दोनों सामान हो

Posted by Nitin Singh Gaur
July 14, 2017

Self-Published

24सितम्बर 2014 । जी हाँ वो दिन जब हमारा देश दुनिया के चुनिंदा देशो में शामिल हो गया जो अपनी पहुँच मंगल गृह तक रखते है।आज हमारे देश में 30 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन के उपभोक्ता है।दुनिया की सबसे विकासशील अर्थवयवस्था वाला देश हमारा है।लेकिन सोचिये क्या हम वाकई में विकसित हो रहे है ??

दरअसल मेरा सवाल है महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर।हाँ लेकिन जिस दिन वीमेन डे हो दिन हर इंसान यहाँ महिला सम्मान में मेसेज जरूर फॉरवर्ड करके अपना फ़र्ज़ निभा लेता है । लेकिन इससे क्या हासिल होगा ??

16 दिसम्बर 2012,नीर्भया घटना। इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना जिसने पुरे देश को हिला,ग़मगीन और गुस्से में एक साथ कर दिया।सोशल मीडिया से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और देश के हर हिस्से में इस घटना के खिलाफ में प्रदर्शन हुए।बलात्कार,छेड़-छाड़ जैसी घटनाओ के खिलाफ पूरा देश लामबंद हो गया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर घंटो बहस चलती थी और अखबारो भी लंबे लंबे articles छपे।लगा की शायद हमारा देश अब बदल जायेगा और महिलाओ के लिए और ज्यादा सुरक्षित हो जायेगा लेकिन।

NCRB के आंकड़ो के अनुसार सन2012 में जहाँ बलात्कार की 24923 घटनाये दर्ज़ हुयी थी जो बढ़कर सन 2013 में बढकर 33707 जो सन 2014 में बढ़ते हुए 36735 और सन 2015 में 36451हो गयी।हालाँकि निर्भया घटना कद बाद कानून सख्त हुए लेकिन अपराध और बढ़ गए।और अपराध बढ़ने के लिए जिम्मेदार है घटिया सोच ।

आज सन 2017 आधा बीत चुका है हमे मंगल तक पहुँच बनाये भी तकरीबन 3 साल हो रहे है किन्तु हम अभी भी महिलाओ को लेकर दकियानूसी सोच को रखते है और उसको सही मानते है।हमारा समाज में आज भी महिला के लिए एक आदर्श avisory है जिसके अनुसार महिला को अकेले नही जाना चाहिए  । ऐसे कपडे पहनने चाहिए, वैसे कपडे नही पहनने चाहिए।पुरुषो से बात नही करनी चाहिये। अँधेरा होने के पहले घर आ जाना चाहिए।कभी सोचा है कितना दम घुटता होगा उनका इतनी पाबंदियों के बाद। लेकिन मेरा सवाल है की इतनी सारी हिदायते होने के बाद भी ये घटनाये क्यों नही रूकती है ??

दरअसल उसका जवाब है इन घटनाओ का इलाज है सही सोच। जब तक हम पुरुष इस समाज को महिलाओ के लिए और सुरक्षित नही बनायेगे तो कैसे बनेगा ये समाज सुऱक्षित।अगर कोई लड़की westren ड्रेस पहने है कैसे कोई भी लड़का ये सोच सकता है की वो उस लड़की को छेड़ सकता है ?? या समाज कैसे किसी लड़की की पोशाक से उसका चरित्रप्रमाणपत्र जारी कर सकता है अगर किसी लड़की के पोषक के आधार पर कोई उसको छेड़ता है तो गलती छेड़ने वाले की है।सच मानिए ये आपकी नजरो की गंदगी है जो आपको वो लड़की गलत नजर आ रही है ।sexuality तो महिलाओ में भी होती है लेकिन क्या आपने सुना है की कोई पुरष हाफ पैंट में था और महिलाओ ने उसको छेड़ा या अश्लील हरकत की ?? नही ना । तो ये फिर ये तर्क क्यों देते है लड़की की पोशाक जिम्मेदार थी ।कभी आप सोचिये की कोई आपको बिना मर्ज़ी के छुए तो कितना घिनौना लगेगा या कभी नजरो से आपको घूरे और गन्दी टिप्पणियां करे तो कितना शर्मनाक लगेगा।मुझे सबसे ज्यादा उन लोगो या लड़को पर आता है जो ये समझते है की फब्तियाँ करने से वो बहुत कूल लगते है। तो यकीं मानिये आपसे बड़ा मानसिक दिवालिया कोई नही है।आप बदबूदार गलतफेहमियो की दुनिया में जी रहे जो।और आज कल तो लोग सोशल मीडिया पर महिलाओ को गालियां देते है। यकीं मानिये इस तरह के लोगो से ज्यादा कायर और बीमार कोई और नही हो सकता है।

एक पुरुष के तौर पर मुझे कभी कभी शर्म और अक्सर गुस्सा भी आता है की हमारे बीच से कुछ मानसिक बीमार लोग हमे बदनाम करते है मेरा ये मानना है की बलात्कार एक शारारिक प्रताड़ना से ज्यादा मानसिक प्रताड़ना है।और इस प्रकार की घटना को रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है। ये हमारी जिम्मेदारी है की हम सब मिलकर समाज की सोच में वो बदलाव ला सके की जहाँ ऐसा पाप करने वालो की लिए कोई जगह न और और एक ऐसी सोच बनाये की ऐसे घटिया विचार किसी के ज़ेहन में आये ही न कभी।

ये हम पुरुषो की जिम्मेदारी है की जब हम एक पुरुष के तौर पर अपनी सोच नही बदलेंगे तब तक ये समाज बेहतर नही बनेगा। ये हमारा फ़र्ज़ है की हम एक ऐसी सोच बढ़ाये जिसमे महिलाये बराबर का दर्ज़ा रखती हो। हम उनको उनकी पोशाक के हिसाब से चारित्रप्रमाणपत्र न जारी करे उनके बहार निकलने या किसी से बोलने के आधार पर गलत राय ना बनाये।और सबसे जरुरी की जो कोई भी महिलाओं के खिलाफ दूषित सोच रखे ऐसे लोगो को समझाये और अपना विरोध दर्ज़ कराये।क्योंकि एक पुरुष का पौरुष न्याय का साथ देने में और अत्याचार रोकने में है नाकि गलत प्रावत्तियों को बढ़ाने में।और जब हम ऐसा करने में सफल होंगे तभी हम आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर समाज दे सकेंगे जहाँ पुरुष और महिलाएं बराबर होंगी।आओ मिलकर के एक ऐसा समाज बनाये जिसमे महिलाये अपने आप को बिलकुल सुरक्षित महसूस कर सके।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.