इन 14 पॉइंट्स में जानिए क्या हैं आपके वोटिंग राइट्स

हमारी उम्र का 18वां साल ज़िंदगी का एक बेहद अहम पड़ाव होता है। 18 साल के होते ही हमें वे सभी अधिकार मिलते हैं, जो देश के किसी भी बालिग नागरिक यानि कि एडल्ट सिटीज़न को प्राप्त हैं।

इन अधिकारों के साथ हमारे ऊपर वोट करने की एक अहम ज़िम्मेदारी भी आती है, ताकि हम अपने नेता को चुने और देश को बेहतर बनाने की दिशा में अपनी भूमिका निभा सकें और यह प्रक्रिया बिलकुल भी मुश्किल नहीं है। आइए आसान शब्दों में वोटिंग की प्रक्रिया को समझते हैं-

1. हम वोट क्यों दें?

“इस देश का कुछ नहीं हो सकता, यहां कुछ नहीं बदलेगा” क्या आपकी भी यही शिकायत है? अगर हां, तो वोट करिए और साथ ही बदलाव की शुरुआत भी।

हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और कोई भी लोकतंत्र उसके लोगों की शक्ति से चलता है। आपकी व्यस्त ज़िंदगी से एक घंटा निकालकर वोट करना देश की मौजूदा स्थिति को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आपका वोट तय करता है कि आप देश के सक्रिय नागरिक हैं और बदलाव लाने में अपनी भूमिका को भी समझा है।

आपका क्षेत्र, ज़िला, शहर और आपका देश कैसे प्रशासित होगा और आपके क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दे कैसे सुलझाए जाएंगे, इसमें आपके वोट की भूमिका अहम है। आपके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को उसके काम को लेकर ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है, ये आपके वोट करने की निर्णायक शक्ति का ही नतीजा है।

सबसे ज़्यादा ज़रूरी यह कि आपका वोट आपकी आवाज़ है, आपकी आवाज़ जो सबसे अलग है, जिसे सुना जाना और माना जाना ज़रूरी है। हो सकता है यह आपको बहुत महत्वपूर्ण ना लगे लेकिन निसंदेह यह आपके द्वारा लिए जा सकने वाले सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक हो सकता है। एक ऐसा फैसला जो इस देश और इस देश के लोगों की तकदीर बदल सकता है।

2. कब किया जा सकता है वोट?

इसके लिए पहला कदम है एक वोटर के रूप में अपना नाम दर्ज करवाना। वोटर्स लिस्ट या मतदाता सूची तैयार किए जाने के साल, 1 जनवरी को उम्र 18 साल या उससे ज़्यादा होने पर वोटिंग के लिए नाम दर्ज करवाया जा सकता है।

वोटर्स लिस्ट या मतदाता सूची उन सभी लोगों के नाम की ऐसी लिस्ट होती है जो वोट करने के लिए पंजीकरण (रजिस्टर) करवाते हैं। यह लिस्ट मतदान केन्द्रों के हिसाब से तैयार की जाती है, जहां से कोई (योग्य) व्यक्ति अपना वोट डाल सकता है।

3. वोट कहां डालें?

आमतौर पर इलेक्शन कमीशन या चुनाव आयोग किसी व्यक्ति का पंजीकरण वहां से करता है, जहां के वे निवासी हैं। किसी दूसरी जगह शिफ्ट होने पर चुनाव आयोग को सूचित किया जाना ज़रूरी है। भारत में एक जगह से ही वोट डाला जा सकता है।

4. क्या बिना वोटर आईडी कार्ड या मतदाता पहचान पत्र के वोट डाला सकता है?

हर पंजीकृत मतदाता या वोटर को चुनाव आयोग एक पहचान पत्र जारी करता है, जिसे वोटर आई.डी. कार्ड या मतदाता पहचान पत्र कहा जाता है। लेकिन इसके बिना भी पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, स्टूडेंट आई.डी. कार्ड या पासपोर्ट का इस्तेमाल करके वोट डाला जा सकता है।

युवा महिलाऐं वोट देने के बाद

5. वोटिंग के लिए रजिस्टर कैसे करें?

वोटिंग के लिए रजिस्टर करने के लिए आपको इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को फॉर्म 6 देना होगा, जिसके ये तरीके हैं-

  • ऑनलाइन रजिस्टर करने के लिए www.eic.nic.in पर जाएं या आपके राज्य के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर की वेबसाइट पर जाएं।
  • फॉर्म 6 डाउनलोड करें और इसे भरकर डाक से भेज दें।
  • फॉर्म 6 को भरकर खुद ही इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के दफ्तर में इसे जमा करवाया जा सकता है।

6. अगर वोटर्स लिस्ट में आपका नाम नहीं है तो क्या हैं आपके अधिकार?

