मर्डर और रेप वाली सरकार: योगी सरकार!

Posted by Afaq Ahmad
July 22, 2017

Self-Published

 

यूपी में योगी सरकार बनने से लेकर अब तक 729 मर्डर, 803 रेप, 60 डकैती, 799 लूट और 2682 लूट की घटनाएं हुई हैं।

बीते सालों का मुआज़ना करें तो अपराध में हुई ये बढ़ोत्तरी पिछली सरकारों के मुक़ाबले में 30 फ़ीसद ज़्यादा है—इससे पहले अखिलेश यादव की हुकूमत में मुल्क के 18 सूबों से बेहतर क़ानून-व्यवस्था उत्तर प्रदेश की थी-ये नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्योरो का आँकड़ा था।

इस पर आदित्यनाथ योगी का कहना है कि क़त्ल के मामलों में पिछले साल की तुलना में 5 फ़ीसदी की कमी आई है।

मेरा मानना है कि नज़्म-ओ-नश्क़ को लेकर कोई मुआज़ना करना इंसानी ख़ून और इंसानियत की तौहीन है क्योंकि अपराध में गिरावट की बजाय ये कहना कि फलां साल की तुलना में इस साल मर्डर कम हुए हैं या बलात्कार की घटनाओं पर पिछले सालों की बनिस्बत कमी आई है…ये सब तब जायज़ नहीं जब सरकारों पर इस तरह की जंगी या ख़ूनी वारदातों पर पूर्णविराम लगाना एक महती ज़िम्मेदारी बनती है और एक ऐसी पार्टी की सरकार जो इसी मुद्दे को हवा देकर सत्तारूढ़ हुई है उसे शोभा नहीं देता कि अपराध की घटनाओं पर ज़मीनी सतह पर अंकुश लगाने की बजाय इसका तुलनात्मक अध्ययन करती फिरे..!!

योगी जी! सिर्फ़ कथित ‘अपवित्र गूलर के पेड़ छँटवाने’ से उत्तर प्रदेश की धरती पवित्र नहीं हो जाती है! गोरखनाथ मंदिर के महंत अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ योगी आदित्यनाथ जैसे ‘हिंदुत्व के सबसे बड़े फ़ायरब्रांड नेता’ का भगवा वस्त्र धारण कर और सतत् तौर पर सिर का मुंडन करवाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होना किसी तिलिस्म से कम नहीं था—ख़ुद योगी आदित्यनाथ पर हत्या के प्रयास, दंगा करने, सामाजिक सद्भाव को नुक़सान पहुँचाने, दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने, धर्मस्थल को क्षति पहुँचाने जैसे आरोपों में तीन केस दर्ज हैं…अब जब मुखिया ही क़ानून का मुजरिम हो और आज ख़ुद क़ानून बनाने और बिगाड़ने वाला रखवाला हो, आप किससे और कहां इंसाफ़ की दुहाई देते फिरेंगे!!!

एक निजी सेना के रूप में योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित हिन्दू युवा वाहिनी के ख़ाते में गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर से लेकर मऊ, आज़मगढ़ तक पर मुसलमानों पर हमले और साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने के दर्जनों मामले दर्ज हैं।

हिन्दू युवा वाहिनी की हरकतों की वजह से पूर्वांचल में हालात बद से बदतर होते गये हैं। यूपी का वज़ीर-ए-आला बनने से पहले तक योगी और हियुवा नेता खुलेआम हिंसा की धमकी देते फिरते थे और मामूली से मामूली घटनाओं को सांप्रदायिक हिंसा में बदल दिया जाता रहा है।

2002 के गुजरात दंगों के दौरान हिन्दू युवा वाहिनी ने गोरखपुर बंद कराया था और टाउनहॉल में सभा की थी जिसमें ‘एक विकेट के बदले दस विकेट गिरने’ और ‘हिंदुओं से अपने घरों पर केसरिया झंडा लगा लेने की बात कही गई ताकि पहचान हो सके कि किन घरों पर हमला करना है।’ उस वक़्त योगी के समर्थक नारे लगाते फिरते कि ‘ गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है।’ गोरखपुर के बाहर दूसरे जगहों पर ये नारा ‘पूर्वांचल में रहना है तो योगी-योगी कहना है’ हो जाता। अब तो ये नारा ‘यूपी में रहना है तो योगी-योगी कहना है,’ में तब्दील हो गया है।

…तब से अब तक योगी की हिन्दू युवा वाहिनी के प्रिय विषय लव जिहाद, घर वापसी, इस्लामिक आतंकवाद, माओवाद पर हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन रहे हैं, इस तरह हिन्दू युवा वाहिनी के गोरखपुर के इलाक़े में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण योगी को भारी-भरकम वोटों से सियासी कामयाबी मिलती रही है।

जिस पूर्वांचल में योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे बड़े नेता हैं, वहां भी 17 सालों में बीजेपी विधायकों की संख्या 10 से अधिक नहीं हो पाई थी। इस तरह देखा जाये तो इस बार के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 312 विधायक मिलना हमें कहीं से योगी का कथित करिश्माती राजनीति व्यक्तित्व नहीं लगता!

…’हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेने और हाथ में तलवार उठाने’ जैसी संज्ञा से विभूषित किये जाने वाले योगी जी की ‘विधर्मियों’ को घेरकर मारने वाली हियुवा सेना का सेनापति ही जब सिंहासन पर विराजमान हो तो एक बहुधर्मी, बहुनस्ली, बहुरंगी मुल्क में ‘लोकतंत्र का अपहरण’ और ‘विधर्मियों का चीरहरण’ एक आम बात होती जा रही है..!

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