लालू यादव जी

Self-Published

1989, भारत देश के लोकसभा चुनाव, राजीव गांधी के रूप में कांग्रेस पिछड़ चुकी थी वही वीपी सिंह की जनता दल की भारतीय जनता पार्टी के बाहर से समर्थन वाली सरकार सत्ता में मौजूद थी, जँहा जनता दल की निगाह सरकार तक सीमित थी वही भाजपा का मंथन कुछ और ही था, राम जन्म भुमि के संदर्भ में लालकृष्ण आडवाणी जी का रथ गुजरात के हिंदू आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर से निकल कर भारत भृमण करते हुये अयोध्या में रुकना था, इस समय श्री नरेंद्र भाई मोदी जी भाजपा के एक वरिष्ठ कार्यक्रता थे और इस रथयात्रा और रथ निर्माण में इनका अहम योगदान था, उस समय राज्य बिहार में श्री लालू यादव जी मुख्यमंत्री थे जिनके आदेश पर राज्य बिहार की सीमा में रथ के प्रवेश होते ही इसे रोक दिया गया, इसी से तिलमिलाई भाजपा ने केंद्र में वीपी सिंह की सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर सरकार को अलप मत में ला दिया, मसलन वीपी सिंह की सरकार को गिरा दिया लेकिन रथ को चलाने से जँहा भाजपा हिंदू वोट पर अपना एकाधिकार जता रही थी वही इसी रथ को रोककर लालू जी ने मुस्लिम वोट पर अपनी मोहर लगा दी थी, इसी के बल बूते लालू जी 15 साल तक बिहार की राजनीती में काबिज रहे और इसी राम जन्म भूमि के माध्यम से भाजपा ने कई राज्य और केंद्र में अपनी सरकार बनाई लेकिन अक्सर लालू जी और भाजपा के रूप में श्री नरेंद्र भाई मोदी जी अक्सर राजनीती के मैदान में आमने सामने खड़े दिखाई देते है.

कुछ समय बाद, भरष्टचार के आरोप लगने से लालू जी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर, अपनी धर्मपत्नी श्री राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री की शपथ दिलवा दी और खुद केंद्र की सत्ता और राजनीति की और रुख किया, इनका यँहा भी पारंपरिक वोट बैंक मुस्लिम समुदाय और यादव ही था, जिसके तहत अक्सर इनकी नजदीकियां कांग्रेस पार्टी से रही है वही अक्सर ये भाजपा को कोसने का कभी भी मौका नहीं गवाते थे, अक्सर अपनी चुनावी भाषण में या किसी भी आप सभा में ये भाजपा को भारत जलाओ पार्टी ही कहते थे, 2002 के गुजरात के दंगों के दौरान एक तरह से केंद्र में मुख्य पार्टी के रूप में भाजपा की सरकार थी जँहा प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी सुशोभित थे और गुजरात में पूर्ण बहुमत से भाजपा की राज्य सरकार थी जँहा मुख्य मंत्री के रूप में श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी विराजमान थे, इस समय भी लालू जी के भाजपा पर अति उग्र ब्यान बाजी जारी थी. (https://m.rediff.com/news/2002/feb/08laloo2.htm)

लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और सहयोगी पार्टीयो का गटबंधन का साइनिंग इंडिया एक आम नागरीक को रास नही आया और उसने इस चुनाव में भाजपा को पटकनी दे दी, नयी सरकार सरदार मोहन सिंह जी के रूप में कांग्रेस और इनके सहयोगी पार्टीयो की बनी जिसमे लालू जी भी शामिल थे और इन्होंने रेल मंत्रालय का कार्य भार संभाला, जँहा 2005 में लालू जी ने बतोर रेल मंत्रालय गोधरा स्टेशन पर 2002 में जलाई गयी साबरमती एक्सप्रेस पर एक जांच कॉमिशन बिठा दिया जिसकी रिपोर्ट भी बाद में आयी (http://m.timesofindia.com/india/Godhra-train-fire-accidental-Banerjee-report/articleshow/1437742.cms) लेकिन इस जांच कमिशन से लालू जी और भाजपा की तंगदिल और बढ़ गयी, यँहा भाजपा का मतलब गुजरात राज्य के उस समय के मुख्य मंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी के रूप में देखा जाने लगा, इसी समय दरम्यान गुजरात के वडोदरा रेलवे स्टेशन के बाहर लालू जी पर कुछ लोगो ने हमला कर दिया, आरोप लगा की ये हमला राजनीती से प्रेरित था लेकिन एक कैबिनेट दर्जे के केंद्र सरकार के मंत्री पर इस तरह का हमला अपने आप में बहुत कुछ ब्यान कर रहा था, (http://m.timesofindia.com/Accident-forgotten-govt-probes-Lalu-attack/articleshow/1085148.cms) इसी बीच गुजरात राज्य के 2007 के चुनाव में लालू जी राज्य में कांग्रेस की और से प्रचार भी करते दिखाई दिये खासकर मुसिलम बहु इलाके, भाषण के शब्दो में भाजपा और मोदी जी के प्रति वही शैली रही जिसके लिये लालू जी जाने जाते है.

