बिहार में बहार है!

Posted by gautamthepower
July 17, 2017

“बिहार में बहार है” यह व्यंग तो अक्सर सुना जाता है। अभी हाल ही में बिहार बोर्ड के परिणाम आने के बाद इसके कयाद और भी बढ़ गए हैं। बिहार शब्द सुनते ही आपके दिमाग में एक पिछड़े हुए राज्य की छवि आती है जो अनपढ़, अशिक्षित, चोर उचक्के, पिछड़े हुए, लफंगे, गुंडे बदमाश लोगो को राज्य लगता है। शिक्षा के मामले मेे भी बिहार को नकल और धोखाधड़ी करके पास करने वाले छात्रों को राज्य समझा जाता है। यह एक मात्र ऐसा बोर्ड है, जहां के छात्रों को परीक्षा परिणाम आने के बाद मीडिया ट्रायल लिया जाता है। तमाम मीडिया चैनल इस बात को साबित करने में लग जाते है कि कैसे इस राज्य को चोरों और मक्कारों का राज्य घोषित किया जाए।

हालिया बिहार बोर्ड के परिणाम बहुत ही खराब आए। कम से कम आंकड़ों के हिसाब से तो बुरे ही कहे जाएंगे। इतने बुरे परिणामों के वावजूद, देश क कथित मीडिया सवालों की लिस्ट लेकर पहुंच गया और कैमरे के आगे छात्र की परीक्षा लेने लगा। मीडिया सीबीएसई टॉपर के पास कभी यह पूछने नहीं जाती की आपका विषय क्या था मगर बिहार बोर्ड के छात्र के पास सवालों की पूरी लिस्ट लेकर पहुंच जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि साइंस को छोड़िए, साहित्य में 95% लाने वाले सीबीएसई के छात्र से मीडिया कभी कोई सवाल नही करती। उनसे कभी यह नहीं पूछता की क्या आप मुंशी प्रेमचंद या सुभद्रा कुमारी चौहान को जानते है। मगर बिहार बोर्ड से पास हुए छात्र के पास पहुंच गए कैमरा लेकर परीक्षा लेने, आप गणित के फार्मूले बता दो और संगीत के सुर और ताल की पहचान करा दो।
बिहार बोर्ड के छात्रों से सवाल पूछना गलत नहीं है, मगर सिर्फ बिहार बोर्ड के छात्रों से सवाल पूछना मीडिया के बिहार के प्रति ओछी सोंच को दर्शाता है। मीडिया कभी सीबीएसई के छात्र की परीक्षा नहीं लेता। इसी साल हरियाणा के एक स्कूल में 10वी की परीक्षा में सारे बच्चे फेल हो गए, क्या मीडिया ने वहां कैमरा लेकर सिस्टम को गलत बताया? महाराष्ट्र के एक विश्वविद्यालय में स्नातक की परीक्षा में सभी छात्र फेल हो गए, क्या मीडिया ने वहां सवाल जवाब किया? और भी कई उदाहरण है जो हैरतअंगेज करने वाले है, मगर बिहार तो हमेशा से मीडिया के दुराग्रह का शिकार रहा है।
आइए, आपको बताते हैं कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं। बिहार में कक्षा 8 तक के करीब 70 हजार विद्यालय हैं, जिनमें 48 हजार से ज्यादा विद्यालयों में खेल का मैदान​ भी नहीं है। बहुत सारे स्कूल ऐसे हैं जहां साफ पीने का पानी नहीं मिलता।  स्कूलों में 2.5 लाख से ज़्यादा टीचर की कमी है। ऐसे में आप कैसी शिक्षा की उम्मीद करते है? हर बार परीक्षा के पहले और कॉपी चेक करने के समय शिक्षक समुदाय सरकार और बोर्ड को ब्लैकमेल भी करते हैं, अब ऐसी हालत में आप क्या उम्मीद करते है?
मैं ये नहीं कहता कि बिहार में सबकुछ सही है और शिक्षा का स्तर उच्चतम है। हां मगर एक बात तो है, आप चाहे किसी भी बोर्ड का सिलेबस उठाकर देख लीजिए और उसे बिहार बोर्ड के सिलेबस से कंपेयर करिए। आपको खुद ही फर्क नज़र आ जाएगा। सरकार मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पाती हैं।सरकार खामोश है, और बोर्ड की हालत मछली बाज़ार की तरह हो गई है। भ्रष्टाचार से इस कदर सना यह राज्य अगर ऐसा परिणाम लाए तो क्या गलत है? शिक्षा मंत्रालय घोड़े बेच सो रहा है और छात्रों के भविष्य का किसी को पता नहीं है।
आइए अब एक और पहलू पर गौर कीजिए। जिस राज्य की शिक्षा प्रणाली पर आपने मीडिया ट्रायल करा दिया। जिस राज्य के छात्रों को आपने नकलची और धोखेबाज करार दिया है, आइए अब उसी राज्य के शिक्षा के परिणामों के बारे में कुछ जानते हैं।
बिहार अकेले इतने IAS और IPS ऑफिसर देता है, जितने आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और गुजरात मिला कर भी नहीं नहीं दे पाते। सबसे ज्यादा बैंक PO हर वर्ष बिहार से ही होते हैं। IIT में अकेले बिहार के इतने छात्र हैं जितने गुजरात और महाराष्ट्र मिला कर भी पूरा नहीं कर सकते। आज भी AIIMS में सबसे ज्यादा बिहारी डॉक्टर है। अगर लिखने लगूं तो लिख ना पाऊंगा, बिहार के छात्रों ने पूरे विश्व में अपना परचम लहराया है।
जरा सोचिए, जो बिहार मूलभूत सुविधाओं के अभाव में भी अपना झंडा बुलंद कर सकता है, उसे अगर सारी सुविधाएं दी जाए तो वह कहां से कहां पहुंच जाएगा। मीडिया कर्मियों को सलाह है कि अगली बार बिहार को कोसने से पहले एक बार उसके बारे में जान ले। बिहार इतना भी पिछड़ा नहीं है जितना आप दर्शाते हैं।

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