चंगेज़ खान: दुनिया के लिए ज़ालिम योद्धा और मंगोलिया के लिए आदर्श

Posted by Afaq Ahmad in GlobeScope, Hindi, History
July 29, 2017

अपनी ज़ुल्म और बहादुरी की कहानियों के लिए मशहूर चंगेज़ खान तारीख के पन्नों में दर्ज एक ऐसा नाम है जिसकी कब्र की शिनाख्त आज तक नहीं हो पाई है।

मंगोल शासक चंगेज़ ने अपनी तलवार के दम पर दुनिया के जितने बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा किया, इतिहास में ऐसी दूसरी कोई नज़ीर मौजूद नहीं है। दुनिया भर में अब तक जितने भी शासक हुए हैं उनकी ख्वाहिश रहती थी कि मरने के बाद भी मक़बरों की शक्ल में उनको याद रखा जाए। पर चंगेज़ खान ने अपने पीछे वसीयत छोड़ी थी कि उसके मरने के बाद सुबूत के तौर पर उसका कोई निशान बाक़ी ना रखा जाए। इसलिए चंगेज़ खान के मरने के बाद उसे किसी गुमनाम जगह पर दफनाकर उसकी क़ब्र पर क़रीब एक हज़ार घोड़े दौड़ाकर ज़मीन को बिल्कुल समतल कर दिया गया था, ताकि उसकी कब्र का कोई निशान बाकी ना रह जाए।

नेशनल जियोग्राफ़िक ने ‘वैली ऑफ़ ख़ान प्रोजेक्ट’ के नाम से सैटेलाइट के ज़रिये चंगेज़ ख़ान की क़ब्र तलाशने की बहुत कोशिश की, पर इसमें भी नाकामी ही हाथ लगी थी। आज भी चीन के दूर-दराज़ के सरहदी इलाक़ों में मंगोल अल्पसंख्यक के तौर पर रहते हैं। 800 साल पहले चंगेज़ ख़ान यहां के चारागाहों में अपने घोड़े दौड़ाता था जिसकी पीठ पर बैठकर चंगेज़ खान ने छोटे-छोटे कबीलों में बंटे मंगोलों को एकजुट कर दुनिया की सबसे ताक़तवर सल्तनत क़ायम की थी।

अपने बुज़ुर्गों की परंपराओं को सहेजकर रखने वाले मंगोलियाई आज अपने आपको चंगेज़ का वंशज मानते हैं और वो अपने घरों में चंगेज़ खान की तस्वीर ज़रूर रखते हैं। अब चूंकि रकबे (क्षेत्रफल) के हिसाब से मंगोलिया इतना बड़ा है कि उसमें ब्रिटेन जैसे सात देश समा जाएं और चंगेज़ खान की तस्वीर या तो कदीमी सिक्कों पर खुदी है या फिर वोडका की बोतलों पर। अब ऐसे में एक इंसान की क़ब्र तलाशना ठीक वैसे ही है जैसे समंदर में एक सिक्का तलाश करना!

90 के दशक में भी जापान और मंगोलिया ने मिलकर एक साझा प्रोजेक्ट ‘गुरवान गोल’ के तहत चंगेज़ खान की क़ब्र तलाशने की कोशिश की थी। इसके तहत चंगेज़ खान की पैदाइश की जगह माने जाने वाले खेनती में रिसर्च शुरू हुआ था, पर आख़िरकार इसमें भी नाकामी ही हाथ लगी थी।

अब मंगोलिया की उलानबटोर यूनिवर्सिटी के डॉ. दीमाजाव एर्देनबटार 2001 से जिंगनू राजाओं की क़ब्रगाहों की खुदाई कर उनके बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जिंगनू राजा मंगोलों के ही पूर्वज थे। खुद चंगेज़ खान ने भी इस बात का ज़िक्र किया था। लिहाज़ा इन राजाओं की क़ब्रगाहों से ही अंदाज़ा लगाने की कोशिश की जा रही है कि चंगेज़ खान का मक़बरा भी उनके मक़बरों जैसा ही होगा!

ये भी एक तथ्य है कि जिंगनू राजाओं की कब्रें ज़मीन से क़रीब 20 मीटर गहराई पर एक बड़े कमरेनुमा मकबरे में होती हैं, जिसमें बहुत सी कीमती चीज़ें भी रखी गई हैं। इनमें चीनी रथ, क़ीमती धातुएं, रोम से लाई गई कांच की बहुत-सी चीजें शामिल हैं। माना जाता है कि चंगेज़ ख़ान की कब्र भी ऐसी ही कीमती चीज़ों से लबरेज़ होगी जो उसने अपने शासनकाल में जमा की होंगी।

मंगोलिया में प्रचलित क़िस्सों के हिसाब से चंगेज़ खान को ‘खेनती’ पहाड़ियों में ‘बुर्खान खालदुन’ नाम की चोटी पर दफनाया गया था! स्थानीय किस्सों के मुताबिक अपने दुश्मनों से बचने के लिए चंगेज़ खान यहां छुपा होगा और मरने के बाद उसे वहीं दफनाया गया होगा! हालांकि कई जानकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं।

दरअसल इन पहाड़ियों पर शाही खानदान के सिवाय किसी और को जाने की इजाज़त नहीं है। इस इलाके को मंगोलियाई सरकार की तरफ से संरक्षित रखा गया है। यूनेस्को ने भी इसे विश्व विरासत का दर्जा दिया है। लेकिन कोई भी रिसर्च आज तक ये नहीं बता पाई है कि वाकई में यहीं चंगेज़ खान की क़ब्र है।

मंगोलिया के चंगेज़ खान और तैमूर खान में यही फर्क था कि जहां चंगेज़ खान पूरी दुनिया को एक ही साम्राज्य से बांधना चाहता था, वहीं तैमूर सिर्फ लोगों पर धौंस जमाना चाहता था। चंगेज़ के कानून में सिपाहियों को खुली लूट-पाट की मनाही थी, लेकिन तैमूर के लिए लूट और क़त्ल-ए-आम मामूली बातें थीं।

चंगेज़ खान दुनिया के लिए एक ज़ालिम योद्धा था जो तलवार के बल पर पूरी दुनिया को फ़तह करना चाहता था। लेकिन मंगोलियाई लोगों के लिए वो उनका आदर्श था जिसने मंगोलिया को पूर्वी और पश्चिमी मुल्कों से जोड़ा, सिल्क रोड को पनपने का मौका दिया।

ये चंगेज़ खान ही था जिसने मंगोलिया के लोगों को मज़हबी आज़ादी का एहसास कराया। चंगेज़ ख़ान के शासन काल में मंगोलियाई लोगों ने कागज़ की करेंसी की शुरूआत की, डाक सेवा की शुरूआत की। इस तरह चंगेज़ ख़ान ने मंगोलिया को असभ्य से सभ्य समाज में ढाल दिया था।

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