आजादी और हमारी जिम्मेवारी

Posted by sanjay mehta
August 13, 2017

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मुल्क आजाद हुआ. जश्न मनाया गया. वक्त के साथ – साथ तमाम उतार चढ़ाव के बाद आज हम सत्तर साल को पार कर गए. आजादी सिर्फ  जश्न के लिए नहीं है. संघर्षों से मिली इस आजादी को हम सिर्फ जश्न मना कर नहीं भूल सकते. ऐसा हो रहा है. हम बहुत कुछ भूल रहे हैं. 1857 की क्रांति हो या अंग्रेजों के साथ संघर्ष , हमे इतिहास को जेहन में रखकर भविष्य के प्रति सजग रहना होगा. सीखना होगा , अमल करना होगा.
गुलामी के वक्त हम मजबूर थे. स्थितियां अनुकंल नहीं थी. देश बहुत कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं था. अब हमारे पास सामर्थ्य है. संसाधन है. शहादत के बदौलत मिली आजादी में यह याद रखने की जरूरत है कि हम अपने महापुरुषों के सपनों को साकार करने की ओर अग्रसर हैं या नहीं ?
मुल्क के वर्तमान हालात में हमारे बीच कई सवाल हैं. कई समस्याएं हैं. रोटी , कपड़ा , मकान , शिक्षा , स्वास्थ्य की सुविधाओं के बारे में आज भी हम बात ही कर रहे हैं.  आज तक न हम अपने महापुरूषों का सपना पूरा कर पाए ,  न सही शिक्षा दे पाए , न युवा को रोजगार दे पाए , न सामाजवाद की अवधारणा पूर्ण हुई , न आर्थिक समानता आयी , न ही लिंग भेद खत्म हुआ , न ही जाति प्रथा समाप्त हुई , अमीर – गरीब का भेद और गहरा हुआ , विधायिका , कार्यपालिका , न्यायपालिका की पारदर्शिता गुम हो गयी. नीति – नियंता देश को कुतरने में लगे रहे और न ही हमारी सरकारें लोक कल्याणकारी साबित हो सकी. राजनीति नेताओं के सम्पति अर्जन का व्यवसाय हो गया.
कई गंभीर सवाल हैं. नकारात्मक पहलुओं पर विचार करने से निराषा ही मिलेगी. हमें सकारात्मक सोचना होगा. फिलहाल मुल्क में सवालों, समस्याओं की फेहरिस्त लंबी है. हो सकता है कुछ के जवाब संतोषजनक हों लेकिन यह कड़वा सच है कि हालात चिंताजनक हैं.
सात दशक में एक पीढ़ी बदल जाती है लेकिन देष अपेक्षानुरूप नहीं बदल पाया. अब कुछ बड़ा और ठोस करने का वक्त आ गया है. अब मुल्क के हर नागरिक को जिम्मेवारी लेनी होगी. सबको राष्ट्र निर्माण में लगना होगा.
हमारे देश में क्षमता है. हम कर सकते हैं. प्रत्येक राज्य की सरकारों , केंद्र सरकार , नेता , पदाधिकारी सबको एक विचार ,एक सोच के साथ काम करना होगा. योजनाएं कई बनी , कई खत्म हो गयी.  परिणाम सबके सामने है. लेकिन निराशा और विफलता हमें हतोत्साहित ही करेगी। हमें उसे दरकिनार कर नया विचार करना होगा.
अपनी भुमिका को समझना होगा. हमें यह नहीं सोचना होगा कि सभी जिम्मेवारी सरकार की है. सब कुछ सिर्फ सरकार को ही करना है और हमें कुछ नहीं करना है! हम सबको अपनी – अपनी जिम्मेवारी समझनी होगी.  हर नागरिक को लोकतांत्रिक बनना होगा. हमे परिवर्तन लाने के लिए खुद में परिवर्तन करना होगा. यह देश तभी सही मायने में आजाद होगा.  यह देश अब बड़ी वैचारिक क्रांति मांग रहा है यह तभी संभव है जब हम आजादी के संदर्भ में अपनी जिम्मेवारी को समझेगें.
जय हिंद.

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