आवारा गायों के झुण्ड किसानों के लिये बन रहे बड़ी समस्या।।

Posted by Ankit Shukla
August 2, 2017

Self-Published

आज के इस दौर मैं जहाँ गौ रक्षा का दौर है गाय के नाम पर राजनीती है गाय के नाम पर बहुत कुछ हो रहा है वहीँ अन्नदाता इस गाय के आतंक से परेसान है कुछ कहने की स्थिति मैं नहीं है उनके लिये आवारा गायों के झुण्ड विकराल समस्या बन जाती है

 

बात करते हैं आगरा जिले मैं खेरागढ़ विधानसभा की इस विधानसभा मैं 3 ब्लॉक है सैंया खेरागढ़ और जगनेर वैसे तो ये सीट प्रत्येक चुनावों मैं काफी अहम मानी जाती है इस बार भी भाजपा से राजनाथ सिंह ने किसानों की बड़ी भीड़ को सम्भोदित किया था विधायक तो वैसे यहाँ पहले भी होते थे अब भी हैं जो भाजपा से हैं यहाँ की कोई भी वाजिव समस्या राजधानी तक नहीं पहुंचती है

 

समस्याओं का क्या वो तो बनी रहती हैं अब आते है किसान और गायों पर वैसे तो इस बार आगरा जिले मैं इंद्रदेव भी अपनी नज़रें चुराये हुये हैं यहाँ सूखे की स्थिति है इस वर्ष इस परिस्थिति मैं भी किसानों ने उम्मीद रखी और फसल की बुआई कर दी अब जब फसल थोड़ी सी बड़ी हुई है तो किसानों की नींद हराम हो गई है अन्नदाता समझ नहीं पा रहा वो क्या करे आवारा गायों के झुण्ड आते हैं और फसलों पर प्रहार करते हैं।

 

किसानों के लिये विवाद और हास्यप्रद स्थिति तब पैदा होती है जब कोई किसान अपनी जमीन से इन आवारा गाय बछड़ों के झुण्ड को भगाते हैं सामने जिस किसान की जमीन होती वो लड़ने को तैयार रहता है कई बार बहुत से किसानों का विवाद भी हो चूका है अब जब इस विवाद मैं किसान उलझे तो किसानों ने एक स्थाई निवारण निकाला किसानों ने कहा इन गायों को पकड़ कर नदी के इलाकों मैं जहाँ चारा पानी होता है वहाँ ले जाया जाये फसली इलाके से दूर लेकिन जब दिन 2 दिन मेहनत करके किसानों ने कुछ गायों को पकड़ कर एक गाड़ी मैं ले जाने का सोचा कुछ ही दुरी तय की होगी तब स्थिति और भयावह हो गई जब गौ रक्षकों ने गाड़ी चालक को मार मार कर अधमरा कर दिया

 

अब अन्नदाता किसको कहे ये अपनी समस्या ये आवारा गायों के झुण्ड किसी भी किसान की फसल चट कर जाने को काफी हैं किसान 24 घण्टे जाग कर फसलों की देखभाल करते हैं तब भी वो नहीं रोक पा रहे अपनी फसलों को बर्बाद होने से रोकने को फिर भी ये अन्नदाता की समस्या है अन्नदाता गौ माता को आँखों के सामने फसल को बर्बाद करते हुये देखता है ये किसी कॉर्पोरेट वर्ग की समस्या नहीं ये तो उस किसान की समस्या है जिसको बस सरकारी योजनाओं और कागजों तक रखा जाता है अन्नदाता है क्या बोलेगा बेचारा आखिर गाय है वो तो खायेंगी किसान का परिवार तो भूखा भी रह सकता हैं

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