पितृसत्ता का पिंजड़ा तोड़ती पटना की लड़कियां

भारत में महिला सशक्तिकरण और उनके हक की बातें तो बहुत की जाती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन सबसे कोसों दूर है। पटना भी इससे अछूता नहीं है। मर्दवादी मानसिकता यहां पोर-पोर में मौजूद है। इस शहर में स्कूल, कॉलेजों व कोचिंग में पढ़ने वाली छात्राओं की बहुत बड़ी आबादी रहती है। ज़्यादातर लड़कियां बिहार के दूसरे छोटे शहरों व गांवों से ताल्लुक रखती हैं, जो किसी तरह से अपने घर वालों को मनाकर पटना में पढ़ने आ पाई हैं। पर इस शहर में आने पर उन्हें भयावाह यथार्थ का सामना पड़ता है। कॉलेज या कोचिंग में पढ़ने जाते समय अक्सर शोहदे-गुन्डे इन छात्राओं को घूरते है और इन पर फब्तियां कसते हैं।

Pinjra Tod Movement In Patna

शायद ही ऐसा कोई दिन जाता हो, जब शहर में छेड़खानी की कोई घटना नहीं होती है। ज़्यादातर समय तो ये चुपचाप सब सह लेती हैं, परन्तु अगर कोई लड़की इन सबके खिलाफ पुलिस में शिकायत करती भी है, तो इसका परिणाम सिफर ही निकलता है। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा के नाम पर इन छात्राओं पर तमाम तरह की बंदिशे लगाई जाती हैं।

शाम 7 या 8 बजे के बाद इनके हॉस्टलों के दरवाज़े बंद हो जाते हैं। इनके पहनावे को लेकर भी तमाम तरह की नसीहतें दी जाती हैं कि वे क्या पहने और क्या नहीं।

सीधे शब्दों में झूठी सुरक्षा के नाम पर इन लड़कियों को ‘पिंजड़ों’ में बंद किया जाता है। इसी ‘पिंजड़े’ को तोड़ने के लिए पिछले कुछ समय से पटना की कुछ छात्राएं प्रयास कर रही हैं। पिछले कुछ महीने से पटना में ‘पिंजड़ा तोड़’ के नाम से छात्राओं का एक समूह सक्रिय है जो आम छात्राओं की रोज़मर्रा की परेशानियों को प्रशासन के सामने उठा रहा है। साथ ही शहर की आम जनता को भी इन छात्राओं की परेशानियों पर सोचने को बाध्य कर रहा है।

पिंजड़ा तोड़ से जुड़ी वारुणी जो पटना कॉलेज में इतिहास की छात्रा है, उन्होंने बताया कि ‘पिंजड़ा तोड़ ग्रुप’ गर्ल्स होस्टलों और कॉलेजों में जाकर लड़कियों को छेड़खानी के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए संगठित कर रहा है। उन्होंने इसके तहत कई कार्यक्रम भी किये हैं। छात्राओं के बीच नुक्कड़ नाटक से लेकर पोस्टर प्रदर्शनियां तक का आयोजन किया गया है। 6 मार्च को पिंजड़ा तोड़ द्वारा पटना की मुख्य सड़क माने जाने वाले अशोक राजपथ पर पटना विश्वविद्यालय इलाके में छात्राओं का जुलुस भी निकाला। आगे, पिंजड़ा तोड़  ऐसे और भी कार्यक्रम आयोजित करेगा।

उन्होंने आगे बताया कि पिंजड़ा तोड़ अभियान छात्राओं की कुछ बेहद बुनियादी मांगे सरकार के समक्ष रख रहा है। जिनमें प्रमुख हैं- कॉलेजों में एंटी-सेक्सुअल हरासमेंट सेल का निर्माण किया जाए, गर्ल्स होस्टलों के समीप पुलिस की गश्ती वैन हमेशा तैनात रहे, सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की भी समुचित व्यवस्था की जाए, छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कर्रवाई की जाए आदि। इस प्रयास को अब सफलता भी मिलनी शुरू हो गयी है, कई छात्राएं इस अभियान से जुड़ रही हैं।

हालांकि  यह सफर आसान नहीं रहा है। पिंजड़ा तोड़ से जुड़ी एक और छात्रा प्रियम्बदा ने बताया कि जब से इस अभियान की शुरुआत की गयी है, तब से शहर के इन शोहदों–गुंडों में खलबली सी मच गई है। पिंजड़ा तोड़ से जुड़ी छात्राओं को अक्सर इन शोहदों–गुंडों की तरफ से धमकियां मिलती रहती हैं। 6 मार्च को जब ‘पिंजड़ा तोड़’ की ओर से जूलूस निकाला जा रहा था, तब जूलूस में शामिल होने जा रही लड़कियों पर इन गुंडा तत्वों ने फब्तियां कसी व इनके साथ छेड़छाड़ की थी। आगे, प्रियम्बदा ने बताया कि उन्हें भी गुंडों से धमकियां मिली है, कि वे ये सब करना बंद करें। परन्तु, फिर भी ये निर्भीक लड़कियां डरी नहीं और दोनों घटनाओं की शिकायत पुलिस में दर्ज की। इन धमकियों को धत्ता बताते हुए ये लड़कियां अपने अभियान को जारी रखे हुए हैं।

रुग्ण मर्दवादी सोच रखने वाले लोगों को यह गवारा नहीं होता कि आखिर लडकियां कैसे अपनी जुबान खोल सकती हैं? इन्होने समाज में व्याप्त स्त्री-विरोधी, पितृसत्तावादी मानसिकता का विरोध किया है, इसलिए इन्हें ऐसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इतने पर भी ये बहादुर लड़कियां अपने संघर्ष में डटी हुयी हैं। आज के इस दौर  में पटना की छात्राओं की यह पहल काबिल-ए-तारीफ है।

 

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