लेकिन, राजनीतिक का हुनर कहै जाने वाले श्री लालू जी 2009 के लोकसभा चुनाव में एक आम भारतीय को समझ नही पाये और जँहा एक आम भारतीय नागरिक कुछ बदलने के मूड में नही था, और इसी के चलते लालू जी और इनके घोर विरोधी श्री राम विलास पासवान ने बिहार की लोकसभा चुनाव में गठजोड़ स्थापित्त कर लिया और सीट का बटवारा भी खुद कर कांग्रेस को बहुत कम, मसलन बिहार की राजनीति में कांग्रेस को हाशिये पे ला दिया. लेकिन भारतीय नागरिक की मानसिकता को पढ़ना मुश्किल है यँहा अनुभवी चुनावी पंडित भी कुछ कहने से पहले कतराते है ऐसे में चुनावो का नतीजा कांग्रेस और इसके सहयोगी दलों के पक्ष में गया, सरदार मनमोहन सिंह फिर एक बार प्रधान।मंत्री बन गये, भाजपा की क्लास संघ के दफ्तर में लग रही रही, भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार श्री आडवाणी अब विपक्षी दल के नेता होने का मान भी सदन में खो चुके थे, लेकिन लालू जी के हालात कुछ सही नही थे, चुनाव से पहले कांग्रेस को आँख दिखाने वाले।लालू।जी अब चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस से ताल मेल बनाने का हर कयास कर रहे थे.

लेकिन जो पारंपरिक कांग्रेस को जानते है, वह समझते है की कांग्रेस कभी भी अपने दुश्मनों के।लिये दयावान नही रही वही उन दोस्तों पर इस राजनीतिक दल का कड़ा रुख रहा है जिसने एक समय कांग्रेस का सहारा लिया लेकिन बाद में इसी कांग्रेस से बेईमानी।की है, अब लालू जी, भी इसी श्रेणी में आ गये थे, नतीजन लालू जी के खिलाफ चल रहा भरष्टचार का अदालती मुकदमा अब खबरों की सुर्खियां बनने वाला था, 2013 में लालू जी को अदालत ने सजा सुना दी जिससे तुरंत प्रभाव से इनकी लोकसभा की सदयस्ता भी ख़ारिज कर हो गयी. (http://www.thehindu.com/news/national/lalu-jailed-for-five-years/article5195557.ece)

इसी बीच, बिहार की राजनीति भी बदल रही थी, 2005 और 2010 में भाजपा के सहयोग से जनता पार्टी के नितीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज रहे, इनकी लोकप्रियता में इजाफा हो रहा था, मुस्लिम वोट में भी नितीश की पेठ अच्छी थी, इसी के चलते भाजपा खासकर गुजरात के मुख्य मंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी से इनके राजनीतिक मतभेद किसी से छुपे नही है, इसी के चलते 2013 में जब भाजपा और इसके सहयोगी दलों ने श्री मोदी जी को 2014 के लोकसभा चुनाव के मध्यनजर अपना प्रधान मंत्री का उम्मीदवार घोषित किया तब सबसे पहले जनता दल और नितीश कुमार ने भाजपा से अपना राजनीतिक रिश्ता तोड़ लिया, अलप मत में आयी राज्य सरकार को लालू जी ने सहारा दिया, 2014 में लोकसभा में मोदी जी जीत गये और उसके बाद कई राज्यो में मोदी लहर ने विपक्षी दलों का सफाया कर दिया, अब राजनीतिक हालातों से होता हुआ बिहार भी अपने अगले राज्य चुनाव पर आ खड़ा हुआ, यँहा नितीश कुमार और लालू जी अपनी राजनीतिक छवि को बचाने के लिये संघर्ष शील थे क्योंकि यँहा इनकी हार इनकी राजनीतिक कद को बहुत कम कर सकती थी, इसी लिये अपनी अपनी मजबूरियों के चलते और भाजपा को हराने के लिये नितीश कुमार और लालू जी, दो कड़े विरोधी एक साथ राजनीतिक गटबंधन में जुड़ गये और तीसरा पक्ष था कांग्रेस.

