मेरे इज्जत को व्यापार मत समझो, मैं हूँ एक नारी मुझे लाचार मत समझो!

Posted by Akanksha Anand
July 29, 2017

Self-Published

एक महिला अपने जीवन में कई भूमिका निभाती है! मां, बहन, बेटी और एक पत्नी के रुप में, लेकिन हर स्थिति में वो आज अपने आप को असुरक्षित पा रही है! आधुनिक समाज में स्त्रियों की सुरक्षा अधिक चिंता और बहस का केंद्र बिन्दु बन गया है! यह सवाल संसद से लेकर सड़क तक दौड़ रहा है! नारी की मर्यादा को तार-तार करनेवाली कुछ घटनाओं ने तो हमारी संस्कृति को दुनिया के सामने शर्मसार किया है! महिलाओं के प्रति बढती हिंसा को लेकर भारत दुनिया के निशाने पर है! दिल्ली निर्भया कांड हो, उबर कैब कांड या फिर बदायूं जैसे अपराध पर संयुक्त राष्ट्र भी चिंता जता चुकी है! अब विदेशी मीडिया भारत में हो रही इस तरह की घटनाओं में अपना बाजार तालाश रहा है! निर्भया कांड के बाद देश में इस तरह की घटनाओं में और इजाफा ही हुआ है! इससे यह साबित होता है कि नारी सुरक्षा के मुद्दे पर बड़ी -बड़ी कानूनी किताबें तैयार कर इस पर हम तब तक प्रतिबंध नहीं लगा सकते, जब तक हमारा नजरिया और हमारी सोच नहीं बदलेगी! देश की राजधानी दुष्कर्म प्रदेश में तबदील हो गया है! महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा दूष्कर्म दिल्ली, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में होता है! लेकिन अभी हाल ही में उत्तराखंड की एक गुड़िया की जिंदगी को दरिंदों ने अपना शिकार बना उसे मौत के मुंह में ढकेल दिया! दुनिया में 8 मार्च को महिलाओं के अधिकारों और उपलब्धियों को लेकर जगह -जगह भाषण, सेमिनार व उत्सव मनाया जाता है! लेकिन पूरी दुनिया में स्त्रियों के अधिकार का हनन हो रहा है और उनकी स्वतंत्रता का सवाल अहम बन गया है! रात में घर की दहलीज़ को लांघना स्त्रियों के लिए मानो सघर्ष जैसा हो गया है! हालांकि भारत के वैदिक समाज में स्त्रियों को जिस तरह का सम्मान प्राप्त था! उसकी मिसाल कहीं नहीं मिलता है, लेकिन आज केवल यह धर्मग्रंथों और मंच तक ठहर गया है! राष्ट्र अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकडे़ तो आपके के दिल को झकझोर के रख देंगे! देश भर में हर रोज 93 महिलाओं से दुष्कर्म होता है! जबकि दिल्ली में ये आंकड़ा प्रतिदिन चार का है! वर्ष 2012 में देशभर में 24, 923 महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएँ घटी, जबकि एक साल यानि 2013 में यह बढ़कर 33, 707 पर पहुंच गया! निर्भया कांड के बाद बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि ही हुई है! इससे बड़ी शर्मनाक बात हमारे देश के लिए क्या हो सकती है?
अब यह हमारे देश और सरकार के लिए सबसे बड़ा और अहम सवाल है कि क्या वो महिलाओं को दरिंदों के शिकार से बचा पाएगा? जहाँ एक तरफ हमारे देश के दिग्गज लोग ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ का नारा लगाते है वहीं दूसरी तरफ ना जाने कितने लोग बेटी को अपने कोख में ही खत्म करवा डालते है! क्योंकि हर कोई यहाँ अपने बेटी की इज्जत का हनन होने से घबराता है! क्या यह घबराहट को खत्म करने में देश और सरकार साकार हो पाएगा!

.   .   आकांक्षा आनंद ✌

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