आजादी का कत्लेआम (भाग 9)

Self-Published

सर सायरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में पंजाब बाउंडरी कमिशन ने अपना काम शुरू कर दिया था, और तारीख 21 जुलाई से 30 जुलाई तक, मुस्लिम लीग, कांग्रेस और अकाली दल के नुमाइंदे भी इस कमीशन के सामने अपनी गुहार लगा रहे थे, खेर जिस लकीर को सार्वजनिक किया गया और इस जमीनी लकीर के माध्यम से, एक देश भारत में से दो अलग अलग देश पाकिस्तान और हिंदुस्तान का निर्माण हो रहा था, लेकिन जिस तरह ये लकीर को खीचा गया वह अपने आप में कई विवादों को जन्म दे रही थी. सिंध और बलूचिस्तान को पूरा का पूरा पाकिस्तान में दे दिया गया और बंगाल और पंजाब का विभाजन किया गया. लेकिन पंजाब का विभाजन ही अखबारों की सुर्खियां बना.

मसलन, पंजाब के कुल जमीनी हिस्से में से 63000 स्क्वायर माइल्स पाकिस्तान को बतोर वेस्ट पंजाब के रूप में दिया गया और 37000 स्क्वायर माइल्स को हिंदुस्तान में ईस्ट पंजाब के रूप में, यँहा हिंदुस्तान और पाकिस्तान की लकीर वास्तव में पंजाब को बाट रही थी, जंहा वेस्ट पंजाब की कुल 2 करोड़ की आबादी में से 1 करोड़ 60 लाख मुस्लिम थे वही 40 लाख गैर मुस्लिम मसलन हिंदू और सिख वही ईस्ट पंजाब में कुल 1 करोड़ 60 लाख की आबादी में से 1 करोड़ 20 लाख गैर मुस्लिम थे मसलन हिंदू और सिख, वही 44 लाख के करीब मुस्लिम आबादी थी, एक अनुमान के मुताबिक कुल 55-60 लाख सिख आबादी में से 40% तकरीबन 22 लाख की आबादी, वेस्ट पंजाब में थी वही बाकी की आबादी 33 लाख ईस्ट पंजाब में. लाहौर को पाकिस्तान में देने से तकरीबन आधी आधी सिख आबादी पंजाब के दोनों तरफ बट गयी थी.

जँहा पहले ये कहा गया था कि विभाजन की बुनियाद 1941 के जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर होगी, लेकिन वास्तव में क्षेत्रीय विषय ओर जॉइंट विषय से ज्यादा, ये विभाजन other फैक्टर पर ज्यादा निर्भर रहा, उदाहरण के तौर पर दरिया व्यास और सतलुज, के आस पास मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक थी लेकिन रेलवे, यातायात, खेती, सिचाई, नहरी व्यवस्था को देखते हुये ये इलाका हिंदुस्तान के ईस्ट पंजाब को दिया वही रवि दरिया को पाकिस्तान के वेस्ट पंजाब में शामिल कर लिया गया, इसी तर्ज पर पंजाब के दो बड़े शहर लाहौर और अमृतसर को बाटा गया, अमृतसर में गैर मुस्लिम मामूली अनुपात से मुस्लिम आबादी से ज्यादा थे वही लाहौर की अमूमन हर तहशील में मुस्लिम आबादी बहुताय थी लेकिन लाहौर की कसूर तहशील को ईस्ट पंजाब में दिया गया वही अमृतसर की अजनाला तहसील में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यंक थी जिसे अमृतसर के साथ हिंदुस्तान के ईस्ट पंजाब में शामिल कर दिया गया.

इसी तर्ज, पर गुरदासपुर को एक तरह से पूरा जिला, भारत के ईस्ट पंजाब में रखा गया जबकी इसकी हर तहसील में मुस्लिम आबादी एक तरह से गैर मुस्लिम आबादी के बराबर थी,  वही इसकी एक तहसील शकरगढ़ को पाकिस्तान के वेस्ट पंजाब में रखा गया, जानकारों का मानना था कि इस तरह गुरदासपुर को बाटने से, हिंदुस्तान को कश्मीर के साथ सड़क और रेलमार्ग से जोड़ा दिया था.

