गैर भारत

Posted by Ankur Vimukt
July 20, 2017

Self-Published

( एक #सैनिक की पीड़ा , जिसका संवाद मुझसे एक सफर के दौरान हुआ , एक सत्य घटना पर आधारित लेख …. अवश्य पढ़े , शेयर करें एवं अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देना न भूले !! अग्रिम धन्यवाद !! )

ग्वालियर ,
अपने दस दिनों के आवश्यक कार्य निपटाकर , अब समय वापसी का हो चला था , मैंने स्टेशन की ओर प्रस्थान किया !! स्टेशन पहुंचकर ट्रेन का इंतज़ार बड़ी सिद्दत के साथ किया जा रहा था !

अब समय हो चला था ७:३५ सायं !
#शताब्दी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म संख्या २ पर आ चुकी थी , मैंने अपना स्थान C – 6 कोच में सीट संख्या – १९ पर ग्रहण किया !! ट्रेन अपनी दिशा में आगरा की ओर चल चुकी थी ….जैसे जैसे सफर आगे बढ़ता जा रहा रहा था , मेरे मन में जल्दी घर पहुंच जाने की उत्सुकता और तेजी से बढ़ती जा रही थी ! मुझे अब माँ के हाथ के बने खाने की याद बहुत आ रही थी , ५-सितारा होटल के खाने के आगे भी , माँ का खाना फीका ही लगता है !!

मेरे समीप की सीट पर एक व्यक्ति बैठे हुए थे , मेरी हम उम्र के ही व्यक्ति थे …. उन्होंने मुझसे पूछा आपको कहा तक जाना है ? मैंने कहा ,” ताजनगरी …आगरा ! ”
” गुड …” उस व्यक्ति ने कहा !
शिष्टाचार के नाते मैंने भी पूछा ,” आपको …? ”
” दिल्ली …” उस व्यक्ति ने नम्रता से कहा |
” आप क्या करते है ….? ” मैंने पूछा |
” CRPF में हूँ , छत्तीसगढ़ में तैनाती है ! आवश्यक कार्य से दिल्ली जाना हो रहा है ! ” उस व्यक्ति ने मुझसे कहा |
” सलाम सर , आपको ! हम तो नौकरी अपने पेट के लिए करते है , पर आप तो देश के लिए करते है …सैल्यूट सर !! ” मैंने उस सैनिक से कहा !!

बातो का सिलसिला यूँ ही चल रहा था … की मैंने उनसे कहा की आपने दो दिन पहले आज़म खान के द्वारा दिए बयान को सुना है क्या ?
सैनिक – देखिये सर , हमको अपनी ड्यूटी से ही फुर्सत नहीं मिलती कि …इन लोगो के बारे में जान पाए कि ये क्या बोलते है क्या करते है ! पर सुना था कमांडेंट सर बता रहें थे कि एक कुत्ता है जो आज हम लोगो के लिए फिर भौका है …. हहह….

सैनिक ने अपनी बात को हॅसते हुए समाप्त किया ……
फिर उस सैनिक ने मुझसे कहा कि , ” सर ,वैसे क्या बोला था ? ज़रा बतलाये ..”
मैंने आज़म के क्रूर बयान के बारे में उस सैनिक को बताया …. उस सैनिक ने कहा ,” सर , इन लोगो का क्या है ये लोग तो रोज ऐसे बयान देते है … घर पर पड़े हुए कुछ भी बोल देना आसान है ! सर , आपको मैं अभी दिखाता हूँ कि हम लोग किस तरह नौकरी करते है और क्या कुछ सहना पड़ता है ! ”

उस सैनिक ने झट से अपने बैग से लैपटॉप निकला , और खोलने के पश्चात कुछ फोटो दिखाने का प्रयास करने लगा !

