इंदिरा-मथाई की प्रेम कहानी

Posted by Ajay Panwar
July 23, 2017

Self-Published

भारतीय इतिहास इंदिरा गाँधी को आयरन लेडी और मजबूत व्यक्तित्व वाली महिला के रूप में देखता है लेकिन उनके एक महिला होने और व्यक्तिगत जीवन से जुडी समस्याओं के बारे में बहुत काम बात की जाती है | एक दौर में गूंगी गुड़िया कही जाने वाली इंदिरा कैसे इतनी हठी,ज़िद्दी और अड़ियल हो गयी इसका उत्तर खोजने की कोशिश शायद की ही नहीं गयी है|
हाँ,कभी कभी सुनने को मिलता है कि किस तरह सबकी मर्ज़ी के खिलाफ जाकर उन्होंने फिरोज गाँधी से शादी की |लेकिन इस कहानी के आगे का हिस्सा इतिहास से गायब मिलता है|आज उसी हिस्से पर बात करेंगे हम|
और उससे आगे का किस्सा मैं आपको सुनाता हूँ|
एम ओ मथाई अपनी किताब ‘रेमिनिसेंस ऑफ़ द नेहरू ऐज’ के एक चैप्टर ‘शी’ में इंदिरा से अपने अंतरंग संबंधों और इंदिरा के खुशमिजाज व्यक्तित्व का ज़िक्र करते हैं| उनके वैवाहिक जीवन और विवाहेतर संबंधों (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स) के बारे में भी वे तफ्तीश से लिखते हैं|पचास के दशक के शुरूआती दौर में जब मथाई और इंदिरा का अफेयर चल रहा था उन्ही दिनों इंदिरा,मथाई से गर्भवती भी हुई थी जिसके लिए बाद में उन्होंने एबॉर्शन कराया| ऐसा करने क़े लिए वे संजय गाँधी को अपने साथ उनके पैतृक गांव ले गयी जहाँ उन्होंने एक बेहद नज़दीकी डॉक्टर से सलाह ली| और लौटकर यही बताया कि संजय के अंग्रेजी अक्षर ‘आर’ न उच्चारित कर पाने की समस्या ठीक करने के लिए वे गयी थी जो अब ठीक हो भी चुकी थी |
इंदिरा और फिरोज की बढ़ी हुई दूरियों के बारे में सब जानते हैं जो फिरोज के अंतिम दिनों में कुछ कम हो गयी थी लेकिन इसका वास्तविक कारण फिरोज की अन्य महिलाओं में रूचि और बाद में उनका नपुंसक हो जाना था|इंदिरा द्वारा मथाई को कही गयी उनकी यह बात कि,”भाग्यवश,वह नपुंसक तो गया है लेकिन महिलाओं के प्रति आकर्षण अभी भी बना हुआ है|” इस बात की तस्दीक करती है कि इंदिरा फ़िरोज़ के ऐसे व्यव्हार से खुश नहीं थी जिसके कारण वह दूसरों की और आकर्षित होती चली गयी|
कार सिखने के बहाने मथाई से बनी नज़दीकियां इस कदर बढ़ चुकी थी कि मथाई से मिलने आने वाली नज़दीकी रिश्तेदारों/मित्रों से इंदिरा को जलन होने लगी थी| वे देर तक उनके अध्ययन कक्ष में बैठी रहती जहाँ नेहरू अक्सर उन्हें खाने के लिए बुलाने आते थे| मथाई और इंदिरा का सम्बन्ध उस वक़्त खटाई में आ गया जब एक दिन मथाई के दरवाज़ा खटखटाने के 5 मिनट बाद इंदिरा ने दरवाज़ा खोला और आधे खुले दरवाज़े से आने का कारण पूछा |मथाई ने कमरे में  परदे के पीछे छुपे किसी दाढ़ी वाले इंसान को देख लिया था  और बस इतना ही कहा कि,”मैं तुम्हे कुछ बताना चाहता था,लेकिन अब बाद में|” और इसके बाद उन्होंने इंदिरा से अपना सम्बन्ध तोड़ दिया|हालाँकि इंदिरा ने उन्हें यह कहकर  समझाने कि बहुत कोशिश की कि वह आदमी वहां कुछ योग वगैरा सीखने के लिए था लेकिन मथाई मानने को तैयार ना हुए और एक वक़्त कि बाद दोनों एक दुसरे के कटटर दुश्मन बन गए| और शायद ऐसे ही कई घटनाक्रमों ने इंदिरा को उस पीड़ा और गुस्से से भर दिया जो उनके हर फैसले में देखने को मिलता है|वह ज़िद्दीपन और ज़िन्दगी को अपने ढंग से जीने की की महारत उन्हें इन्ही अनुभवों से मिली है शायद |
मथाई इंदिरा के साथ अपनी उस विदेश  यात्रा का भी ज़िक्र करते हैं  जिसमे वे बछड़े का मांस खाने को लेकर बहुत उत्साहित थी| मथाई मजाक में इंदिरा से कहते हैं कि वात्सायन ने भी कामसूत्र में लिखा है कि विवाह के 6 महीने बछड़े का मांस खाना शरू कर देना चाहिए|जब मथाई ने वात्सायन के बारे में पुछा तो उन्हें पता चला की इंदिरा को इसका ज्ञान नहीं है|दरअसल वे इंदिरा को अराष्ट्रीयकृत व्यक्ति बताते हैं जिन्हे रामायण और महाभारत तक का उतना ही ज्ञान था जितना उन्होंने अपनी दादी से सुना था|
छल,शोक,रोमांच,ताकत,घृणा से भरी इंदिरा की ज़िन्दगी वाकई काफी विस्मयकारी है|इसीलिए लिए उनके बारे में कुछ भी राय बनाना बेहद मुश्किल है शायद |

@tobeajay

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