कहानी एक सुर की जो अब बिखरने लगा है और साथ ही बिखेरने लगे हैं हम भी

Posted by Himanshu Priyadarshi
August 10, 2017

Self-Published

हिमांशु प्रियदर्शी:-

‘एक सुर’ (एक ताल/एक लय अथवा भारत की अनेक भाषाओँ में एक आवाज ) या “मिले सुर मेरा तुम्हारा” जो कि भारत का विजयगान और विविधता में एकता यानी को प्रदर्शित और प्रचारित करने के लिए जाना जाता रहा है जिसका केवल एक ही मकसद रहा है कि हम भारतवासी इसी ‘एक सुर’ से अर्थात अपने सुर को हर भारतवासी के सुर से मिलाते हुए अपनी विभिन्न संस्कृतियों, परम्पराओं और सभ्यताओं की विविधता को समेटे हुए अपनी एकता को कायम रखना है और अपनी अखंडता को और मजबूत बनाना है कि हम अनेकता में एकता के भाव से ओतप्रोत भारत दुनिया के लिए एक ग्राह्य उदाहरण बनें|
“मिले सुर मेरा तुम्हारा” गीत की अवधारणा लोक सेवा संचार परिषद् द्वारा विकसित की गयी और इसे दूरदर्शन तथा भारतीय सुचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रचारित/प्रसारित किया गया ताकि समग्र भारतवासियों में अपने देश के प्रति, अपने देशवासियों के प्रति गर्व का, प्रेम का, कर्तव्यों और दायित्वों का भान हो और वे इसे एकसाथ मिलकर ख़ुशी-ख़ुशी जश्न की तरह मनाएं|
इस गीत की रचना पंडित भीमसेन जोशी ने अशोक पातकी और लुईस बैंक्स के प्रबंधन में की और गीत के बोल पीयूष पांडे(जो कि तब एक खाता प्रबंधक और वर्तमान में ओगिल्वी एंड माथर, इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष और रचनात्मक प्रमुख हैं) ने लिखे| इस प्रोजेक्ट की कल्पना सुरेश मल्लिक और कैलाश सुरेन्द्रनाथ ने की थी और इसका निर्देशन कैलाश सुरेन्द्रनाथ ने किया और दर्ज किया सभी विभिन्न व्यवसाय के लोगों को, भारतीय ख्यातिप्राप्त लोगों के एक बड़े समुदाय को जिसमें संगीतज्ञ, खिलाड़ी और फिल्म अभिनेता और अभिनेत्री आदि शामिल थे|
इस राष्ट्रीय समेकीकरण के चलचित्र गीत को भारतीयों के बीच गर्व और एकता के भाव को बढ़ावा देने, भारत के विभिन्न भाषायी समुदायों और समाजों को विशिष्ट रूप से दर्शाने के लिए कुल मिलाकर हमारी विवधता में एकता को प्रदर्शित करने के लिए नियत किया गया था| मिले सुर मेरा तुम्हारा को पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के भाषण के बाद १५ अगस्त १९८८ को दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था| इसने तेजी से भारतीयों को मोहित कर लिया और हमेशा के लिए राष्ट्रगान के समकक्ष बन गया|
इस गीत में तमाम ख्यातिप्राप्त व्यक्तित्वों के नाम शामिल हैं यदि मन करे तो जान लीजिये: अमिताभ बच्चन, जितेन्द्र, मिथुन चक्रवर्ती, लता मंगेशकर, शर्मिला टैगोर, मल्लिका साराभाई, हेमा मालिनी, तनुजा, पंडित भीमसेन जोशी, एम बालाकृष्णन, कमल हासन, मीनाक्षी शेषाद्री, रेवती, प्रकाश पादुकोण, के. आर. विजय, वहीदा रहमान, शबाना आज़मी, दीपा साही, ओम पूरी, अरुन लाल, नरेन्द्र हीरवानी, रामानाथन कृष्णन, एस वेंकट राघवन, सुहासिनी, उत्तम मोहंती चूनी गोस्वामी, प्रदीप कुमार बनर्जी(PK), सुनील गंगोपाध्याय, गुरुबख्श सिंह, आनंद शंकर, प्रताप पोथेन और जावेद अख्तर आदि भारतभर के कलाकारों और व्यक्तित्वों ने इस गीत को सामंजस्यपूर्ण और समधर्मी बनाया |
“मिले सुर मेरा तुम्हारा” गीत के बोल इस प्रकार हैं:
हिंदी(पंडित भीमसेन जोशी जी और लता मंगेशकर जी का गायन, दूसरों के गायन के बीच में), और जो अन्य भाषाएँ प्रयोग की गयी थीं जो इस प्रकार हैं : असमिया, बंगाली, गुजरती, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, मारवाड़ी, उड़िया, पंजाबी, सिन्धी, तमिल, तेलगु, और उर्दू| (तब १९८८ में, भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओँ में मौजूद)|
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
सुर की नदियाँ हर दिशा से बहते सागर में मिलें
बादलों का रूप ले कर बरसे हल्के हल्के
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
मिले सुर मेरा तुम्हारा …
मिले सुर मेरा तुम्हारा …

