नितीश कुमार

Self-Published

हाल ही में बिहार में घटित राजनीतिक उथल पुथल9ल ने सभी का ध्यान अपनी और खिंचा है, जंहा एक दिन में ही मुख्य मंत्री श्री नितीश कुमार ने शाम को बतौर इस्तीफा देकर दूसरी सुबह बतोर मुख्य मंत्री शपथ ले ली, फर्क इतना था की जिस महागटबंधन के सारथी बनकर साल 2015 में बिहार राज्यसभा में अभूतपूर्व जीत को हासिल किया था, उस वक़्त भाजपा के रूप में प्रचिलित हो चुकी श्री नरेंद्र भाई मोदी जी की लहर को भी बिहार के मतदाता ने महागटबंधन के रूप में रोक दिया था, आज श्री नितीश कुमार जी उसी महागटबंधन को तोड़कर, उसी भाजपा से मिलकर सरकार बना रहे है जिसके खिलाफ ये 2014 का लोकसभा और 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव लड़े थे. वास्तव में ये एक महज घटित एक घटना लगती है जो की पिछले कुछ दिनों में घटित हुई लेकिन ये घटना कई द्रष्टिकोण से अचानक हुई नही लग रही वही निकट भविष्य में ये घटना कई राजनीतिक और सामाजिक फेर बदल की बुनियाद भी रख सकती है.

नितीश कुमार के रूप में हुये इस फेरबदल के साथ साथ उन घटनाओ को भी समझने की जरूरत है जो हाल ही के दिनों में घटित हुई है, कई राजनीतिक है और कई गैर राजनीतिक लेकिन इनका प्रभाव आने वालों दिनों में राजनीतिक गलियारों में देखने को जरूर मिलेगा. पिछले कुछ दिनों को अगर इस्तीफों का दौर कहा जाये तो गलत नही होगा, बसपा सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद मायावती ने ये कहकर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया की यंहा अगर वह दलित वर्ग की आवाज नही उठा सकती तो इस सदन में होने का कोई मतलब नही है, उसी वक़्त राजद सुप्रीमो लालू यादव जी ने सुश्री मायावती को बिहार से राज्यसभा सांसद बनाकर भेजने की पेशकस कर दी.

इसी दौरान गुजरात राज्य के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री शंकर सिंह वाघेला जी ने भी गुजरात राज्य की कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया, शंकर सिंह वाघेला एक समय में प्रदेश भाजपा के कदावर नेता रहे है और इनकी नजदीकियां श्री नरेंद्र भाई मोदी के साथ जग जाहिर है. इसी बीच जब पिछले कुछ दिनों से प्रदेश भारी बरसात और बाढ़ से झूझ रहा है उसी समय प्रदेश की राजधानी गांधीनगर में राजनीतिक घटना कर्म तेजी के साथ बदल रहे है इसी बीच प्रदेश कांग्रेस के तीन विधानसभा सदस्यो ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा प्रदेश इकाई का दामन थाम लिया है (http://indianexpress.com/article/india/gujarat-congress-three-mlas-join-bjp-rajya-sabha-elections-shankersinh-vaghela/) इसी साल के अंत में, अब से कुछ 4 महीने बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव है, इसी बीच कांग्रेस की प्रदेश इकाई को इस तरह से अपाहिज कर देना जंहा उसका एक बड़ा नेता और विधानसभा के तीन सिटींग विधानसभा सदस्य कांग्रेस को छोड़ जाने से, एक तरह से विपक्ष को ही खत्म कर दिया जा रहा है जंहा चुनाव मैदान में कोई प्रतिपाक्षी ना होने से चुनाव एक तरफा होने की संभावना बहुत ज्यादा हो जाती है, इसी के जरिये आज चुनाव से पहले एक तरह से भाजपा का प्रदेश की जनता को एक साफ़ सुथरा संदेश जरूर है की अगर कोई प्रदेश में स्थायी सरकार दे सकता है, जंहा पार्टी टूटने का कयास भी ना हो और एक मजबूत नेतृत्व हो वह सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही है, पटेल आंदोलन के बाद, प्रदेश भाजपा को राज्य का बड़ा समुदाय अस्वीकार कर रहा था लेकिन विपक्ष को एक तरह से खत्म करके राज्य भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करती हुई दिखाई दे रही है.

इसी बीच, जानी मानी पत्रिका epw के एडिटर ख्याति प्राप्त पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता, एक लेख सम्बंधित को पत्रिका से हटाने के लिये एक तरह से जबरन इस्तीफा देने के लिये मजबूर किया गया (http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/epw-editor-resigns/article19304672.ece) इस लेख का संबंध टेक्स चोरी और एक बड़े उद्योगपति घराने से है, ये एक उदाहरण है जंहा आजाद मीडिया की आवाज को दबाने की पूरी जोर शोर से कोशीश की जा रही है जंहा से केंद्र सरकार पर सवालो का सिंकंजा कसा जा सके, मसलन सब कुछ सही दिशा में हो रहा है और कही भी भृष्टाचार या सरकार विरोधी कोई आरोप की गैर मौजूदगी में साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी , एक तरह से भाजपा ने शुरू कर दी है.