चित्र . दिखाते हुए उस सैनिक ने कहा ,” सर , यहाँ इतनी गरीबी है कहा नहीं जा सकता | यह के लोगो के पास पहनने को कपडे नहीं है | इन लोगो ने १०० का नोट आज तक देखा नहीं है | ये लोग कोई सामन लेते है है तो उसके बदले सामान ही देते है दुकानदार को !! खाने को रोटी नहीं …. इलाज के लिए अस्पताल नहीं !! सर , हम लोग जब गुजरते है तो अक्सर हम लोगो को उनके बच्चो को देखकर इतनी दया आती है की हम लोग अपने साथ लाये बिस्किट उनके बच्चो को अक्सर दे दिया करते है !! उन बच्चो ने डेरी मिल्क , कैडबरी का स्वाद कभी चखा नहीं है !! आधुनिक भारत वहाँ ” गैर भारत ” बना दिखाई देता है ! यहाँ न चुनाव होते है और न ही कोई नेता आता है ….. यहाँ की कवरेज करने का प्रयास कभी मीडिया हाउस के लोग भी नहीं करते !! सत्य कभी परोसा ही नहीं जाता !! सर रही बात बलात्कार कि , तो सर , हम लोग ५० – ५० टुकड़ी में ही निकलते है कोई भी सैनिक अकेले कही नहीं जा सकता , यदि चला भी गया तो उसका जीवित आना मुश्किल है !! पूरी यूनिट साथ चलती है , अब आप सोचिये अकेले बलात्कार कैसे संभव है ? सर , ये गांव के लोग आपको दिखाई दे रहें है …आप इनसे कितना भी कुछ पूछो ये आपको कभी कुछ नहीं बतायेगे ….. सच कहा जाये तो नक्सली कि असली ताक़त यही है | हम जानते है की ये दोषी है , फिर भी हम कुछ नहीं कह सकते कारण पूरे के पूरे गांव ऐसे ही है तो कितने लोगो को मारेंगे !! सर , चित्र में आप जो पगडण्डी देख रहें है दरअसल ये पगडण्डी नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग है …. नक्सली जब गुजरते है तो वे हर रस्ते को गहरी खायी में बदल देते है क्यों की जब वे हम पर हमला करे तो हमको सुरक्षा देने के लिए तत्काल सुरक्षा टीम न आ सके !! सर यह सब तभी बदलेगा जब सरकार इसको देश का हिस्सा मानते हुए कुछ विकास करेगी …. अन्यथा हम लोग मरते रहेंगे …. नक्सली बनते रहेंगे !! देश में कितना भी विकाश हो जाये पर सर, मैं उस विकास को बेकार मानता हूँ क्यों कि भारत में अभी भी #गैर_भारत बस्ता है ! ”

उस सैनिक के इस जबाब और दिखाए चित्रों ने मुझे स्तब्ध कर दिया मैंने सोचा क्या ये भी भारत है ?? क्या इस भारत में आज भी महिलाये नग्न रहती है … क्या आज भी घरो के बच्चे कई मीलो दूर से आज भी पानी भर के लाते है …क्या एक गर्भवती महिला आज भी इलाज के आभाव में अपनी जान दे देती है ……. क्या आज भी जन्मे बच्चे कुपोषित होते है …..?? ये भारत कैसा है …जो मेरे भारत में है ?? मैं खुद को तमाम प्रश्नो से घिरा हुआ महसूस कर रहा था … मन तो था कि लौट जाऊँ उस जगह जहाँ ऐसा भारत है ….कुछ सुधार करने का प्रयास करूँ …… मोदी जी आपका डिजिटल इंडिया आखिर वहां डिजिटल कब करेगा …… क्या गरीब और गरीब , अमीर और अमीर होता जायेगा !! क्या इसका कोई हल नहीं …..?? कोई तो हल होगा ……खोजिये मेरे #प्रधाननायक !!

संवाद चलते चलते #शताब्दी ने मुझसे कहा #आगरा स्टेशन पर उतरने वाले यात्री तैयार रहें , अगला स्टेशन आगरा है !!
मैंने उस सैनिक को सैल्यूट किया ….और कहा ,” चलते है , मैं आपके जज्बात अवश्य लोगो के हृदय तक ले जाने का प्रयास करूँगा , शुभ यात्रा !! ”

सैनिक – जी , सर , शुक्रिया एवं आपकी भी यात्रा शुभ हो !! ”

मैं बेशक स्टेशन पर उतर चूका था , और शाहजहांपुर के लिए बस पकड़ने हेतु ऑटो पर सवार होकर आगरा आई एस बी टी कूच कर रहा था , पर दिमाग में उस सैनिक कि व्यथा कौंध रही थी क्यों कि…..

मुझे आज पता चला ” एक गुलाम भारत , इस आधुनिक भारत में आज भी बसता है , जिसकी सुध लेने का समय न नेताओ को है और न ही मीडिया को ……. अपनी कलम चलाऊंगा इन विशिष्ठ मुद्दों पर शायद कभी किसी मीडिया हाउस का ईमान जागे और वो #गुलाम और #गैर_भारत को आधुनिक भारत से जोड़ सके !! “

– अंकुर त्रिपाठी ‘विमुक्त’
लेखक

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