(कश्मीरी)
चॉन्य् तरज़ तय म्यॉन्य् तरज़
इक-वट बनि यि सॉन्य् तरज़

(पंजाबी)
ਤੇਰਾ ਸੁਰ ਮਿਲੇ ਮੇਰੇ ਸੁਰ ਦੇ ਨਾਲ
ਮਿਲਕੇ ਬਣੇ ਇਕ ਨਾਵਾਂ ਸੁਰ ਤਾਲ

(हिन्दी)
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा

(सिन्धी)
मुहिंजो सुर तुहिंजे साँ प्यारा मिले जडेंह
गीत असाँजो मधुर तरानो बणे तडेंह

(उर्दू)
सुर का दरिया बह के सागर में मिले

(पंजाबी)
ਬਾਦਲਾਂ ਦਾ ਰੂਪ ਲੈਕੇ ਬਰਸਾਂ ਹੌਲੇ ਹੌਲੇ

(तमिल)
இசைந்தால் நம் இருவரின் சுரமும் நமதாகும்
திசை வேறு ஆனாலும் ஆழிசை ஆறுகள் முகிலாய் மழையாய் பொழிவதுபோல் இசை…
நம் இசை
इसैन्ताल नम इरुवरिन सुरमुम नमताकुम्
तिसै वेर आनालुम आऴिसै आरुकळ मुकिलाय मऴयाय पोऴिवतुपॉल इसै
नम इसै

(Kannada)
ನನ್ನ ಧ್ವನಿಗೆ ನಿನ್ನ ಧ್ವನಿಯ,
ಸೇರಿದಂತೆ ನಮ್ಮ ಧ್ವನಿಯ

(तेलुगु)
స్వర సరి తలుకులు కుతు సొంపుగ కడలిలొకె చెరగ
మబ్బులై పై పై కి తెలి కురిసె చల చల్లగ
నీ స్వరము నా స్వరము మన స్వరమై మ్రొగను లె *2

(मलयालम)
എന്‍റെ സ്വരവും നിങ്ങളുടെ സ്വരവും
ഒത്തുചേര്‍ന്നു നമ്മുടെ സ്വരമായ്
एन्टे स्वरवुम निङळुटे स्वरवुम
ओत्तुचेर्न्नु नम्मुटे स्वरमाय्.