इसी साल के शुरुआत में हुये पांच राज्य के चुनावो में गोवा की विधानसभा में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नही मिला था हाँ कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीट मिली थी लेकिन फिर भी यंहा भाजपा प्रदेश सरकार बनाने में किस तरह कामयाब रही, ये हम सब जानते है. कुछ इसी तरह पांडिचरी की उप राज्यपाल श्री किरण बेदी जी ने तीन mla को शपथ दिलवा दी जिन्हे केंद्र द्वारा नियुक्त किया गया था (http://m.timesofindia.com/city/puducherry/bedi-stuns-puducherry-govt-swears-in-nda-picks/articleshow/59449358.cms) इसी तरह कुछ दिनों पहले नागालेंड की विधानसभा का एक तरह से तख्ता पलट जंहा अब भाजपा के 4 mla सत्ता पक्ष में आ गये है (http://indianexpress.com/article/india/nagaland-cm-tr-zeliang-wins-trust-vote-with-support-of-47-mlas-shurhozelie-liezietsu/) इन सभी घटना कर्म से एक तथ्य तो जरूर साबित होता है की भाजपा की मंशा पूरे भारत में केशरिया रंग को फैलाने की है और इसके राजनीतिक उठा पठक समय समय पर हो सकती है.

अब अगर नितीश कुमार पर सक्षिप्त में नजर डाले तो साल 2002 में ये बतोर जनता दल यूनाइटेड के सदस्य के रूप में NDA में शामिल थे और केंद्र की सरकार में मंत्री भी थे, इसी समय गुजरात में पहले साबरमती एक्सप्रेस को भीड़ ने जलाया और बाद में कुछ इसी तरह की भीड़ ने राज्य की सड़कों पर दंगे किये जंहा सेंकडो की तादाद में जाने गयी और हजारों की तादाद में व्यवसाय को खत्म किया गया लेकिन तब भी श्री नितीश कुमार NDA में बने रहे, साल 2005 में एक नया बिहार नितीश कुमार के आंदोलन से JDU और बीजेपी की राज्य इकाई ने 15 साल से प्रदेश की सत्ता में काबिज श्री लालू यादव को उखाड़ फेंका, यंहा से नितीश कुमार एक नेता के साथ सुशाशन बाबू की छवि में उभरने शुरू हुये, लेकिन भाजपा के नेता और उस वक़्त के गुजरात के मुख्य मंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी से इनकी खीचा तानी होने लगी इसी बीच, 2008 में कोशी नदी में आयी बाढ़ की तबाही से बिहार का जन मानुष बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ लेकिन नितीश और मोदी जी की तना तनी की वजह से बिहार सरकार ने गुजरात सरकार द्वारा भेजी गयी सहायता राशी को वापस लौटा दिया (http://m.indiatoday.in/story/nitish-snubs-modi-returns-gujarat-donation-for-kosi-flood-victims/1/102195.html) इसके बाद 2009 में लोकसभा में बीजेपी की हार से 2010 में NDA के उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार एक बार फिर विजयी हुये लेकिन साल 2013 में ये नाता किस तरह टुटा और किस तरह नितीश कुमार NDA से अलग हुये ये हम सब जानते है और फिर 2015 के विधानसभा चुनाव में महागटबंधन का बनना.

दूसरी और लालू प्रशाद यादव, इन्होंने 1989 में श्री लाल कृष्ण आडवाणी का रथ बिहार में रोक दिया था, साबरमती एक्सप्रेस को जलाने के संभंध।में बतौर रेल मंत्री 2005 में एक कमीशन बनाया और जब मनमोहन सरकार अमरीका के साथ परमाणु संधि पर अल्पमत में आ रही थी तब इन्होंने और समाज वादी पार्टी ने मनमोहन सिंह सरकार का सारथी बनकर इसे बचा लिया, कहने का तातपर्य लालू प्रशाद यादव पर भृष्टाचार के आरोप है, परिवार वाद राजनीति का भी इन पर सिंकंजा कसा जाता है लेकिन राजनीतिक तोर पर ये अक्सर बीजेपी के घोर विरोधी रहे है.

अब, नितीश कुमार के महागट बंधन को भंग कर NDA के साथ एक बार फिर जुड़ जाना जिसे बीजेपी के लोग घर वापसी कह रहे है, वास्तव में ये विपक्ष को खत्म करने की बीजेपी की एक सोची समझी राजनीतिक पहल का ही एक हिस्सा है जंहा पहले उत्तर प्रदेश में मायावती और अभिषेक यादव को एक तरह से धारा शाही कर देना फिर बिहार में लालू यादव और नितीश को अलग करना, जंहा ये प्रदेशिक राजनीतिको को खत्म करने का प्रयास है वही केंद्र में मोदी सरकार और बीजेपी को हर प्रकार के खतरे से सुरक्षित रखने की एक सोची समझी प्लानिंग है, इसी बीच जिस तरह आज गुजरात राज्य में कांग्रेस की राज्य इकाई को तनहा कर नजदीकी समय में होने वाले राज्य चुनाव में भाजपा अपनी।पीठ थप थपा रही है उसी तरह विपक्ष के खामे से नितीश कुमार को अलग कर देने से मोदी सरकार 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित कर रही है.

लेकिन जिस तरह महाराष्ट्र में एक समय शिव सेना बीजेपी पर भारी थी लेकिन आज यही बीजेपी शिव सेना को आँख दिखाती है, वही इसी वजह से ओडिशा में बीजू जनता दल से बीजेपी की नही बनी, इस बात की क्या गारेंटी है की 2020 के विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार को बीजेपी नीचा नही दिखायेगी, बहुत कुछ है जिसकी तस्वीर आने वाले समय में साफ होगी लेकिन एक बात तय है की नितीश कुमार के इस फैसले से नितीश कुमार मजबूत हो या ना हो, बीजेपी जरूर मजबूत हुई है और ये राजनीतिक घटना कर्म।आने वाले।समय में विश्व में श्री नरेंद्र भाई मोदी के रूप में एक लोकतान्त्रिक तानाशाह को भी उभार सकता है जिससे हो सकता है की भारत को एक हिंदू देश बनाने की कवायद को और ज्यादा बल मिले, आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा की समाज खुद को किस सांचे में ढालता है.

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