जी अगस्त है अगस्त में तो मरते ही है बच्चे

Posted by Himanshu Priyadarshi
August 15, 2017

Self-Published

 

बच्चे मरते हैं

काम पर जाते हुए बच्चे मरते हैं

काम के बिना बच्चे मरते हैं

जब माँ-बाप के पास काम नहीं होता तो बच्चे मरते हैं

काम होता है लेकिन काम के पैसे नहीं मिलते तब भी बच्चे मरते हैं

गाड़ी का पंचर लगाते-लगाते जब खुद के शरीर का पंचर हो जाता है पिंजर हो जाता है तब बच्चे मरते हैं

सरहद पर सैनिक राष्ट्रवाद साबित करते हुए मरता है और

ट्रैफिक सिग्नल पर दो निवाले के लिए तिरंगे झंडे और तिरंगा टोपी जिसका उन्हें सही से मतलब भी नहीं पता उस राष्ट्रवाद को बेचते हुए बच्चे ही मरते हैं

जिन बच्चों ने कभी जिंदगी में वे किताबें नहीं पढ़ीं लेकिन फैक्टरियों में उन किताबों पर जिल्द चढ़ाते-चढ़ाते मरते हैं बच्चे

जिन चूड़ियों को बच्चों ने कभी अपनी माँ की कलाई पर पहने नहीं देखा उन चूड़ियों को बनाते हुए पहले अपनी आँखें खोते हैं फिर मरते हैं बच्चे

जो बच्चे कांच और प्लास्टिक की बोतलों को खजाने से कम नहीं समझते उस खजाने को कूड़े के ढेर में ढूंढते-कुरेदते हुए मरते हैं बच्चे

कूड़े की गाड़ी भरते, ढकेलते और खींचते हुए बच्चे मरते हैं

जिन खिलौनों की कभी आशा नहीं की उन खिलौनों को बनाते, रंग लगाते उन्हें सजाते हुए मरते हैं बच्चे

नहीं पता कि कभी वे उस बनती नई सड़क पर चल पाएंगे डालते हुए उसपर कोलतार(तारकोल) मरते हैं बच्चे

भीड़ में मरते हैं सूनसान में मरते हैं बियाबान में मरते हैं

जीवन जीने के एहतराम के भरम में मरते हैं वे बेज़बान मरते हैं धरम के संग्राम में मरते हैं बच्चे

बच्चे हैं वे जवानी आने से पहले ही मरते हैं

बेकाम और बेनाम मरते हैं

बच्चे हाँ वे अंजान मरते हैं

हमारे मंत्री माफ़ करना स्वास्थय मंत्री ने कहा है अगस्त है ये अगस्त में तो मरते ही हैं बच्चे!!
-हिमांशु प्रियदर्शी

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