(बांगला)
তোমার সুর মোদের সুর
সৃষ্টি করুক ঐক সুর

(असमिया/Assamese)
সৃষ্টি হওঁক ঐক্যতান
सृष्टि हओक ऐक्यतान

(उड़िया/ଓଡିଆ)
तुम मोर स्वर र मिळन (ତୁମ ମୋର ସ୍ୱର ର ମିଲନ)
सृष्टि करे चालु चतन (ସୃଷ୍ଟି କରେ ଚାଲୁ ଚତନ)

(गुजराती)
મળે સૂર જો તારો મારો
બને આપણો સૂર નિરાળો

(मराठी)
माझ्या तुमच्या जुळता तारा
मधुर सुरांच्या बरसती धारा

(हिन्दी)
सुर की नदियाँ हर दिशा से बहते सागर में मिलें
बादलों का रूप ले कर बरसे हल्के हल्के
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
मिले सुर मेरा तुम्हारा …
तो सुर बने हमारा

गीतकार : पियूष पांडे
संगीतकार : पं. भीमसेन जोशी , डांबर बहादुर बुडाप्रिति , प्रताप के. पठाण
गायक : पं. भीमसेन जोशी , लता मंगेशकर , कविता कृष्णमूर्ति , एम. बालकृष्णमूर्ति, सुचित्रा मित्रा

देश के एक सुर के बिखरने की दर्द, पीर और टीस भरी दास्ताँ
एक लम्बे वक्त से हमारे समाज के लोगों की अपने-पराये की और अपने लोगों के दूसरों के बीच अप्रत्याशित धमकदार/ठसकदार प्रभाव डालने की ओछी दूषित मानसिकता, उस दूषित मानसिकता से उपजा तनाव, धार्मिक कट्टरता और इस कारण दूसरों के प्रति पैदा हुई नफरत ने हमारी एक आवाज को, एक सुर को जो हमारी विवधता में एकता को प्रदर्शित करता था, को ध्वंस के गहरे गर्त में धकेल दिया| यहाँ से हम एक आवाज एक सुर बनने के बजाय असुर बनने पर आमादा हो गये और भुला बैठे हमारे बीच का प्यार, भाईचारा और एकता और हाबी हो गया हम पर दूसरों के ऊपर अपनी सत्ता स्थापित करने का राक्षस और बिखरने लगा हमारा सुर क्योंकि पहले बिखरे हम, हमारे सम्बन्ध, हमारी एकता और लिख डाली हमने अपनी विविधता को ध्वस्त करने की अथाह गाथा और फिर न हम रहे और न हमारा सुर वो सुर वो तान वो आवाज जो हमें हमारी विविधता में समग्रता लाने के लिए बनी थी और बनी थी बुलंद भी हुई थी हमें पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्खिन तक केवल एक भारत बनाने के लिए पर दुर्भाग्य हमारा कि हमें अपनी बरबादी अब भी नजर नहीं आ रही है|
जब हम अपने ही देश के बाशिंदों रंग-रूप, कद-काठी, जाति, धर्म, पंथ और काज देखकर मुंह फेरना शुरू कर दें तब टूटता है हमारा सुर और जब टोपी, तिलक, पगड़ी-साफा और क्रूश देखकर अंधी नफरत में अपनी आँखें लाल करने लगें तब टूटता है सुर और वही सुर तब भी टूटता है जब हम धर्मोन्माद से वशीभूत होकर भीड़ के रूप हत्याएं करना शुरू कर दें बिना ये जाने कि उस अभागे की कोई गलती थी भी या नहीं अगर होती भी तो उसका फैसला न्यायालय करता पर इस सबकी परवाह छोड़ हम खुद न्यायालय बन जाते हैं और कर देते हैं फैसला मौके पर ही तब ऐसे में सुर केवल टूटता ही बल्कि इंसानियत लहू-लुहान होती है और सभी मानवीय संवेदनाओं से हाथ धो बैठते हैं और फिर निकल पड़ते हैं अगला इन्साफ करने|
जब हम अपने जैसों के साथ ऊँची जाति-नीची जाति के घटिया समीकरण मतलब फ़ॉर्मूले के जरिये भेद करने लगें और उनके लिए जीवन जीने के तमाम निकृष्ट मानक तय कर दें और उन्हें हीन भावना में डुबो दें तब भी टूटती है हमारे एक सुर की माला| जब हमारे लिए समानता का मतलब ही न रहे, हम अपने पड़ोसी, पीछे वाली गली के लोगों से, शोषितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों आदि से प्रेमभरी नजरें ही न मिला सकें उन्हें अपने गले न लगा सकें क्योंकि ऐसा करने में जब हमारा झूठा अहम ही हमारे आड़े आये तब हमारी कैसी ऊँची संस्कृति, कैसी एकता और कैसा राष्ट्रवाद, ऐसे में हमारा सुर भरभराकर गिर पड़ता है और तब हम इतनी कमियों और विसंगतियों के होते हुए कैसे कहें कि मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा……….तब हम बिखराते हैं खुद को हमारे एक सुर को एक आवाज को सिर्फ और सिर्फ अपनी करतूतों से……..लेकिन इतना सबकुछ होने के बाबजूद हममें से ही अधिकतर भारतीय हमारे इस एक सुर को एक आवाज को जो भारतवासियों को जोड़ने वाली आवाज है सुर है को सहेजने और बुलंद करने के लिए प्रयासरत हैं| इसकी एक झलख सोमवार १७ जुलाई को ट्विटर पर #MileSurMeraTumhara के प्रचलित मतलब ट्रेंड होने पर मिली| जब अलवर राजस्थान में एक मवेशी वाहक की भीड़ द्वारा संदिग्ध गाड़ी में गाय की तस्करी के आरोप में जान से मार दिया गया और एक मुस्लिम आदमी का हिन्दू महिला से प्रेम के चलते पेड़ से बांध कर मरने तक पीटा गया आदि मसलों पर बहस होने लगी| इसके लिए आप लोगों के ट्विटस देख सकते हैं जो आज के नफरत और कट्टरता के दौर में समधर्मिता और सामाजिक सद्भाव को बचाने की सकारात्मक कोशिश है और हमें उम्मीद है कि हम एकबार फिर से चिरकालिक, प्रगाढ़, गहरे और बुलंद एक सुर बनेंगे और हम फिर से गायेंगे “मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा ……………”