ऐसे कई और विवादों से सर सायरिल रेडक्लिफ द्वारा खिंची गयी विभाजन की जमीनी लकीर घिरी रही, अब ये तय हुआ की तारीख 14-अगस्त-1947 के दिन पाकिस्तान को आजाद करने की घोषणा की जायेगी और यही दिन पाकिस्तान का आजादी दिवस मनाया जायेगा और उसके अगले दिन 15-अगस्त-1947 को हिंदुस्तान को आजाद किया जायेगा, और यही हिंदुस्तान का आजदी दिवस मनाया जायेगा. कांग्रेस और गांधी के कहने पर, Mountbatten अगले एक साल के लिये भारत के गवर्नर जनरल बन गये, ऐसा भी कहा जाता है कि Mountbatten इसी समय दौरान पाकिस्तान के गवर्नर जनरल बनना चाहते थे लेकिन जिन्हा इसके लिये राजी नही थे, वही आजाद पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल खुद जिन्हा बने. इसी बीच, रेडक्लिफ अपना काम कर, भारत और पाकिस्तान की आजादी के पहले इंग्लैंड चले गये थे और वापस कभी नही आये.

लेकिन रेडक्लिफ ने अपने कई  साक्षात्कार में कहा था की उन्होंने अपने निर्धारित वक़्त में काफी अच्छा काम किया है अगर उन्हे इसके लिये 1 या 2 साल मिलते तो इसमे वह काफी सुधार ला सकते थे. सीधे शब्दों में कहा जा सकता है की विभाजन की लकीर में कई तरह की कमियां थी जिसे रेडक्लिफ भी मानते थे, उन्होंने ये भी कहा था कि अक्सर जिन्हा, नेहरू और पटेल जब भी उनसे मिलते थे वह अक्सर इसी बात का जिक्र करते थे कि देश 15-अगस्त-1947 तक आजाद हो जाये, गांधी के साथ हुई अपनी मुलाकात के बारे में रेडक्लिफ कहते है कि गांधी ने उन्हे कहा था कि विभाजन के कारण बहुत ज्यादा हिंसा होगी. अगर इस तथ्य का गांधी जी को अंदाजा था तो नेहरू, पटेल, जिन्हा, यँहा तक Mountbatten और अंग्रेज सरकार की ख़ुफ़िया रिपोर्ट भी इस हिंसा को उजागर करती होगी, लेकिन समय रहते किसी ने भी इस हिंसा को रोकने के ना उपाय किये और ना ही प्रार्थना की.
( https://www.thequint.com/india/2017/07/07/partition-of-india-pakistan-cyril-radcliffe-line)

तारीख 14-अगस्त-1947 के दिन, पाकिस्तान आजाद हुआ और यँहा बतोर गवर्नर जनरल जिन्हा ने पाकिस्तान की आवाम को संबोधित किया वही इसके दूसरे दिन तारीख 15-अगस्त-1947 के दिन हिंदुस्तान आजाद हुआ, यँहा दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराया गया और इज्जत के साथ ब्रिटश ध्वज को इंग्लैंड भेज दिया गया, नेहरू ने अपना भाषण पढ़ा. इसी बीच लाहौर से ईस्ट पंजाब जो की अब भारत में था, उसकी व्यवस्था से जुड़े सभी दस्तावेज और दफ्तर भारत लाये जा रहे थे, लेकिन तारीख 16-अगस्त-1947 के दिन शाम 5 बजे हिंसा भड़क गयी, और दुनिया का सबसे बढ़ा कत्लेआम, नंगी तलवारो को हवा में लहराते हुये किया गया, दोनों तरफ बेतहासा खून बहा.

जानकारी का श्रोत- The Unfolding Crisis of Punjab 1947: Key Turning points and British responses

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