगे को ऊंची जाति के कुछ लोगों से किसी बात पर मतभेद के कारण वाद विवाद करता देखा गया था। राहुल आज भी न्याय की उम्मीद लगाये बैठा है और वह बड़ा होकर कानून की पढ़ाई कर दलितों के हक की लड़ाई लड़ना चाहता है।

वहीं छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले में 2015 में 34 दलित महिलाओं के साथ बालात्कार की घटना होती है। बहुत मशक्कत और सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के बाद हाल में पीड़ितों को केस दर्ज करवाने में सफलता मिली। न्याय की तो अभी उम्मीद छोड़ ही दें।

क्या रमन सिंह के पास राहुल नोरंगे से मिलने की हिम्मत और वक़्त है? क्या रमन सिंह उन पीड़ित महिलाओं के घर पर जाकर भोजन करेंगे?

यह सिर्फ एक सतीश नोरंगे और उन 34 पीड़ित महिलाओं का सवाल नहीं है। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ में दलितों के खिलाफ अत्याचार की घटना में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुयी है। एनसीआरबी के मुताबिक़ 2013 में दलितों के साथ हुए बालात्कार, हत्या जैसी घटनाओं के 242 मुक़दमे दर्ज हुए तो वहीं 2014 में 340 प्रतिशत के बढ़ोतरी के साथ 1066 हो गयी।

यह आंकड़े एवं घटनाक्रम रमन सिंह के दलितों के प्रति प्रेम, सजगता और भाजपा की पिकनिक योजना की पोल खोलने को काफी है। भाजपा द्वारा दलितों के घर पिकनिक मनाने का हथकंडा दलितों का अपमान है। भाजपा की अतिघोर सामंतवादी एवं ब्राह्मणवादी सोच का नतीजा है। आज के दलित युवा भी अब भाजपा के इस रवैय्ये के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। चाहे वो रोहित वेमुला आन्दोलन, जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में उना आन्दोलन हो या भीम आर्मी का जंतर मंतर पर विशाल जन प्रदर्शन। यह साबित करने को काफी है कि अब आज के दलित भाजपा की इस पिकनिक योजना के झांसे में नहीं आने वाले हैं। आज दलितों के यहाँ जाकर खाना खाने के बजाय उन्हें उचित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग प्रशस्त करने एवं उनकी सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

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