ट्विटस:

राना सफ्वी: कहते हैं कि हिन्दू बनाम मुस्लिम विवाद में मत फंसें
हमारे पास #MileSurMeraTumhara जैसी मजबूत समधर्मी परम्परा है
दूसरी तरफ मेघनाद कहते हैं कि बड़े रंगमंच के व्यक्तित्व #MileSurMeraTumhara ट्रेंड के साथ आये| वास्तव में यही वो है जिसकी आज हमें सख्त जरुरत है.🙂

इस्लाम हुसैन ने गंगा जमुनी परम्परा को तहज़ीब को दर्शाते हुए इस फोटो को ट्विट किया|

प्रेरणा ने एक फोटो को ट्विट करते हुए लिखा कि जैन मंदिर, मस्जिद, गौरीशंकर मंदिर, गुरुद्वारा सब एक ही रूप एक ही ढांचे में हैं, वहां पास ही चर्च भी है जो #MileSurMeraTumhara को ढंग से प्रदर्शित करता है|

संगीतकार और गायक विशाल ददलानी अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक छोटी विडियो क्लिप पोस्ट करके ओरिजिनल #MileSurMeraTumhara गीत को समर्पित करते हुए कहते हैं कि आज #MileSurMeraTumhara भारतियों के बीच प्रेम और एकता का नारा दे रहा है| भावना के सम्मान में एक छोटा गीत लिखा| सम्भवता हम सब तुच्छ नफरत से ऊपर उठें और भारत को महान बनाएं! जय हिन्द!

नव्या जोशी विशाल ददलानी को ट्विट करते हुए लिखती हैं कि ये खूबसूरत है….वास्तव में यही वो है जिसकी भारत को जरूरत है बजाय इसके कि हम वेवकूफी भरी बातों पर लड़ें|
एक सुर या मिले सुर मेरा तुम्हारा गीत देखने व् सुनने के लिए निचे लिंक पर क्लिक करें: https://youtu.be/JcnlZGekHok

 

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