दिल्‍ली की आंगनवाड़ी कर्मचारियों की अनिश्‍चितकालिन हड़ताल शुरू केजरीवाल के आवास पर हुआ

Posted by Ajay Swamy
July 3, 2017

Self-Published

प्रेस विज्ञप्ति

3 जून 2017, नयी दिल्‍ली। दिल्‍ली की सभी आंगनवाड़ी वर्कर व हेल्‍पर वेतन बढ़ाने व अन्‍य मांगों का लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई हैं। दिल्‍ली स्‍टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एण्‍ड हेल्‍पर्स यूनियन की अगुवाई में सोमवार को हज़ारों आंगनवाड़ी वर्कर व हेल्‍पर ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के आवास पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में लगभग 3000 आंगनवाड़ी हेल्‍पर व वर्कर शामिल हुए शाम को विरोधस्‍वरूप अरविन्द केजरीवाल का पुतला फूंका गया।

हालांकि लगभग सुबह 11 बजे अरविन्‍द केजरीवाल ने आंगनवाड़ी कर्मचारियों को मिलने के लिए अपने आवास पर बुलाया। पांच आंगनवाड़ी वर्कर व हेल्‍पर व दिल्‍ली स्‍टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एण्‍ड हेल्‍पर्स यूनियन की कानूनी सलाहकार शिवानी जब केजरीवाल के आवास पर पहुंची तो उन्होंने शर्त रखी कि वे आंगनवाड़ी की महिलाओं से बात कर सकते हैं पर यूनियन के किसी व्‍यक्ति से नहीं। आंगनवाड़ी की वर्कर, हेल्‍पर ने केजरीवाल की इस असंवैधानिक शर्त को नहीं माना साथ ही ऐलान किया कि आज से दिल्‍ली की सभी आंगनवाड़ी वर्कर व हेल्‍पर वेतन अपनी जायज़ मांगों का लेकर अनिश्चितकालिन हड़ताल पर जा रही हैं। दिल्‍ली स्‍टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एण्‍ड हेल्‍पर्स यूनियन की संयोजक शिवानी ने कहा कि इस अनिश्चितकालिन हड़ताल पर गई सभी महिला कर्मचारी अब से रोज़ सुबह से शाम तक केजरीवाल के आवास पर ही धरना देंगी।

ज्ञात हो कि 24 जून को आंगनवाड़ी की इन महिलाओं ने मुख्‍यमंत्री  कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। फिर 27 जून को दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया से उनके आवास पर तय मीटिंग में आंगनवाड़ी की महिला कर्मचारी व यूनियन के साथी मिलने गये तो उन्‍होंने मिलने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद 30 जून को दिल्‍ली सचिवालय पर एक विशाल प्रदर्शन हुआ और दिल्‍ली सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कर्मचारियों की मांगों को अनसुना करने पर विरोध में रिंग रोड जाम भी की गयी।

सभी आंगनवाडी कार्यकर्ता और हेल्पर 2015 में दिल्‍ली स्‍टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एण्‍ड हेल्‍पर्स यूनियन से लिखित में किए गये वायदों को तोड़ने का विरोध कर रही हैं। ज्ञात हो कि 2015 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहाइकाओं द्वारा की गयी सात दिन लम्‍बी भूख हड़ताल के बाद मुख्‍यमन्‍त्री केजरीवाल ने खुद उनसे मिलकर लिखित में वायदा किया था कि उनका मानदेय बढ़ाया जायेगा और हर माह की 10वीं तारीख से पहले उन्‍हें मिल जाया करेगा। दो वर्ष बीतने के बाद भी केजरीवाल सरकार ने अपने इन लिखित वायदों पर अमल नहीं किया है।नतीजतन, पहले आंगनवाड़ी कर्मियों ने पहले 28 जून को मनीष सिसोदिया से अपनी यूनियन के नेतृत्‍व में मिलने का प्रयास किया। लेकिन सिसोदिया ने यूनियन से बात करने से इंकार कर दिया और आंगनवाड़ी कर्मियों के सामूहिक मोलभाव व चयनित प्रतिनिधित्‍व के कानूनी अधिकार को मानने से इंकार कर दिया। परिणामस्‍वरूप, 30 जून को हज़ारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने हड़ताल शुरू कर दी और राजघाट के निकट रिंग रोड को घण्‍टों तक जाम रखा।

