एक सवाल ; कब होगा बिहार मे बाढ़ से स्थाई समाधान ????

Posted by Chandra Bhushan
August 20, 2017

Self-Published

अभी कुछ दिन पहले हम लोगो ने आज़ादी कीे 70वीं वर्षगाठ मनायी, माननीय प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सब ने ओजस्वी भाषण दिया पर सोचने वाली बात ये है कि आज़ादी के 70 साल बाद भी क्या  हम सच में आज़ाद हो पाए है । अंग्रेजो से तो हम आज़ाद हो गए है पर देश में जो आज़ादी के वक़्त बुनियादी परेशानियां थी , वो आज भी जस की तस है, वैसे ही जैसे बिहार में हर साल बाढ़ आती थी और अभी भी आती है, हर बिहारी के जीवन का एक बड़ा हिस्सा प्रलयकारी बाढ़ से जूझने में निकल जाता है, अब तो शायद हम सब की हिम्मत भी जवाब दे चुकी है क्योंकि हर बरस आती बाढ़ के सामने अब हम सब अपने हथियार डाल चुके है और इस बाढ़ को  अपने जीवन का हिस्सा मान चुके है । हर साल 1 से 2  महीने हम सब अपने घरों, गांवों में कैद हो जाते है और चारो तरफ तरफ जलमग्न रहता है।
बाढ़ से सड़के दिखाई देना बंद हो जाती है, बस रेल सेवा ठप हो जाती है , और बिहार के हज़ारों गांवं पूरे देश दुनिया से कट जाते है ।

हर साल की भांति इस साल भी हर बिहारी बाढ़ से कराह रहा है और हज़ारो गाओं में बाढ़ से पीड़ित लोग मदद की आस लगाए बैठे है ।  हर एक बिहारी चाहे बिहार में हो या बिहार के बाहर, बाढ़ के दर्द से व्यथित है । उससे जितना हो पा रहा है वो मदद और राहत कार्य करने में लगा है । कोई अनाज भेज रहा है , कोई दवाई, और जो चाह के भी कुछ कोई नही कर पा रहे है वो किसी संस्था / संग़ठन के माध्यम स राहत कार्य के लिएे पैसे दान दे रहे है , हर वर्ष की भांति सरकारे भी राहत कार्यो के पुख्ता इंतजामो का दावा कर रही हैै,  हर वर्ष की ही भांति विपक्षी पार्टियां भी उनके दावो की पोल खोलेने में लगी है पर अफ़सोस ऐसे विपदा के समय भी सब एक नहीं हो पा रहे,  आरोप प्रत्यारोप की राजनीति गर्म है । हमने तो बचपन से सुना था कि विपत्ति का सबको मिलके सामना करना चाहिए पर हमारी राजनितिक पार्टियों में तो ऐसा नही दिखता, या ये भी हो सकता है की ये सभी पार्टियां एक होना ही नहीं चाहती है। पर बड़ा सवाल ये भी नहीं है । बड़ा सवाल ये है कि आज़ादी के सत्तर सालो बाद भी हम इस बाढ़ का स्थाई समाधान क्यों नहीं निकाल पाये ?

हमें समझना होगा की क्यों हर वर्ष ये बाढ़ आती है, और बाढ़ आने के बाद सिर्फ राहत कार्यो पे आरोप प्रत्यारोप लगते है, मीडिया भी कमोवेश नेताओ की भाषा ही बोलता है पर कोई नेता या मीडिया ये सवाल क्यों नहीं पूछता की आखिर इस बाढ़ में ऐसा है क्या जो आज़ादी के 70 साल बाद भीें हम इसका स्थायी समाधान नही निकाल पाये है ।
70 सालो से ये बाढ़ हर वर्ष सैकड़ो , हज़ारो लोगो की जान ले लेती है, लाखो लोगो को अपने घरों से विस्तापिथ होना पड़ता है, चारो तरफ भुखमरी फ़ैल जाती है , जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है , करोडो का नुकसान हो जाता है। यु कहे तो बिहार बाढ़ के समय ठहर जाता है

इंसान की जान की कीमत की भरपाई क्या हर बार सिर्फ़ राहत कार्य से की जा सकती है  ????
ऐसी कोशिश क्यू नही की जाती जिससे अगले बरस फिर से सैकड़ो लोग ना मरे , कोई ये सवाल क्यों नहीं पूछता की आखिर कब होगा इस बाढ़ का स्थायी समाधान ।
नेता 70 सालो से आपके बीच आ रहे है, चुनाव से पहले बड़े बड़े दावे किए जाते है, आपको असल मुद्दों से ध्यान हटाने के पूरे इंतज़ाम किये जाते है पर अब बहुत हो गया । बिहार के हर व्यक्ति को ये सवाल अपने हर नेताओ से पूछना चाहिए की कब होगा स्थाई समाधान ?

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