” ……………. तो फिर गाय या भैंस बनना” !

Posted by preeti parivartan
July 22, 2017

उत्तराखंड में दसवीं में पढ़ने वाली गुड़िया के साथ 6 लोगों ने गैंग रेप किया, फ़िर हत्या कर नग्न अवस्था में फेंक दिया। जानती हूं कि कुछ नया नहीं बता रही हूं, ये तो रोज़ की बात है! वहां प्रोटेस्ट हो रहा है फिर कैंडल मार्च होगा, अपराध हो जाने के बाद अब पुलिस और समाज दोनों सक्रिय हैं। एक से दो दिन या हफ़्ते भर में सब सामान्य हो जाएगा! फिर हमारे लिए एक और गुड़िया आ जाएगी। कभी गुड़िया तो कभी नैंसी तो कभी निर्भया, बस नाम बदल जाएंगे। ये घृणित अपराध तो होता ही रहेगा। बस हर बार इस दरिंदगी को अंजाम देने का तरीका अलग होगा!

अब ऐसा लगने लगा है कि औरत होकर जन्म लिया है तो कुछ भी हो- दंगा हो, ज़मीनी विवाद हो, चोरी-डकैती और लूट हो, पड़ोसी से कहा-सुनी हो, न्यू ईयर की पार्टी हो, शादी-ब्याह की भीड़-भाड़ हो, कोई सुनसान रास्ता हो या चौराहा हो- भुगतने के लिए तैयार रहो। जगह राजधानी दिल्ली हो या देश की राजनीति तय करने वाली यूपी, बिहार, बंगाल हो या हिमाचल, उत्तराखंड या पूर्वोत्तर हो औरत कहीं भी सुरक्षित नहीं। अब तो ऐसा है कि अगर शारीरिक रूप से नहीं हो तो क्या हुआ ऐश-ट्रे ही बना लेंगे!

उम्र कुछ भी (10, 12, 24, 36 या 60 वर्ष) हो! स्कूल में पढ़ती हो या पढ़ाती हो, योनि तो है ना तुम्हारे पास जिसमें लाठी या सरिया कुछ भी डाला जा सकता है! या कोई कमज़ोर और घटिया मानसिकता का इंसान अपनी कुंठा निकाल सकता है! तो हत्या, छेड़खानी, रेप के लिए तैयार रहो।

अब हमारे हिस्से में क्या आता है? ये क़िस्मत! इसे क़िस्मत ही समझे कि हमारे हिस्से में कैसी मौत आती है। कुछ भेड़िए चढ़ गए या बलात्कार करके तेज़ाब डालकर जला दिया गया या शव को छत-विछत कर दिया गया। ऐसा कुछ भी हो सकता है। दरअसल जन्म से लेकर मृत्यु तक सब क़िस्मत के ही हवाले तो है!

अगर फिर उठने की कोशिश की तो समाज और क़ानून विक्टिम बनाएगा। क्योंकि यहां सर्वाइवर के लिए जगह नहीं! ऐसे में सअादत हसन मंटो याद आते हैं वे कहते थे, “जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है। मेरी कहानियां तो बस सच दर्शाती हैं।” किस समाज में जी रहे हैं हम लोग मां-बाप ने जिस बच्ची का नाम गुड़िया रखा उसे क्या देकर हमने विदा कर दिया और हर दिन कितनी गुड़ियाओं की बलि दे दी जाती है। बेटियों की सुरक्षा तो सुनिश्चित कर नहीं पा रहे हैं और हम गाय-भैंस में उलझे हुए हैं। अगले जनम में गाय या भैंस हों तो शायद आज से ज़्यादा मेहफ़ूज़ और महत्व में रहेंगी…!!!

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.