इस घटना से घबराकर उपमुख्‍यमन्‍त्री मनीष सिसोदिया ने 30 जून की शाम को ही एक बयान जारी किया। यूनियन की संयोजक सुश्री शिवानी कौल ने कहा कि यह बयान हर कानूनी व संवैधानिक अधिकार की धज्जियां उड़ाता है और एक प्रदेश के उपमुख्‍यमन्‍त्री से ऐसे गैर-जिम्‍मेदाराना बयान की अपेक्षा नहीं की जाती है। सिसोदिया ने बयान में सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को धमकी दी है कि वे ”राजनीति” छोड़कर, यूनियन से नाता तोड़कर तुरन्‍त काम पर वापस लौटें अन्‍यथा उनके खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जाएगी। बयान में हड़ताल तोड़ने के लिए आंगनवाड़ी कर्मी औरतों को डराने व लालच देने का प्रयास करते हुए कहा गया है कि जो आंगनवाड़ी कर्मी सरकार की बात मानेंगे,”राजनीति” नहीं करेंगे और काम पर लौट जाएंगे, सरकार केवल उनका मानदेय बढ़ाएगी।

ज़ाहिर है, यहां कर्मचारियों को मूर्ख बनाने का प्रयास किया गया है क्‍योंकि मानदेय में कोई भी बढ़ोत्‍तरी केवल सरकार की जीहुजूरी करने वालों पर लागू हो। सुश्री कौल ने कहा कि सम्‍भवत: मनीष सिसोदिया भूल गये हैं कि वे एक संवैधानिक पद पर विद्यमान हैं और वे आंगनबाड़ी कर्मियों का यूनियन बनाने और सामूहिक तौर पर मांग रखने व प्रतिनिधित्‍व का अधिकार नहीं छीन सकते। साथ ही श्री सिसोदिया यह भी भूल गये हैं कि वे भी राजनीति करते हुए सत्‍ता में पहुंचे हैं और वे भी एक राजनेता ही हैं। ऐसे में, वे किस मुंह से आंगनवाड़ी महिलाओं को ”राजनीति” से दूर रहने के लिए कह रहे हैं जबकि ये औरतें केवल आप सरकार से अपने वायदे पूरे करने की जायज़ मांग कर रहीं हैं, न कि उस प्रकार की गन्‍दी राजनीति में संलग्‍न हैं जिसमें आजकल आम आदमी पार्टी के नेता और मन्‍त्री पकड़े जा रहे हैं। क्‍या राजनीति में हिस्‍सेदारी करने का हक़ केवल आम आदमी पार्टी के नेताओं को है?

