कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को क्या रोक पायेगा छत्तीसगढ़ ?

Posted by Premlal Sahu
August 10, 2017

Self-Published

देश राजनीतिक संकट से जूझ रहा है. लोकतंत्र में रस्साकशी चालू है. एक पार्टीवाद की ओर लोकतंत्र तेजी से अग्रसर है. राष्ट्रीय स्तर से लेकर पंचायत स्तर की राजनीति में जो खेल हो रहा है, वह इस देश ने पहले कभी नहीं देखा था. यह पहली बार था जब मैं रात्रि के 3 बजे तक टीवी सेट से चिपका राज्यसभा चुनाव के परिणाम का अपडेट ले रहा था. मोदी-शाह के चुनावी प्रबन्धन और राहुल गाँधी की राजनीतिक योग्यता पर मीडिया ट्रायल बदस्तूर जारी है. हाल ही में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश का पीटीआई को दिया गया साक्षात्कार पूरी मीडिया में छाया रहा.

अगले लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है. 2019 की लोकसभा चुनाव के पूर्व राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश जैसे कई बड़ी राज्यों में विधानसभा का चुनाव होने वाला है. इन अधिकांश राज्यों में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत दिख रही है. विपक्ष बैकफुट पर है. विपक्ष राष्ट्रीय नेतृत्व के संकट से भी गुजर रहा है. ऐसे राजनीतिक हालात में राजस्थान और छत्तीसगढ़ की विपक्ष का विद्रोही तेवर विपक्ष के लिए अँधेरे में उम्मीद की किरण बनती दिख रही है. राजस्थान में युवा नेता सचिन पायलट के नेतृत्व में राजस्थान कांग्रेस इकाई में एक नवीन ऊर्जा का संचार किया है. हाल ही में राजस्थान में किसान आक्रोश रैली का सफलतापूर्वक आयोजन यह संकेत देता है कि राजस्थान कांग्रेस 2018 के चुनाव में मोदी-शाह की विजय रथ को कड़ी टक्कर देने वाले हैं.

इसी कड़ी में हमेशा राष्ट्रीय मीडिया की नजर से दूर रहने वाला छत्तीस किलों का प्रदेश छत्तीसगढ़ का विपक्ष डार्क हॉर्स साबित हो सकता है. अगर आप यहाँ की कांग्रेस इकाई पर नजर डालेंगे तो आपको बिल्कुल ही अलग तरह की कांग्रेस नजर आएगी. झीरम घाटी में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने 20 बेहतरीन प्रदेश स्तर के नेताओं को खो दिया था. नन्दकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा के शहीद हो जाने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस विकट नेतृत्व संकट से गुजरने लगा. पूर्व मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सबसे बड़े नेता अजित जोगी की रमन सिंह से दोस्ती ने प्रदेश इकाई को और भी कमजोर करने का काम किया. अंततः कांग्रेस की राष्ट्रीय नेतृत्व ने अजित जोगी पर कार्रवाई करते हुए पार्टी से निलंबित कर दिया. इन सबके बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश कमेटी के नेतृत्व का कार्यभार भूपेश बघेल को सौंपा गया. प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल एवं नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के सामूहिक नेतृत्व में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रमन सरकार का पर्दाफाश कर दिया है. एक के बाद एक कई घोटाले सामने आने लगे. मुख्यमंत्री समेत आठ मंत्री पर भ्रस्ताचार के गंभीर आरोप हैं. यहाँ कांग्रेस हर मोर्चे पर संघर्ष करती नजर आ रही है. भूपेश बघेल की नेतृत्व में बस्तर में पदयात्रा, राहुल गाँधी की जन-अधिकार सभा, किसान सत्याग्रह, जन विधानसभा जैसे अभियानों के माध्यम से भाजपा सरकार बैकफुट पर है. राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कई दौरा कर चुके हैं. भाजपा के अन्दर से ही रमन सिंह के चेहरे को बदलने की मांग उठने लगी है. संघ भी नये चेहरे की खोज में जुट गया है. इन सबके बीच कथित रूप से सूत्रों की माने तो भाजपा ने कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा छत्तीसगढ़ में आंतरिक सर्वे करवाया था. इसके रिपोर्ट के मुताबिक़ रमन सिंह के चेहरे की बदौलत भाजपा की जीत पर प्रश्नचिन्ह लगा था. सूत्रों के मुताबिक़ अगर अभी चुनाव हुयी तो कांग्रेस की सरकार बन सकती है.

इसके अलावा छग कांग्रेस ने हाल ही में जंतर मंतर पर लोकतंत्र बचाओ आन्दोलन के माध्यम से साबित कर दिया कि उसमे अभी दम बाकी है. जाति समीकरण से इतर होकर छग कांग्रेस मुद्दों की राजनीति कर माहौल बना पाने में सफल हो रही है. आगामी चुनाव में यह कांग्रेस के लिए संजीवनी बनकर उभर सकती है. मोदी-शाह के कांग्रेसमुक्त भारत के सपनों पर भूपेश बघेल और छग कांग्रेस पानी फेर सकती है.

अब देखना दिलचस्प होगा कि शाह-मोदी छग कांग्रेस को रोकने के लिए क्या करते हैं? लोकतंत्र में मुद्दे की राजनीति कितनी दूर तलक जाति है?

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