जीवन-ए-मीडिया

Posted by shekhar tiwari
July 27, 2017

Self-Published

मीडिया इंडस्ट्री में काम करते हुए लगभग 8-9 साल हो गए हैं.
लेकिन कभी भी जीवन में पॉलिटिक्स नहीं खेली..अगर कुछ कमाए तो वो हैं इंसान वो भी ऐसे इंसान जो मेरे काम को समझ सकें। आज के इस्स दौर में ऐसा लग रहा है की चापलूसी ही जीवन है । और अगर किसी को लगता है की वो इससे अपने जीवन की ऊँचाई को छू लेंगे ये उनकी सबसे बड़ी ग़लत फ़हमी होगी।

सूर्य का उदय होना और उसका अस्त होना ये प्रत्येक दिन की प्रक्रिया है। किंतु इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि सूर्य का निकलना एक मात्र उसका नियम है और उसका छुप जाना उसका कर्म… इससे तात्पर्य ये है कि अगर कोई अपना कर्म बख़ूबी निभा रहा है है तो वो सही है… अगर आपने या किसी ने उसके कर्म में बाधा डाली तो नुक़सान आपका होगा उसका नहीं। क्यूँकि उसका कर्म है है उदय होना और सर्व दिशाओं में में अपनी रोशनी फैला कर अस्त हो जाना…
ऐसी इंडस्ट्री जो की so called चौथा स्तम्भ है… अब उस स्तम्भ में दरार या यूँ कहे की मज़बूती नहीं रही…
अब बस जी हुजूरी
और कुछ तो और गिरकर तलवे तक चाटने लगे है…
ख़ुद नहीं जानता की कब इस घुटन भारी ज़िंदगी से मुक्ति मिलेगी

आप सबका

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