Kahan gaya mere sapnon ka hind!

Posted by Shan
June 12, 2017

Self-Published

अगर एक की गलती से आप पूरी क़ौम पर उंगली उठाना सीख गए हैं और पूरी क़ौम को सज़ा के क़ाबिल मानते हैं, तो ना तो महात्मा गाँधी को मारने वाले की क़ौम रहेगी, न इंदिरा गाँधी को मारने वाले की क़ौम और ना मार्टिन लूथर को मारने वाले की!

19-20 साल के लोग राष्ट्रवाद का प्रमाण लिए बैठे हैं, सोशल मीडिया पे खुले आम बलात्कार की धमकियाँ दी जाती है और लोग उसे धर्म के आधार पर justify भी कर देते हैं!

राजनीति और धर्म जुड़ गए हैं, लोग दूसरे की विचारधारा सुनने को तैयार नहीं हैं, मीडिया ने कुत्तों को भी वफादारी में पीछे छोड़ दिया है!

जब बात आती है सरकार की, तो कम से कम 3 साल पहले सब मिल के सरकार की कमी निकालते थे और कोई एक दूसरे को anti national नहीं कहता था, गाय औरत से ज़्यादा सुरक्षित है, जिस आधार पर करोड़ों लोगों ने साहेब को चुना था वही चूना लगाने पर तुले हैं, लोगों ने नाम के आगे “कट्टर” और पीछे “गोरक्षक” लगाना शुरू कर दिया है!

जहाँ वादे थे 2 करोड़ नौकरियों के, IT कंपनियों ने निकालना शुरू कर दिया है employees को! अंतर्राष्ट्रीय स्तर के economists ने recession का अनुमान लगाया है जो की जल्द ही आएगा और आप आपस में राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद खेल लें!

Dignity is earned, not demanded and definitely not something that can be snatched!

Opposing social inequality, right wing ideology, manuwaad, caste based discrimination, religious inequality is what I take a stand for.

Yup, at one point I felt reservation should be removed. Why should I get 113 in JEE whereas someone from the OBC just needs to get around 70-80 or someone from SC/ST needs only 40-50.

Let me tell you a small story:
आज भी मेरे गाँव में जिन्हें “चमार” कह कर आप सम्बोधित करते हैं वो ज़मीन पर बैठते हैं, गाँव में अलग जगह रहते हैं!
पता है क्यों?
क्योंकि मेरे और आपके दादा परदादा ने उन्हें दबाया, घर का कचड़ा साफ करवाया, दुत्कारा, जानवरों से बदतर समझा, उन्हें अलग बिठा के खिलाया!
उनके बच्चों को अलग बिठाया पढ़ने को, बचपन में ही किताब छीन के सर पर “मल” साफ करने का तसला पकड़ा दिया!

आप बात करते हैं की कहाँ रह गया है जातिवाद, कभी देखा है किसी ऊपरी जाती वाले को “मल” साफ करते हुए या मारे हुए जीवों को उठाते? मिलें तो मुझे भी बताएँ!

आप ऐसे समाज में जी रहे हैं, जहाँ दलितों को आपने voting के समय तक सीमित कर दिया है!

फिर आते हैं right wingers जो एक हिन्दू राष्ट्र का सपना देख रहे हैं, जहाँ सबके लिए एक से नियम हों लेकिन जो वो तय करें और minorities का या तो धर्म परिवर्तन करना अनिवार्य हो या दब कर रहना!
– Rss से पहले जुड़े एक मित्र की ज़ुबानी

कई अवसरों पर पूछा गया की मैं Bjp को समर्थन क्यों नहीं देता?
Bjp राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राजनीतिक दल है, जो की उसी की विचारधारा पर काम करती है!
आश्चर्य होता है 14-15 साल के बच्चों को ज़हर उगलता देकगत हूँ, जहाँ उन्हें यह बताया जाता है की किस तरह मुस्लिम समाज को मदरसों में आतंकवादी बनने की तालीम दी जाती है!
आपको कौन समझाये की हक़ीक़त ऐसी बातों से बहुत दूर है?