शिवानी कौल ने आगे कहा कि श्री सिसोदिया का बयान यह दावा करता है कि उनकी सरकार ने आंगनवाडि़यों में 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है लेकिन फिर भी आंगनवाडि़यों में खाने का स्‍तर आदि नहीं सुधरा है। अनकहे तौर पर श्री सिसोदिया ने इसका आरोप आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं पर डाल दिया है, जबकि खाना तैयार करने का ठेका आम आदमी पार्टी की सरकार ने स्‍वयं ही तमाम ऐसे एनजीओ संगठनों को दिया है, जिनमें से कई को स्‍वयं आम आदमी पार्टी के नेता व मन्‍त्री चलाते हैं। कौन नहीं जानता कि केजरीवाल और सिसोदिया के स्‍वयं के एनजीओ हैं। सुश्री कौल ने कहा कि यह सच है कि आंगनवाड़ी के खाने के मामले में लाखों का घोटाला चल रहा है। लेकिन इसका जिम्‍मेदार और कोई नहीं बल्कि विदेशी फंडिंग पर पलने वाले ऐसे तमाम एनजीओ हैं,जिन्‍हें चलाने का काम अक्‍सर स्‍वयं आम आदमी पार्टी के ही नेतागण करते हैं। सुश्री कौल ने कहा,”इससे ज्‍यादा आश्‍चर्यजनक बात और क्‍या हो सकती है कि पहले आप सरकार, इसके मन्‍त्री और नेता, जिनमें से कई पर भ्रष्‍टाचार, बलात्‍कार, छेड़छाड़, सम्‍पत्ति कब्‍जा, चार सौ बीसी, फर्जीवाड़े के मुकदमे चल रहे हैं, पहले स्‍वयं आंगनवाड़ी की भोजन स्‍कीम में अपने स्‍वयंसेवी संगठनों द्वारा करोड़ों का घोटाला करते हैं और बाद में उसका आरोप ढाई हज़ार व पांच हज़ार के मानदेय में अपना घर चला रही आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्‍पर्स पर डाल देती है।” सुश्री कौल ने आगे कहा कि मनीष सिसोदिया के बयान के बारे में सबसे शर्मनाक बात यह है कि यह आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्‍पर्स को अपनी हड़ताल समाप्‍त करने के लिए दी गयी एक नंगी धमकी है, खासकर तब जबकि यह श्री सिसोदिया की सरकार है जो कि इन महिला मज़दूरों से दो वर्ष पहले किये गये लिखित वायदों से मुकर गयी है और विशेषकर तब जबकि यह आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों का कानूनी व संवैधानिक अधिकार है कि वे शांतिपूर्ण और कानूनी तौर पर अपने जायज़ हक़ों के लिए संघर्ष करें। एक राज्‍य सरकार के मन्‍त्री के लिए यह भी बेशर्मी की इन्‍तहां है कि वह आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों द्वारा स्‍थापित यूनियन से मिलने या बात करने से इंकार कर देता है और उन्‍हें अपनी यूनियन छोड़ देने और हड़ताल तोड़ देने के लिए धमकी देता है। यह केवल यह दिखलाता है कि सदाचार का ढोल बजाते हुए सत्‍ता में आने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने खुले तौर पर सभी कानूनों व संविधान को ताक पर रखने और घपलेबाज़ी करने का रास्‍ता चुन लिया है, जैसाकि आप के मंत्रियों के तमाम आपराधिक मामलों में फंसने से साफ जाहिर होता है। सुश्री शिवानी कौल ने आगे कहा, ”एक ऐसी सरकार के लिए ये सारी कारगुज़ारियां कोई चौंकाने वाली नहीं है जो कि भाजपा और कांग्रेस से भी ज्‍यादा भ्रष्‍टाचारी,धोखेबाज़ और मालिकों-ठेकेदारों की समर्थक साबित हो रही है। केजरीवाल व सिसोदिया ने वायदा किया था कि वे सरकारी बंगले, बत्‍ती वाली गाडि़यां व सुरक्षा नहीं लेंगे। लेकिन सरकार बनते ही आप के नेता-मंत्रियों में सबसे बड़े व अच्‍छे बंगले लेने, महंगी बत्‍ती वाली गाडि़यां व अधिक से अधिक सुरक्षा लेने के लिए उठापटक मच गयी। ये आप के मंत्रियों व नेताओं के असली सदाचार को दिखलाता है। उन्‍होंने मज़दूरों व ग़रीबों से किये गये अपने हर वायदे को सरकार बनाने के बाद तोड़ दिया जैसे कि ठेका प्रथा को समाप्‍त करना, ग़रीबों व मज़दूरों के लिए सरकारी आवासों का निर्माण करना, उन्‍हें ईएसआई-पीएफ की सुविधा देना आदि। और अब उन्‍होंने हज़ारों आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्‍पर्स से किये गये वायदों को तोड़ दिया है। ऊपर से उनका उपमुख्‍यमन्त्री मनीष सिसोदिया बेशर्मी की सारी हदें तोड़ते हुए इन पीडि़त आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों को डरा रहे हैं और लालच दे रहे हैं कि वे अपनी हड़ताल तोड़ दें, यूनियन छोड़ दें, और उनकी सरकार की जीहुजूरी करें! इससे ज्‍यादा असंवैधानिक, गैरकानूनी व भ्रष्‍टाचारी हरकत एक उपमुख्‍यमन्‍त्री जैसे पद पर विद्यमान व्‍यक्ति के लिए और क्‍या हो सकती है? लेकिन श्री सिसोदिया को यह गलतफहमी है कि आंगनवाड़ी हेल्‍पर्स व वर्कर्स इन गीदड़भभकियों से डर जाएंगी और अपनी यूनियन भंग कर हड़ताल को तोड़ देंगी। उनकी इस गलतफहमी को हम दूर कर देंगे। यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक हमसे दो वर्ष पहले किये गये वायदों को आम आदमी पार्टी सरकार बिना शर्त पूरा नहीं करती।’

सधन्‍यवाद,

 

हरसिमरन कौर

(मीडिया प्रकोष्‍ठ प्रभारी)

दिल्‍ली स्‍टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एण्‍ड हेल्‍पर्स यूनियन

Phone: 9599458044, 9711736435

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