सुनो बाज़ार, मैं पतली हूं और मैं भी दुनिया में एग्ज़िस्ट करती हूं

Posted by Matsi Sharan in Body Image, Hindi
July 31, 2017

एडिटर्स नोट: अगर आपके शरीर की बनावट, समाज की परिभाषा के हिसाब से ‘बहुत मोटे’ या ‘बहुत पतले’ के खाके में बैठती है तो सही साइज़ के कपड़े तलाशने में आपको खासी मेहनत करनी पड़ सकती है। खासतौर पर जब आप एक महिला हों। यह लेख इसी मुद्दे पर Youth Ki Awaaz द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन #MoreThanOneSize के तहत पब्लिश किया जा रहा है। अगर आपने भी इन दिक्कतों का सामना किया है तो लिखिए और शेयर कीजिए आपके अनुभव।

अपनी सुविधा के हिसाब से खुद ही हमारी बनावट का एक पैमाना तय कर लिया है और बस उसी पैमाने के हिसाब से कपड़े बनाकर बाज़ार मे बेचे जा रहे हैं। उसका खामियाजा हम जैसे लोगों (जो बहुत पतले, बहुत मोटे या कम कद के हैं) को उठाना पड़ रहा है। कारण ये कि हम उनके बनाए पैमाने पर खरे नहीं उतरते।

अगर हम बड़े या छोटे साइज़ ले भी लें तो उनकी फिटिंग करवाने की झंझट अलग। इतना सब करने के बाद कई बार ड्रेस की सारी खूबसूरती भी चली जाती है। हमें भी तो मन होता है बाज़ार के नए-नए फैशन को फॉलो करने का, नए ट्रेंड्स के कपड़े पहनने का। पर हमें ये सौभाग्य कहां! हमें तो इस तरह अनदेखा किया जाता है जैसे हम अदृश्य प्राणी हैं।

कितनी बार तो सच में मुझे किड्स सेक्शन से कपड़े खरीदने पड़े। ये मेरे लिए कभी भी आसान नहीं रहा। पहले तो ये सोचकर ही शर्म आती थी कि किसी ने देख लिया तो क्या होगा! आखिर दुकान वाले को कैसे बोलूं कि मुझे अपने लिए ड्रेस चाहिए? ऐसा बोलने पर उसका वो अजीब सी नज़रो से मुझे देखना, अगर कोई ड्रेस पसंद आ भी गई तो मन मे ऐसे सवाल उठते हैं कि अगर मैं इसे पहनूंगी तो बच्ची लगूंगी! लोग हंसेंगे मुझ पर।

सच कहूं तो अब मुझे इन बातों से फर्क पड़ना भी खत्म हो गया है। अब अगर मुझे कोई कुछ बोलता भी है तो या तो मैं उसे हंसकर मज़ाक में उड़ा देती हूं या फिर अनसुना कर देती हूं। पर ये मेरी अकेले की कहानी नहीं है, पता नहीं कितनी ही लड़कियों को रोज़ इन सब का सामना करना पड़ता है | आखिर कब तक हमें इस तरह अनदेखा किया जाएगा? कब तक हमें इस बाज़ारवाद का शिकार होना पड़ेगा? जबकि बाज़ार में हम जैसी महिलाओं या लड़कियों की गिनती बहुत ज़्यादा है।

यूथ की आवाज़ का #MoreThanOneSize कैंपेन काफी प्रभावित करने वाला है। इस कैंपेन ने मुझे मौका दिया कि मैं अपनी बात रख सकूं। मैं उन तमाम लड़कियों से ये गुज़ारिश करती हूं जिन्हें इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ता है कि वो भी अपनी बात रखें और इसके खिलाफ आवाज़ उठाएं।

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