आखिर कब तक बंद रहेगी पाकिस्तान से बातचीत?

Posted by Rajiv Nayan Chaturvedi
August 10, 2017

Self-Published

आज हिंदुस्तान और पाकिस्तान के आवाम के दिल मे ये बात जरूर हिलोरे मारते होंगे कि दोनों देशों के बीच ये आपसी तनातनी कब तक चलेगा? हिंदुस्तान और पाकिस्तान में ज़रा सी तनाव में आपसी बातचीत बंद करना एक आम बात हो गई है। ये कभी परिस्तिथि से विवश होकर ऐसा होता है,या फिर राजनीतिक लाभ उठाने के लिए जनता के दबाव में आकर होता है,ज़ाहिर सी बात है ऐसी कूटनीति से दोनों देशों को नुकसान होता है  और ये निहायत ही चिंतनीय विषय है।

कोई भी रिश्ते में घुले कड़वाहट को खत्म करने के लिए बातचीत बहूत ज़रूरी होता है,आपसी बातचीत से ही किसी वाद विवाद का हल निकलता है। कई लोग ये कह सकते है भारत ने पाकिस्तान से कई दफा बातचीत करने की कोशिश किया है,लेकिन पाकिस्तान हमेशा हमारे अंदर खंजर घोपा है। ये तर्क अपने आप मे सही भी है,लेकिन इसका भी किसी के पास उत्तर नही हम पाकिस्तान से बातचीत ना करे तो आख़िर क्या करे? ना बातचीत करने से क्या फायदा मिलेगा? अपने समस्या में त्रिपक्षीय बातचीत करेंगे नही,द्विपक्षीय बातचीत से मामले का निपटारा करेंगे,लेकिन ये कैसे मुमकिन है जब बातचीत ही ना हो?
कई लोग ये तर्क दे सकते है कि पाकिस्तान जैसा हमारे साथ वर्ताव कर रहा है,वैसा ही वर्ताव हम उसके साथ करे। वो एक गोल दागता है तो हम चार गोला दागेगे। लेकिन ऐसा करने से क्या होगा? शायद ये लोग भूल जाते है कि ऐसा करने से सिर्फ तनाव बढ़ेगा। कोई भी सभ्य समाज मे युद्ध कोई समाधान नही होता है। युद्ध सिर्फ उन्माद फैलाते है,और ये समस्या हल नही करते है बल्कि बढ़ाते है।
दरअसल ये जो पाकिस्तान से ना बातचीत करने वाला जो आदत निर्वाह कर रहे है वो आजादी के समय से ही चला आ रहा है। जब भी दोनों देशों के बीच मे युद्ध हुआ है,तब दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुखों के बीच मे बातचीत बंद हो जाती है। 2001 में संसद पर हमले के बाद आपसी बातचीत के अभाव में ये मामला फिर से 1999 के इतिहास को दोहराने के कगार पर पहूच गया था। हमने अपने आजादी के सत्तर सालो में इतना तो ज़रूर सीखा और देखा है कि आपसी बातचीत बन्द करने से कोई विवाद हल नही होता है। कई दफा हम पाकिस्तान से बातचीत बंद कर चुके है,और इससे कुछ फायदा नही निकलने पर हमने बातचीत फिर शुरू कर दिया।
भारत को इतिहास से सीख लेकर पाकिस्तान से बातचीत ना करने में वक्त जाया नही करना चाहिए।
और इसी में दोनों देश की भलाई है।

एक ऐसे समय मे जब हम एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहे है,ऐसे समय मे हमारा रिश्ता पाकिस्तान और चीन से बेकार होता जा रहा है। इस समय हमें इनदोनो देश से दुश्मनी नही मोल लेना चाहिए। चीन भारत को युद्ध करने की धमकी दे रहा है,1962 के इतिहास का याद दिला रहा है,लेकिन फिर भी हम उससे बातचीत करते है,दोनों देशों के मुख्य सुरक्षा सलाहकार एक दूसरे से मिल रहे है,हमारे देश प्रमुख उनके राष्ट्रप्रमुख को जन्मदिवस की बधाई दे रहे है। सवाल ये है कि यही हाल हम पाकिस्तान के साथ क्यो नही कर सकते? बहूत कम देश कूटनीति के तौर बातचीत बन्द करने का रास्ता अपनाते है। आमतौर पर वही देश ऐसा करते है जहाँ लोकतंत्र नही होता है। आप कतर और सऊदी विवाद देख सकते है।
बात साफ है अगर आप पाकिस्तान से बातचीत नही करते तो आप उससे राजनायिक संबंध क्यो रखते है,क्यो उसे सबसे प्रिय देश का दर्जा दे रखे है,क्यो आप रोजाना आलू प्याज का आयात निर्यात करते है? अगर आपको संबंध नही रखना तो सभी संबंध खत्म कर दीजिए न? ये व्यापार करना और पसंदीदा राज्य का दर्जा देना कौन सी कूटनीति है??

ये ऊपर की बात आपको जोशीले जरूर लगे होंगे,लेकिन ये पूरी तरह निरर्थक है  अन्तः वही बात निकल कर सामने आती है कि बातचीत बन्द करना कही का समझदारी नही है। जो कूटनीति कांग्रेस अपनाती थी,वही बीजेपी अपना रही है तो ऐसे दोनों में फर्क क्या है???.

जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति उत्तर कोरिया से बातचीत के हिमायती हो सकते है,ट्रंप पुतिन से मिल सकते है तो हम बातचीत बहाल क्यो नही कर सकते है?
आखिर हमारा तो खून का रिश्ता है।

राजीव नयन
लखनऊ यूनिवर्सिटी

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