आर.टी.आई. बन रहा है ब्लैकमेलरों का हथियार, परदे के पीछे हो जाता है लाखों-करोड़ों का खेल !

Posted by Akash Bhatt
July 17, 2017

Self-Published

आर.टी.आई. (सूचना का अधिकार) एक ऐसा पावरफुल हथियार है जिसका प्रयोग आम आदमी के लिए एक ब्रम्हास्त्र के सामान है यह छोटी सी जानकारी कितना बड़ा कमाल कर सकता है मैं आपसे हमेशा यही कहता हूँ की सूचना का अधिकार (RTI) के बारे में अधिक से अधिक जानकारियां Collect करने की कोशिश करें ताकि आपको नए नए Idea मिलें की कौन से विभाग में किस तरह भ्रष्टाचार किया जाता है.
भ्रष्टाचारियों में इस RTI का खौफ इतना रहता है की अगर कोई उनके घोटाले के पर्दाफाश के करीब पहुँच जाएं तो वे उसे सब के सामने न लाने के लिए Setelment भी करने के लिए तैयार रहते हैं यानि उस आर.टी.आई. आवेदक को खरीदने की कोशिश भी करते हैं जिनमे से तो अधिकतर आजकल सेटलमेंट करके अपना मुंह बंद भी कर लेते हैं।

जिस प्रकार हर सिक्के के दो पहलू होतें हैं, हर फायदेमंद चीज का भी कोई न कोई नुकसान होता है ठीक वैसे ही यह RTI कानून का भी है क्योंकि इस कानून के जानकर कुछ लोग इसे Blakcmailing करके पैसे कमाने का जरिया भी बना लेते है. ऐसे लोग किसी विभाग या कार्यालय में आर.टी.आई. डालकर जानकारी निकालकर भ्रष्टाचारियों से संपर्क करके उनसे मामला दबाने के लिए लाखों रुपए भी ले लेते हैं और ऐसे ही वह बहुत से लोगों के साथ करता हैं.

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कई समाचार News वाले तो ऐसे भी होते हैं जो किसी विभाग या सरकारी व्यक्ति के द्वारा किए गए घोटाले के बारे में जानकारी इकठ्ठा करके उसे अपने अख़बार या चैनल में न दिखाने के लिए मोटा रकम भी वसूल लेते हैं और घोटाले के रकम में एक सहभागी बनकर अपना मुंह बंद कर लेते हैं ऐसे बहुत से मामले हैं जो लोगों के बीच कभी आ ही नहीं पाते क्योंकि अधिकतर केसों में परदे कि पीछे ही सारा खेल हो जाता है यानि Setelment का खेल, अब आप अंदाजा लगा ही सकते हैं यह आर.टी.आई. कानून के बारे में Knowledge रखना कितना जरुरी है ।
अभी बीते हफ्ते की ही बात है अख़बार के पन्नों पर एक खबर प्रकाशित हुई थी जिसमें एक RTI ACTIVIST ने प्रेस कांफ्रेंस में एक मामले को दबाने के लिए बिल्डर के द्वारा उसे दिए रकम 40 लाख रुपए को टेबल पर बिछा कर दिखाया था की यह रकम उसे बिल्डर ने घोटाले के पर्दाफाश न करने के लिए दिए हैं

आरटीआई एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि एसआरए यानी स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी के प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है। एक्टिविस्ट संदीप येवले ने बताया था की गरीबों के पुनर्वास के नाम पर हो रहे काम में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल हो रहा है योजना में हुए धांधली को उजागर नहीं करने के लिए एक बिल्डर ने उसे 11 करोड़ रुपए रिश्वत की पेशकश की थी। इसमें से पहली किश्त के रूप में 29 मई को 60 लाख रुपए जबकि दूसरी किश्त के रूप में 21 जून को 40 लाख रुपए दिए गए।

संदीप ने इस दौरान रिश्वत देने का वीडियो बना लिया।
आरटीआई एक्टिविस्ट ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में बताया की बिल्डर से एसआरए प्रोजेक्ट के लिए हनुमान नगर के लोगों में सर्वसम्मति बनाने और प्रोजेक्ट में आरटीआई ना डालने का सौदा 11 करोड़ रुपए में तय हुआ था जिसमें से उन्हें एक करोड़ रुपए बतौर पहली किश्त दी गई।
अगर एक्टिविस्ट ने भी बिल्डर से समझौता कर लिया होता तो शायद यह मामला न ही अख़बारों के पन्नों पर छपता और न ही आप न्यूज चैनलों में देखते RTI के हथियार को कभी कम न आंके इसलिए मैं आपसे कहता हूँ “लगाओ सूचना का अधिकार क्योंकि यह अब जरुरी है यार”

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