इस हत्यारी मासुमियत के हम अभयस्त हो चुके हैं!

Posted by naveen rai
August 21, 2017

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गोरखपुर 11 अगस्त से पहले इस बात के लिए सुर्खियों में आया कि वहां से 5 बार सांसद चुनकर आए योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े सूबे के 21वां मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वहीं रोज़मर्रा की खबरें ही मीडिया में आ रही थी लेकिन 11 अगस्त को जो हुआ वह भयावह था। 60 बच्चे राजनीतिक भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गए। देखते ही देखते गोरखपुर मीडिया छवनी में बदल गया मीडिया का फाइव डब्ल्यू वन एच चलने लगा खैर मुद्दा यह नहीं है मुद्दा है सरकार की खामियां और उसके बाद लिपापोती के लिए की जाने वाली जिरहबाज़ी का। गोरखपुर में जापानी बुखार का मुद्दा कोई नया मुद्दा नहीं है। सन् 1978 में पहली बार  इस बीमारी के 1022 मामले सामने आए जिनमें से 292 लोगों की मौत हो गई।

साल 2005 इससे भी ज्यादा क्रूर साबित हुआ इस साल जापानी बुखार के 5737 मामले सामने आए और 1344 बच्चों की मौत हुई।राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण निदशालय के अनुसार 2010 से 2017 के बीच कुल 26668 मामले दर्ज किये गये। जिसमें लगभग 4100 मौतें हुई। अब जरा सोचिए कि इस बदस्तूरर चले आ रहे सिलसिले के दौरान हमारी आपकी नजर इन मौतों पर क्यों नहीं गई। पब्लिक तो सब जानती है! है ना! तो फिर पब्लिक क्या कर रही है। भ्रष्टाचारी और लाचारी भरे इस सरकारी तंत्र के सितम के हम अभ्यस्त हो चुके हैं। सरकारी तंत्र से कुचल कर लोगों का मारा जाना नया नहीं है। लोग मरते आए हैं मरते जा रहे है। सख्त कदम के नाम पर किसी अफसर का तबादला या निलंबन होता है और सांत्वना के नाम पर दो ढाई लाख का मुआवजा। फिर वहीं तंत्र पूराने ढ़र्रे पर चलने लगता है। ऑक्सीजन की कमी से कहीं मांओं की कोख सुनी हो जाती है कहीं गड्ढे में प्रिंस गिर जाता है। कुछ नहीं बदलता। बस सरकारें बदलती हैं और इस सब के बीच सरकारों की हत्यारी मासुमियत के हम अभ्यस्त होते जातें है। हादसों के कुछ ही दिनों बाद टीवी सर्वे में वहीं सरकार 350 से अधिक सीटें जीत रही होती है तो इस हत्यारी मासुमियत के हम पूरे परिपक्व अभ्यसती लगने लगते हैं। गला फाड़ कर वंदे मातरम और भारत माता की जय कहने लगते हैं।

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