कोचिंग का चक्कर

Posted by KISHAN PANDEY
August 24, 2017

Self-Published

दिल्ली की किसी बड़ी सड़क को पकड़ लीजिये , चलते जाइये , बस से , कार से , ऊबर से , ओला से ,साइकिल से या पैदल । आपको बड़े बड़े बैनर देखने को मिलेंगे , के.डी कैंपस , नारायणा , फिटजी , आकाश इंस्टिट्यूट , और अन्य ऐसे ही तीन चार हज़ार अन्य बड़े छोटे कोचिंग सेंटर्स के नाम।

ये कोचिंग सेंटर नही है एक नए तरह के धर्म है , नारायणा वाले नीले वस्त्र पहनते है , उनके वहाँ हफ्ते में चार ही टेस्ट होते है , आकाश वालों का धर्म थोड़ा अलग है , वो दीन दुनिया से इतने कटे नहीं है। कोई भी वस्त्र पहन सकते हैं , इन सभी धर्मों का मार्ग भले ही कुछ भी हो , पर मकसद एक ही है , मोक्ष। मोक्ष जो विद्यार्थियों को मिलता है सरकारी नौकरी के रूप में , IIT में एडमिशन के रूप में , AIIMS में एडमिशन के रूप में। इसी मोक्ष के लिए दिल्ली और देश की आधी युवा आबादी भाग रही है। दिन भर साल के 365 दिन यज्ञ जारी रहता है। सुबह उठकर एक छात्र मोक्ष पाने के लिए सबसे पहले जनरल स्टडीज़ का पाठ करता है, फिर लॉजिकल रीज़निंग का ध्यान करके, मैथ्स की आराधना करता है।

दिन भर सड़क पर लाखों छात्र देखता हूं , खोये-खोये से होते हैं , जीन्स और चप्पल पहन के हाथ में द हिन्दू अखबार पकड़ के , अंतरमन में मंत्रो का जाप निरंतर चालू रहता है । उनकी आंखों से बस फॉर्मूले ही झांकते है। और आंख के एक कोने में एक छोटी सी आशा की किसी तरह सरकारी नौकरी रुपी मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। हर साल लगभग डेढ़-दो करोड़ छात्र इस मोक्ष को पाने के लिए लग जाते है। और सफल हो पाते है सिर्फ दस या बीस, फिर वो छात्र जो सफल नही हो पाए वो एक दो लाख की गुरु दक्षिणा भरके, भारी भारी नोट्स ले के फिर लग जाते है मोक्ष प्राप्ति की ओर , और ये चक्र चलता रहता है। इस में किसी का फायदा होता है तो वो हैं बड़े बैनर वाले पंडितो का, जिनके बैनर आपको मिल जाएंगे हर सड़क चौराहे और नुक्कड़ पे।

ये सब देख के मैंने भी एक कोचिंग सेंटर खोला, खुलते ही दिन दस हज़ार इन्क्वायरी आ गई, आप कौनसे कोर्स की कोचिंग देते हैं ?
हमने सरल शब्दों में बताया , ” हम ‘कुछ नहीं’ का कोर्स करवाते हैं। ‘कुछ नही’ ये कैसा कोर्स हुआ भला ?
हमने बताया , जब किसी कंपनी को ऐसे नौकरों की जरुरत हो जिन्हें ‘कुछ नहीं’ आता हो। तो वो आईआईटी , आईआईएम के पास थोड़ी जाएंगे ? , वहाँ के छात्रों को तो बहुत कुछ आता है। इसलिए नई कंपनियो को ऐसे कर्मचारी की ज़रूरत है जिन्हें ‘कुछ नहीं’ आता हो । सात-आठ दिन तक तो छात्र दुविधा में रहे , उनका कहना था कि वो कोर्स के लिए इच्छुक तो हैं पर उन्हें ‘कुछ नही’ वाली बात पर संदेह है ।

‌हमारे कोचिंग इंस्टिट्यूट ने अगले दिन बाहर बड़ा बैनर लगवाया , कुल 50 छात्रों की पासपोर्ट साइज़ फोटो का बैनर बनवाया और उसमें लिखा गया कि , ‘कुछ नहीं’ कोर्स करके छात्र आज किस किस मुकाम पर है ।
‌दो दिन बाद ही , 50 हज़ार आवेदन आ गए , एक दो साल बाद ही हमने कोचिंग सेंटर को वातानुकूलित कर दिया और साथ ही फीस भी दोगुनी कर दी ।

‌आज कोचिंग सेंटर की सालाना आय 5 करोड़ से भी अधिक है ।
‌जीवन में आप जो न कर पाएं उसकी सलाह लोगों को ज़रूर दें , इस से लोग आपको सफल और काबिल समझेंगे ।
‌जैसे आईएएस की परीक्षा में फ़ेल हुए छात्र शिक्षक बन जाते है । जिनको भगवान नही मिलते वो बाबा हो जाते है । जब आपको मंज़िल न मिले तो लोगों को मंज़िल का पता बताये ।

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