वर्तमान में शिक्षा : हाशिए का मुद्दा

Posted by Ritu Sharma
July 22, 2017

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

 

शिक्षा समाज की रीढ़ के समान होती है,जिसपर पूरे समाज के बौद्धिक और भौतिक विकास का ढांचा खड़ा होता है।शिक्षा की उपेक्षा समाज को अपाहिज बनाने की साजिश के समान है।शिक्षा का स्वरुप,समाज के स्वरुप को तय करता चलता है।जिस तरह की शिक्षा की व्यवस्था समाज में होती है,उसीतरह समाज बढ़ता और विकसित होता है।प्रत्येक पीढ़ी की विचारधारा और उसके कामकाज का तरीका काफी हद तक उसे प्राप्त शिक्षा के स्वरुप पर निर्भर करता है।आज हमारे देश में युवावर्ग की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है और युवाओं के साथ देश का वर्तमान और भविष्य जुड़ा है।लेकिन फिर भी युवावर्ग की शिक्षा का मुद्दा आज हाशिए का बिषय बनकर रह गया है।आऐ दिन फिजूल के मुद्दे और गैरजरुरी मामले समाज,राजनीति,मीडिया और रोजमर्रा की जिन्दगी में भी चर्चा और बहस के मुद्दे बने हुये हैं और मनुष्य की बुनियादी जरुरतें;शिक्षा ,स्वास्थ,रोजगार,गरीबी आदि अधिकांश तबकों और अधिकांश लोगों की उपेक्षा के शिकार हैं।इसके दुष्परिणाम देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी को भुगतने होंगे।शिक्षा को नजरअंदाज करने का नतीजा नई पीढ़ी में असंवेदनशीलता,मानवीय मूल्यों के प्रति उदासीनता के साथ गैरजरुरी कार्यौं में उनकी सक्रियता के रुप में इन दिनों स्पष्टतः देखी जा सकती है।वर्तमान सरकार की नीतियों और योजनाओं में भी बुनियादी जरुरतों के प्रति उदासीनता है।शिक्षा के प्रति सरकार और समाज का रूखा रवैया चिन्ता का बिषय है।आज सरकार के पास भी शिक्षा को लेकर किसी स्पष्ट और प्रभावी नीति का अभाव है।जो शिक्षा के प्रति सरकार की मंशा को साफ जाहिर करती है।जरूरत है कि समाज और युवावर्ग स्वयं इन बुनियादी मुद्दों के प्रति जागरुक और संवेदनशील बनें और सरकार को इस संबंध में प्रभावी कदम उठाने हेतु बाध्य करें।

‘शौक-ए-दीदार अगर है तो नजर पैदा कर’

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.