नितीश कुमार क्या जय चंद हैं?

Posted by Krishna Singh
July 28, 2017

Self-Published

जहाँ भाजपा के समर्थक नितीश के भाजपा के साथ सरकार बनाने को घर वापसी का नाम दे रहे हैं, वहीँ विरोधी उन्हें “जय चंद” का ख़िताब दे रहे हैं.सच्चाई क्या है?

नितीश कुमार एक बुर्जुआ राजनीतिज्ञ हैं, जैसे की लालू, मोदी, अमित शाह, राहुल गाँधी, केजरीवाल, आदि. इनका “वर्ग” चरित्र पहुंचानो दोस्त! अकेले देखने, इनके वर्गीय हित को छोड़कर, इनका विश्लेषण अधुरा होगा, एक भूल होगी और इनके बिछाये जाल में ही फंसे रहेंगे. देखा ही होगा कितनी आसानी से सारा का सारा दल दुसरे के साथ मिल जाता है सत्ता और धन के लिए और तुर्रा यह की देश के लिए, सिद्धांत के लिए किया गया है यह दल बदलाव.

यह पूंजीपतियों के लिए काम करते हैं. भूलकर भी ये लोग सर्वहारा वर्ग की सत्ता की बात नहीं करते. इन व्यक्ति विशेष को गाली देना बंद करो दोस्त, अपने वर्ग के साथ एक्ताबद्द हो.
सत्ता और धन कमाने की चाहत तो भरी है इनमे, पर ना भी हो तो क्या अंतर पड़ता है. ये लोग और इनकी पार्टी मजदुए वर्ग और किसान के हित के विरोध में काम करते हैं. पूंजीवाद को मजबूत करना या उसे सुधारने का मतलब ही है पूंजी के लिए अधिक मुनाफा दर यानि मजदूरों की मजदूरी में कटौती करना, बेरोजगारी बढ़ाना, महंगाई बढ़ाना, आर्थिक मंदी को नकारना, जो पूंजीवाद के गर्भ से पैदा होता है, नाकि भ्रष्टाचार और घटिया देख रेख के कारन!
हाँ, कोई खास व्यक्ति ज्यादा लोभी, काईयाँ हो सकता है, जो आजकल अधिकांश दिखते हैं. इसका भी कारन है, पूंजीवाद का भयानक दलदल में फंसना, फासीवाद का आना.

रास्ता पीछे जाना नहीं है, पर आगे जाना है, मजदुर वर्ग के नेत्रित्व में क्रांति, पूंजीवाद को ध्वस्त करना और समाजवाद की स्थापना! भगत सिंह ने रास्ता दिखाया है समाजवादी क्रांति का, HSRA के मैनिफेस्टो में, और भी लेखों में. क्यूँ भटक रहे हैं साथी? सुधार नहीं क्रांति का झंडा बुलंद करें. फासीवाद को हराकर पूंजीवाद नहीं, समाजवाद के लिए संघर्ष करें.

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.