आओ पाप के भागी बने

Posted by Rahul Shukla
August 26, 2017

Self-Published

क्या रखा है इस सत्य अहिंसा की दुनिया में

सिर्फ थोड़ा सा सुख और थोड़ी शांति ही तो है

मज़ा नहीं आता अब इसमें।

आओ किसी को लड़ाते हैं

आओ किसी से लड़ते हैं

तब ही तो थोड़ा रोमांच होगा जीवन में।

आओ गुरुओं को मिटायें

बाबाओं को जीतायें

तब ही तो थोड़ी भक्ति होगी साधना में।

आओ कहीं आग लगाएं

आओ किसी की जान लें

तब ही तो थोड़ा रस होगा जीवन में।

क्या फ़र्क पड़ता है किसी की पीड़ा से

जी को बेहलायें दुष-क्रीड़ा से

आनंद पाएं किसी की तड़पन में।

कुछ भी अच्छा नहीं अब क्रिया योग में

असली सुख तो है बस भ्रष्ट भोग में

आओ मिल कर भ्रष्टाचार बढ़ायें।

मैं अकेला नहीं संसार मेरा साथ दे रहा है

अच्छाई को मिटा बुराई को संरक्षण दे रहा है

जो कुछ भले मानुष बचे हैं उनको मिटायें।

आओ किसी स्त्री की लज्जा को रौंदें

शिशु जो हुई कन्या तो उसका गला घोंटें

आओ जननी को ही संसार से ख़त्म करें।

आओ पाप के भागी बनें।

देखो कहीं तुम पीछे मत हटना

अगर ये गलत लगे तो भी मत रुकना

अगर तुम रुक गए बदल गए

तो संसार फिर अच्छा और सच्चा हो जाएगा

भर लो तेज़ाब अपने कानों में

फोड़ लो अच्छा देखने वाली आँखों को

सचाई और अच्छाई के तो देखना भी मत सपने

आओ हम सब मिलकर पाप के भागी बने।

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