सारे चुनावी विश्लेषकों को गलत साबित कर, मोदी लहर को बिहार राज्य की जनता ने रोक दिया था, यँहा आये नतीजो से नितीश कुमार और लालू जी का गटबंधन पूरी तरह से विजय रहा और खास बात यह रही की लालू जी के पक्ष को नीतीश कुमार के पक्ष से ज्यादा सीट मिली, लेकिन त्यसुदा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नितीश कुमार ही राज्य में तीसरी बार मुख्य मंत्री बने और उप मुख्यमंत्री के रूप में लालू जी के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने पद भार संभाला, सब कुछ सकुशल चल रहा था, की लालू जी के।करीबी माने जाने वाले बिहार में दबंग की छवि रखने वाले शहाबुदीन को अदालत से जमानत मिलने पर, शहाबुदीन द्वारा नितीश कुमार पर किये गये शब्दो के प्रहार और नितीश कुमार की सरकार द्वारा शहाबुदीन की जमानत को उचच अदालत में चुनोती देने से जँहा शहाबुदीन एक बाद जेल में है लेकिन इस बाद दिल्ली की तिहार जेल में, वही इसी घटना कर्म से नितीश कुमार और भाजपा में तनाव कम होने के संकेत।मिले वही नितीश जी के लालू जी से सबंधो में खटास आने के भी खबर प्रचलित हुई, इसी बीच लालू जी द्वारा की गयी राजनीतिक रैली जिसका नारा भाजपा हटाओ, देश बचाओ का था (http://www.livemint.com/Politics/ijscaPuoqTLUfGVpZ4KYMI/AntiBJP-rally-in-Patna-SP-BSP-to-join-Lalu-Prasad-in-show.html) में जँहा बाकी सभी गैर भाजपा घटक दलो ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई वही इस रैली से नितीश कुमार गायब ही रहे लेकिन कह सकते है की इसी रैली के बाद लालू जी और उनके परिवार के सदस्यों के कई ठिकानों पर सीबीआई द्वारा रेड डाली गयी और इसी के चलते आज लालू जी और नितीश कुमार का गटबंधन पर सवालिया चिन्ह लग गया है.

बिहार राज्य, जँहा 20% से के आस पास मुस्लिम आबादी है, दबंगों का अक्सर यँहा दबदबा रहता है लेकिन इस प्रदेश की एक खाशियत रही है यँहा धर्म के नाम पर दंगे बहुत कम या ना मात्र के हुये है, आप सी प्रेम समाज में आज भी मौजूद है, लालू जी के बिहार के कार्य काल में प्रदेश आर्थिक मंदी और बदहाली की और बढ़ गया था, भरष्टचार अपनी चरम था और कानून व्यवस्था भी बहुत कुशल नही थी, शायद लालू जी एक मुख्य मंत्री के रूप में कामयाब ना गिने जाये लेकिन इनके रहते कभी कोई धार्मिक दंगा नही हुआ, इन्होंने एक राजकीय प्रदेश की राजनीति तक सीमित रहते हुये भी केंद्र की बाहुबली राजनीतिक दल भाजपा और कोंग्रेस को अक्सर आँख दिखाई है, आज अगर नितीश कुमार और लालू जी का गटबंधन जो की मात्र एक ताकत वर गैर भाजपा के रूप में एक सशक्त विपक्ष का किरदार निभा सकता है, लेकिन अगर ये गटबंधन टूट जाता है तो यकीनन ये उन ताकतों की जीत होगी जो धर्म के आधार पर एक नये भारत देश का निर्माण करना चाहते है, जिसका परिणाम निकट भविष्य में बहुत गंभीर देखने को मिल सकता है.

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