कुसहा त्रासदी के बाद बिहार फिर से विध्वंसकारी बाढ़ की चपेट में…

Posted by H Rahman
August 19, 2017

Self-Published

आज से ठीक 9 वर्ष पूर्व 18 अगस्त 2008 को आयी विनाशकारी बाढ़ ने पुरे कोशी क्षेत्र समेत सीमांचल के कुछ इलाके को भी जलमग्न कर दिया खास कर पूरा कोशी क्षेत्र उस प्रलयकारी बाढ़ की चपेट में आ गया था. सड़क किया, पूल किया, मकान किया, जो भी तेज धार की चपेट में आता था क्षण भर में जमींदोज हो जाता था इतना भयावह मंजर था की आज, 9 साल बाद भी सोचता हूँ तो रूह काँप जाता है लोग घर से बेघर हो गए थे,खाने को लालायित थे पीने को साफ पानी नसीब नहीं हो रहा था..जहाँ तहाँ किसी भी तरह ,कोई तंबू बनाकर तो कोई किसी कैंप में ,तो कुछ लोग खुली आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को विवश थे .
आज सीमांचल सहित पूर्वी चम्पारन,पश्चिमी चम्पारण, कोशी का भी कुछ इलाक़ा बुरी तरह से सैलाब के आगोश में आ चूका है. अप्रत्याशित आये बाढ़ से पूरा जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है अभी भी पानी में हो रही लगातार बेतहाशा वृद्धि से लोगों में दहशत का माहौल बन हुआ है.प्रशासन के तरफ से कुछ भी नहीं किया जा रह है.खाने पीने को कुछ भी नहीं मिल रहा है और न ही तम्बू बनाने के लिए प्लास्टिक ही दिया जा रहा जिससे की लोग किसी तरह से दिन गुज़ार सके.ऐसा लगता है जैसे प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है…माननीय नीतिश कुमार जी आप अपने पार्टी को टूटने से बाद में बचाइएगा पहले लोगों की जान रही उसे बचाने की कोशिश कीजिए …वैसे भी आपके पुलिस का घिनौना चेहरा सब के सामने आ चूका है आंकड़ों को कम करने के लिए लाशों को फेंका जा रहा है. सिर्फ हवाई सर्वेक्षण से कुछ नहीं होगा जमीनी स्तर पर एनडीआरएफ की टीम को बाढ़ की विभीषिका झेल रहे लोगों को बचाने के लिए भेजिए.

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