भारत का भगवा होता मानचित्र:

Posted by Afaq Ahmad
July 17, 2017

भारत का भगवा होता मानचित्र:

बात अटल जी के दौर से शुरू करता हूं, जब ‘अधकचरी भगवा सरकार’ होते हुए भी कहीं ‘mob lynching’ नहीं होती थी। मज़हब के नाम पर दलितों और मुसलमानों को मौत के घाट नहीं उतारा जाता था। तब गुजरात में मुसलमानों के नरसंहार के बाद भारत का प्रधानमंत्री सूबे के मुख्यमंत्री को ‘राजधर्म का पाठ’ पढ़ा सकता था।

पर अब ऐसा नहीं है। अब जिसे मुसलमानों का छिपा दुश्मन समझा जाता था, वही कांग्रेस मुसलमानों को भली मालूम पड़ने लगी है। क्योंकि ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के शासनकाल में कम से कम एक आम मुसलमान कहीं प्रोटेस्ट तो दर्ज करा ही सकता था। हम एक प्रधानमंत्री के कारनामों में मीन-मेख निकाल सकते थे, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मज़म्मत कर सकते थे। किसी थाने-चौकी में एक आम दलित और मुसलमान की रिपोर्ट दर्ज हो सकती थी, हम सड़क पर सरकारों के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी कर सकते थे। पर अब ऐसा नहीं है, अब तो ऐसा हुआ नहीं कि सरकार के बचाव में विहिप, बजरंग दल, आरएसएस, हिन्दू युवा वाहिनी, हिन्दू महासभा वगैरह-वगैरह के लठैत पहुंच जाएंगे और ख़ून-ख़राबे की नौबत आ जाएगी।

हम उस दौर से अभी जल्द ही गुज़रे हैं, जब हिन्दू-मुस्लिम साथ बैठकर खाना खा सकते थे। मांस-मछली की दावत खाने एक हिन्दू अपने मुसलमान दोस्त के घर अक़्सर आया-जाया करते थे। साथ हंसी-ठिठोली होती थी, गप्प-सड़ाके लगते थे…पर अब मोदी की भाजपा ने इस अनेकता में एकता का दाह-संस्कार करवा दिया है। हमने अटल-आडवाणी की भाजपा भी क़रीब से देखी है पर इस मोदी की बीजेपी में दलितों-मुसलमानों का जैसा सुनियोजित नरसंहार चल रहा है, वो समूचे भारत के मानचित्र का भगवाकरण करने की एक बानगी भर है।

राष्ट्रपति के पद की गरिमा धूल-धूसरित होगी ऐसा कांग्रेस के दौर में नहीं था। वो भी दलित ही हैं, पर जिसने ज़िंदगी भर RSS-BJP की चाकरी की हो वो दलितों का मसीहा कैसे हो सकता है? ये तो बिल्कुल ऐसे ही है कि जैसे कांशीराम ने दलितों के घाव भरे और जब दलित-हरिजन स्वस्थ हुआ तो मायावती ने इनसे वोटों की खेती करायी और ख़ुद सिंहासन पर आरूढ़ हो गई।

रामनाथ कोविंद जी का देश के लिए योगदान बस इतना ही है कि इन्होंने अपना जीवन आरएसएस को दान कर दिया। फलस्वरूप भाजपा ने इनके ख़ाते में राष्ट्रपति का पद डाल दिया!

मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, अब बच क्या रहा है—पूरा RSS का कैडर जब देश के शीर्षस्थ पदों पर विराजमान हो जाए तो इनसे मोर्चा लेने के लिए लालू यादव, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, सोनिया गांधी ही बचते हैं। मुलायम-मायावती तो CBI से बचने के लिए पहले ही हथियार डाल चुके हैं!

एक दौर था जब लालकृष्ण आडवाणी ने मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी का बचाव किया था। आज आडवाणी का जो हाल है वही हाल मोदी का भी होना तय है क्योंकि जिसकी फसल आज मोदी खा रहे हैं, आगे चलकर ये फसल कोई और काटेगा। राजनीति में हर तानाशाह ख़ुद अपने अंदर एक भष्मासुर पालकर रखता है जो उसका सर्वनाश करता है। समय आयेगा जब इस मोदी का सत्यानाश एक योगी ही करेगा।

जनता भ्रमित है, मदमस्त है…जब तक जनता को दाने-दाने की मोहताज नहीं बनायेगी ये सरकार, तब तक जनता मोदीमय बनी रहेगी। जनता सचेत तभी होगी जब त्राहि-त्राहि मचेगी और आम जनमानस के पेट की आग लावा बनकर उसके बाल-बच्चों को भस्म कर देगी!

 

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