कब तक उडाएंगे शांति के कबूतर ?

Posted by Ravi Pratap Singh
August 1, 2017

Self-Published

जनवरी 2016 में चीन में एक सर्वे हुआ।  ये सर्वे ग्लोबल टाइम्स न्यूज़ पेपर ने किया था। जिसमे तीन सवाल पूछे गए थे। पहला सवाल था कि “आपका पडोसी देश किस तरह का होना चाहिए ?” दूसरा सवाल था कि ” किस देश को आप अपने देश के साथ नहीं रखना चाहते और किसे अपने देश के साथ रखना चाहते है ?” आप को जान कर हैरानी होगी की भारत को इसमें 10416  लोगो ने ना पसंद वाले देश में शामिल किया जबकि इस ऑनलाइन वोटिंग में 20000 लोगो ने हिस्सा लिया था। अब आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते है कि आधे से ज्यादा लोगो ने आपको ठुकरा दिया जबकि पाकिस्तान को लोगो ने चीन में भारत से ज्यादा पसंद किया गया। भारत शांतिप्रिय होते हुए भी ना पसंद किया गया।
भारत ने अपने 5000 हज़ार साल के इतिहास में किसी भी देश पर हमला नहीं किया। ताकतवर और सम्पन्न होने के बाद भी किसी को दबाया नहीं। जब अमेरिका जैसे देशो के लोग नंगे घुमा करते थे। उस समय भारत उत्तम कोटि के वस्त्र निर्यात करता था। हम अगर 1947 से लेकर आज तक का इतिहास उठा कर देखे तो भारत ने हमेशा शांति और सिद्धांतो की न केवल बात की है बल्कि उसे अपने व्यहवार से भी साबित किया है। 1948 में पाकिस्तान ने  पीओके पर जबरन कब्ज़ा कर लिया था और उसका एक हिस्सा 5180 sqkm, 1963 में पाकिस्तान ने चीन को दे दिया था जो आज अक्साई चीन के नाम से जाना जाता है।
आपके सामने चीन का उदारण है जो 1937 में क्या था ? और आज क्या है ? और भारत की भौगोलिक स्तिथि आज सबके सामने है।
कश्मीर जो भारत का अभिन्न अंग है और हर बार हर तरह से हरेक नेता ने ये बात दोहराई है परन्तु कश्मीर किसके पास है। ये सब आप सभी जानते है। पाकिस्तान ने हम पर चार बार हमला किया और हर हमले में हमने उसे मुहतोड़ जवाब दिया लेकिन हर जीत से हमे मिला क्या कुछ नहीं। जिस कश्मीर के लिए उसने हमे युद्ध में झोका लेकिन हमने क्या किया ? कुछ नहीं । जीत के बाद भी हम उससे गुलाम कश्मीर तक नहीं ले पाये। उसकी आर्थिक पक्ष मजबूत नहीं है, वह सेना में और ताकत में हमारे सामने कही नहीं ठहरता फिर भी वह कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा किये बैठा है और पुरे कश्मीर को लेने के लिए हमारे साथ चार युद्ध लड़ चूका है। मै पाकिस्तान के नेताओ को इसके लिए बधाई देना चाहता हूँ कि हर हार के बाद उन्होंने अपनी कोशिश नहीं छोड़ी और वह आज भी जारी है लेकिन हम क्या कर रहे है ? कुछ नहीं ।
तुलसीदास जी ने  अपने दोहे में कहा था कि ” समरथ को नि दोष गोसाई” यह बात आज भी उतनी है मूल्य  रखती है जितनी आज से 500 साल पहले।

मै भारतीय नेताओ से एक बात कहना चाहता कि केवल कोरे सिद्धांतो से देश नहीं चला करते। चीन और अमेरिका का उदहारण हमारे सामने है। शांति का ठेका केवल भारत ने नहीं ले रखा है । अगर पाकिस्तान परमाणु सम्पन्न देश है, तो आप भी हो यह याद रखना चाहिए। कहते है शांति के लिए भी युद्ध आवश्यक है। लगभग 60 वर्षो से हम शांति के कबूतर पाकिस्तान के साथ उड़ा रहे है पर क्या मिला ? कुछ नहीं।

तिब्बत का उदहारण दुनिआ के सामने है कभी राष्ट्र के रूप खड़ा ये देश आज चीन के कब्ज़े है। किस देश ने इसकी मदद की किसी ने नहीं। आज दुनिआ के नक़्शे से यह ख़त्म हो चूका है। इसलिए आपको अपने हक़ के लिए खड़ा भी होना पड़ेगा और उसके लिए लड़ना भी पड़ेगा। हमे यह समझना पड़ेगा की साधु का अपना धर्म होता है और राजा का अपना धर्म अगर दोनों अपना धर्म नहीं निभाएगे तो न वह साधु बचेगा और न ही राजा। आज हम तिब्बत को भी देख सकते है और इज़राइल को भी इसलिए

हमे पाकिस्तान के साथ शांति के कबूतर उड़ाने बंद करने चाहिए क्योकि ये हम लगभग 60 साल से कर रहे है और इज़राइल जैसे देशो से सबक ले कर एक मिसाल कायम करनी चाहिए ,की अगर भारत और भारतीय को छेड़ा तो भारत छोड़ेगा नहीं।

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