क्या अपने विचार व्यक्त करना राष्ट्र विरोध में आता है?
अगर मैं मनमोहन सिंह को समर्थन दूँ तो माज़क उड़ाओगे या अगर मोदी की किसी बात से असहमति दूँ तो anti national घोषित कर दोगे?
सदियों पहले अगर मुग़लों ने किसी को मारा तो उसकी सज़ा आज दोगे?
एक बात तो है Bjp ने चुन चुन के सारे ऐसे मुद्दों को राजनीति से जोड़ दिया जिसके आगे न तो logic और ना rationalism काम करता है!
चाहे सैनिकों की बात हो या धर्म की, बड़ी ही बेशर्मी से राजनीति से जोड़ दिया!
OROP की बात न करें क्योंकि उससे सैनिकों का सचमुच भला होगा, या aadhar जो की मनमोहन सिंह का brain child है लें श्रेय तो हर हर, य बात हो राम मंदिर की तो वो बनने से रहा(यह मैं नहीं कह रहा), क्योंकि फायदा मामले को ज़िंदा रखने में है और हर election में एक बार राम मंदिर बनेगा manifesto में!

एक और वजह से Rss से दूरी की:

Decades before the sexual assault of women during the 2002 Gujarat and 2013 Muzaffarnagar riots, Hindutva propounder Veer Savarkar justified rape as a legitimate political tool. This he did by reconfiguring the idea of “Hindu virtue” in his book Six Glorious Epochs of Indian History, which he wrote in Marathi a few years before his death in 1966.

For instance, said Savarkar, the caste system with its elaborate rules of purity and pollution helped stabilise Hindu society. But some of these rules became dysfunctional, degenerating into “seven fetters” of Hindu society.
These shackles, according to Savarkar, were untouchability, bans on drinking water from members of other castes, inter-caste dining, inter-caste marriage, sea-voyage, the ban on taking back into the Hindu fold those who were forcibly converted to Islam or Christianity, and ostracism of those who defied these prohibitions.

जब आप बलात्कार को justify कर सकते हैं तो और क्या उम्मीद रखें आपसे?
कुछ दिन पहले एक senior ने भी rape को justify किया था, तब आश्चर्य हो रहा था लेकिन अब नहीं!

मेरे अंदर भी कभी जहर भरा था। जब बहुत छोटा था… मुझे भी समझा दिया गया था कि कोई मुझसे ऊँचा है और दूसरा कोई मुझसे नीचा है। दोनों के लिए कोई विशेष प्रेम नहीं था मन में… जो मुझसे ऊँचा था, उससे चिढ थी… खुंदक थी और जो मुझसे नीचा था वो तो नीचा ही था, उससे दूर ही रहना होता था। फिर धर्म का अंतर समझा दिया गया!

हालाँकि बारहवीं कक्षा के दौरान कुछ बहुत ही नीच सोच वाले लोग मिले लेकिन आगे बात बदली!

इंदौर से एक मित्र मिला जिसने कई बातों की परिभाषा बदल दी, आज भी जब खुल के एक समाज की व्यथा सुनाता है तो दिल भर आता है!

एक बहन मिली ग्वालियर में जिसने यह बताया की लड़कियाँ भी उतनी ही अच्छी दोस्त होती हैं, खुल के हँसने की ओर प्रेरित करते हुए!

एक बड़े भाई मिले दिल्ली से, कॉलेज के सीनियर की परिभाषा बदल दी जिन्होंने!

एक बच्ची मिली भोपाल की, दिमाग कम है थोड़ा लेकिन ठीक है!
एक मित्र मिला मुन्नार से, जिसने आलस की परिभाषा बदल दी!
एक और ग्वालियर की मिली, हालाँकि शुरुआत में बहुत लड़े लेकिन
लोगों की अहमियत बताई, आज भी गुस्सा उतना ही करती है!

फेसबुक पर जब किसी को आग उगलता देखता हूँ तो लगता है…
या तो इसको हर तबके के लोगों से मिलने का अनुभव ही नहीं है… सबका प्यार पाना मुमकिन ही न हुआ
या फिर ये इतना संवेदनहीन है कि ये जानकर भी की उसका ये जहर/आग उसके दोस्तों को भी क्षति पहुँचा सकती है, उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

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