रोटी गोल नहीं बनी तो गर्भवती पत्नी को जान से मार दिया

“मम्मी की रोटी गोल -गोल
पापा का पैसा गोल -गोल
हम भी गोल, तुम भी गोल
सारी दुनिया गोलम गोल”

बचपन में गाया करती थी लेकिन आज इसे लिखते समय मन भावुक हो गया है। क्योंकि इन्हीं चार पंक्तियों में सिमरन की कहानी है। चार साल की एक बच्ची की मम्मी(सिमरन) की रोटी गोल नहीं थी! दरअसल, दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में बीते शनिवार को एक शख्स ने अपनी चार महीने की गर्भवती पत्नी को रोटी गोल ना होने की वजह से पेट पर लात से मारकर जान से मार डाला। चार साल की बच्ची ने मां-बाप की रोटी के शेप को लेकर हुए झगड़े की कहानी सुनाई है।

वह शख्स अभी फ़रार है। इतना सुनते ही रूह कांप उठता है। कुछ देर तक आप कुछ भी बोलने और कहने स्थिति में नहीं होते। ऐसा लगता है जैसे चेतना शून्य में चली गई है।

कई बार लोगों को कहते सुना है कि मेरी बेटी या मेरी बहू या मेरी बीवी या मैं गोल रोटी नहीं बना पाती/पाता। रोटी नहीं भारत का नक्शा बन जाता है! “एक आंटी कहती थी, मुझे तो शादी से पहले रोटी बनाना नहीं आता था लेकिन सास ने हाथ पकड़ कर सिखाया है।” ये सारी बातें अक्सर सुनने को मिलती है।

मतलब रोटी की ज़रूरत जितनी पेट भरने के लिए ज़रूरी है, उतनी ही ये औरत के जीवन से भी जुड़ा हुआ है।  हालांकि पुरूषों के संदर्भ में ऐसी बात नहीं सुनने को मिलती है। लेकिन रोटी को लेकर अब जैसी बात सुनी है वो इससे पहले कभी नहीं सुना था।

ऐसी जानकारी है कि दोनों ने प्रेम विवाह किया था और शादी से पहले लिव इन रिलेशन में थे। यह शख्स अपने व्यवसाय में असफल था। हमारे समाज में ऐसे कई परिवार हैं जहां पुरूषवादी मानसिकता के ग्रसित मनोरोगी अपनी असफलता का कुंठा पत्नी और बच्चों पर घरेलू हिंसा करके निकालते हैं।

इस भयावह घटना के बाद कुछ बातों पर गौर करना ज़रूरी है। यह घटना राजधानी दिल्ली की है जिसे व्यवसाय में असफल इंसान ने अंजाम दिया है। व्यवसाय में असफलता और मेट्रो शहर की जद्दोजहद से लड़ने के लिए परिवार की ही ज़रूरत होती है, वहीं से लड़ने की ताकत मिलती है जिस वक्त हम परिवार की उपेक्षा करना शुरू करते हैं वहीं से अपने अंदर हैवानियत को जन्म देना शुरू करते हैं!

और आखिरी में सबसे महत्वपूर्ण बात हम किसे अपना हमसफर बनाने जा रहे हैं यह फैसला समझदारी पर आधारित हो न कि एक बहाव में आकर फैसला ले लिया जाए। इसे एक प्रेम विवाह लिखने में भी घिन आ रही है!

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