केवल आई.डी. या पहचान पत्र होना ही वोट करने के लिए काफी नहीं है। अगर वोटर्स लिस्ट या मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है तो वोट नहीं किया जा सकता है।

नीचे लिखी वजहों से वोट करने के लिए अयोग्य साबित किया जा सकता है-

  • अगर आप किसी अन्य देश की नागरिकता ले लें।
  • अगर किसी अदालत द्वारा आपको मानसिक रूप से अस्वस्थ करार दे दिया जाए।
  • अगर आप वोटिंग की प्रक्रिया में गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते पाए जाते हैं।
  • यदि आप किसी अन्य व्यक्ति की पहचान पर वोट करते पाए जाते हैं।

आपके क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर से पता किया जा सकता है कि वोटर्स लिस्ट में आपका नाम है या नहीं। बड़े शहरों में यह जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध होती है।

7. वोटिंग से जुड़े मुद्दों पर किससे करें शिकायत?

  • चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (राज्य स्तर पर)
  • डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (जिला स्तर पर)
  • रिटर्निंग ऑफिसर (निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर)
  • असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ताल्लुका या तहसील स्तर पर)
  • प्रेसिडिंग ऑफिसर (पोलिंग स्टेशन स्तर पर)
वोट देने के बाद अपना वोटर आई.डी. कार्ड दिखाती दो महिलाएं; फोटो आभार: Ajay Aggarwal/ Hindustan Times via Getty Images

8. क्या आपको वोट ना करने का भी अधिकार है?

अगर किसी कारण से आप वोट नहीं करना चाहें तो यह भी आपका अधिकार है। इसके लिए आपके मतदान केंद्र या पोलिंग बूथ में जाएं और इस बाबत वहां मौजूद अधिकारी को सूचित करें। इस स्थिति में आपके नाखून पर स्याही तो लगाई जाएगी लेकिन आपको किसी भी उम्मीदवार को वोट देने को नहीं कहा जाएगा।

9. क्या यह संभव है कि आप किसी को भी ना चुने और वोट भी दें?

बैलट पेपर या मत पत्र पर नोटा (NOTA: Not Of The Above) का विकल्प चुनकर ऐसा किया जा सकता है और बिना किसी को चुने वोट डाला सकता है।

10. अगर आपके नाम से कोई और वोट डाल दे तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में भी आपको वोट डालने का पूरा अधिकार है। इसके लिए टेंडर्ड बैलट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। पोलिंग बूथ पर मौजूद अधिकारी द्वारा इसे अलग से रखा जाता है लेकिन इस वोट की गिनती तब तक नहीं होती जब तक कि विजेता उम्मीदवार और उसके विरोधी के बीच का अंतर बेहद कम ना हो।

11. क्या आपका वोट आपकी इच्छा से किसी दूसरे के ज़रिए दिया जा सकता है?

इलेक्शन ड्यूटी पर रहने वाले लोग, सेना और सशस्त्र बालों में काम कर रहे लोग और सुधारग्रहों में रह रहे लोगों को डाक से अपना वोट भेजने का अधिकार है। सेना व पुलिस के जवान और सरकारी कर्मचारी जो विदेश में तैनात हों, किसी अन्य व्यक्ति को उनका वोट डालने के लिए चुन सकते हैं।

12. क्या वोट डालने के लिए 1 से ज़्यादा जगह से पंजीकरण कराया जा सकता है?

नहीं, एक व्यक्ति द्वारा वोट डालने के लिए एक ही जगह से पंजीकरण करवाया जा सकता है, एक से ज़्यादा जगहों से पंजीकरण करवाना गैरकानूनी है।

13. एक वोटर के रूप में, उम्मीदवार की क्या जानकारियां आपको उपलब्ध हो सकती हैं?

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, आपको उम्मीदवार की इस जानकारियों को जानने का अधिकार है:

  • उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड, अगर हो तो।
  • उम्मीदवार और उसके परिवार की संपत्ति का ब्यौरा।
  • उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता।
  • उम्मीदवार का नामांकन पत्र और सम्बंधित कागज़ात।
  • उम्मीदवार पर सरकार की कोई बकाया रकम, अगर हो तो।

14. आपको ये अधिकार नहीं हैं:

  • किसी उम्मीदवार को वोट देने या ना देने के बदले पैसे लेना या किसी तरह का कोई लाभ लेना।
  • किसी अन्य वोटर को धर्म, जाति या सम्प्रदाय के आधार पर वोट करने के लिए प्रेरित करना।
  • किसी विशेष उम्मीदवार को वोट ना करने पर अन्य मतदाताओं का सामाजिक बहिष्कार करना या इसकी धमकी देना।
फोटो आभार: Gagan Nayar/ Hindustan Times via Getty Images

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