नीतीश के दांव से शरद हैरान

Posted by sandeep kumar
July 28, 2017

Self-Published

मिस्टर क्लीन की छवि बनाए रखने के लिए जेडीयू नेता नीतीश कुमार के दांव से भले ही राजद को जबर्दस्त पटखनी मिली है, लेकिन नीतीश के इस फैसले से जेडीयू में भी बगावत के सुर उठने लगे हैं। दरअसल जेडीयू के भाजपा के साथ हुए गठबंधन से राजद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव खफा हैं। नीतीश के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होकर उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी है। यही नहीं इसके अलावा वरिष्ठ नेता अली अनवर सहित करीब एक दर्जन अन्य नेता भी अंदरखाने नीतीश के फैसले के खिलाफ बगावती सुर निकाल रहे हैं। ऐसे में लालू प्रसाद के साथ मिलकर शरद अगर कोई अलग खिचड़ी पकाने में सफल होते हैं तो बिहार में नए बने गठजोड़ के लिए बहुमत की राह कठिन हो सकती है। हालांकि जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं सहित भाजपा नेता भी शरद यादव को मनाने के प्रयास में जुट गए हैं। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि गठबंधन बचाने के लिए भाजपा शरद यादव को केंद्र में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप सकती है।
1974 से 2009 तक संसद सदस्य रहे और दो बार राज्यसभा में जाने वाले शरद यादव नीतीश के फैसले के बाद पूरी तरह से आश्चर्यचकित हैं, क्योंकि नीतीश कुमार ने महागठबंधन को तोडऩे और भाजपा के साथ गठबंधन किए जाने के फैसले से पहले शरद यादव को भी विश्वास में नहीं लिया। सूत्र बताते हैं कि दो दिन पहले ही शरद यादव ने नीतीश को चेताया था कि यदि भाजपा के साथ गठबंधन किया जाता है तो भाजपा के खिलाफ तैयार की गई विपक्षी एकता की जमीन खिसक जाएगी। ऐसे में 2019 के लिए भाजपा बिहार में मजबूत स्थिति में आएगी जो कि भविष्य में जेडीयू के लिए भी खतरा बन सकती है। इसके बावजूद नीतीश के इस फैसले से पार्टी के स्तंभ माने जाने वाले यादव खुद को पार्टी से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। 2013 में भाजपा से अलग होने के जेडीयू के फैसले के बाद दो साल पहले बिहार में जेडीयू की कमान नीतीश कुमार ने अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद लगातार पार्टी में शरद यादव को हाशिए पर रखा जा रहा है। यही नहीं शरद यादव के समर्थक माने जाने वाले पार्टी के नेता अंदरखाने यह आरोप भी लगाते रहे हैं कि पार्टी में पारदर्शिता की कमी आ रही और नीतीश कुमार अपने फैसले थोप रहे हैं।
पिछले दो दिनों में बिहार की राजनीति में जिस तरह की उथल पुथल मची है। उसके बाद चौंकाने की बारी अब शरद यादव की है। सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश के फैसले से खफा शरद यादव के संपर्क में पार्टी के कई विधायक हैं। ऐसे में यदि शरद यादव को गठबंधन में उनके कद के मुताबिक जिम्मेदारी नहीं मिलती है तो वह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि भाजपा की ओर से उन्हें केंद्र सरकार में शामिल किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि नीतीश की घर वापसी के बाद उनके पुराने मित्र शरद को साधने में कितने सफल होते हैं।

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