बाल-श्रम

Posted by SHASHANK MISHRA
July 21, 2017

Self-Published

वो जो हर रोज ख्वाबो को नज़दीक से देखता है और महसूस करता है,जब वह देखता है,सुबह अच्छे अच्छे कपड़े पहने स्कूल जाते बच्चो को ,धीरे धीर स्कूल बस में चढ़ते बच्चो को ,देखता है वो सपने नज़दीक से ,मन उसका भी करता है,स्कूल जाने को ,टिफिन में बढ़िया खाना ले जाने को,दोस्त बनाने को,सब कुछ पढ़ने को ,सब कुछ याद करने को ,सब कुछ याद रखने को,देखता है वो सपने बड़ी नजदीक से ,(होटल की कोने वाली मेज साफ करते हुए ।)देखता है वो दिन भर की भाग दौड़ को नजदीक से ,वो भी भागना चाहता है,वो भी खेलना चाहता ,वह भी उड़ती पतंग की तरह उड़ना चाहता है,वह देखता है नजदीक से हम उम्र बच्चो को ये सब करते हुए ,वह देखता है सपने बड़ी नजदीक से ।आज होटल में एक बच्चा आया है,पूरा होटल बुक किया है माता पिता ने ,शायद जन्मदिन है बच्चे का,किस्मत है बच्चे की ,माता पिता का लाड प्यार है,केक कटता है,खुशियां बटती है,बच्चे के दोस्त उछल कूद मचाते हैं ,फिर वो देखता है अपने सपने नज़दीक से ,(बर्तन माँझते हुए ) ।बात उसी “‘छोटू'” की हो रही है जिसे आप सबने भी देखा है बड़ी नजदीक से ।Kailash Satyarthi (b.India) Nobel Peace Laureate 2014.And Honrary chair person of Global March against Child Labour.He founded The ‘BACHPAN BACHAO ANDOLAN’ in 1980 and has acted to protect the rights of more than 83000 children from 144 countries.खैर छोड़ो बता ये रहे थे कि ऊपर की बातें ‘काल्पनिक ‘हो सकती हैं पर नीचे वाली बात काल्पनिक नही है ।ये वास्तविकता है ।~शशांक

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