डर के आगे ही जीत है।

Posted by Sandeep Anand kumar
August 23, 2017

Self-Published

 

कामयाबी का सबसे बड़ा श्रेय किसी को जाता है तो वो है सही समय पर बिना डरे, बिना हिचकिचाए बिना समय गवाए निर्णय लेने की क्षमता को जाता है क्योकि हर कामयाबी की पहली सीधी पर ही हमें सही निर्णय लेना होता है अन्यथा पछतावे के सिवाय कुछ नहीं मिलता या वो मिलता है जो लोग छोड़ देते है.
भारत में और दुनिया में ऐसे कई लोग है जो निर्णय लेने से या तो कतराते हे या घबराते है क्योकि वो असफलता से डरते है परन्तु जब तक असफलता का स्वाद नहीं चखोगे सफलता क्या होती है उसका असली अंदाजा नहीं लगेगा. वो पल काफी छोटा होता है जब आपको निर्णय लेना होता है बस उसी पल अपने आप को मजबूत बनाकर निर्णय लेना है क्योकि ये पल शायद आपकी जिंदगी में दोबारा न आये या आप इस पल के लिए मोजूद न हो.
अमेरिका की नासा संस्था अपना पहला मानव चंद्रमा पर उतरना चाहती थी उस विमान में जाने के लिए दो विमान चालको का चयन किया गया पहले और मुख्य चालक थे एडविन एड्रिल और दुसरे थे नील आर्मस्ट्रांग. एडविन जो की नासा में बड़े वैज्ञानिक थे और इस मिशन की बड़ी जानकारी रखते थे. वही दूसरी और नील जो सिर्फ की एक आर्मी के पायलट थे जिसका दूर दूर तक अन्तरिक्ष अभियान से कोई लेना देना नहीं था. दोनों पायलट विमान को चन्द्रमा की सतह पर उतारने में कामयाब हो गए, अब उन्हें धरती से मिलने वाले संदेशो का पालन करना था.
धरती से एक सन्देश आया “ आप चन्द्रमा की सतह पर उतर चुके हो, मुख्य पायलट एडविन अपना पहला कदम चन्द्रमा की सतह पे रखे” इन्सान आज इतिहास रचने जा रहा था और उसका सूत्रधार था एडविन मगर एडविन को एक पल की हिचकिचाहट हुई एक डर लगा की उतरने पर क्या होगा में कही गायब तो नहीं हो जाऊंगा या जल कर भस्म तो नहीं हो जाऊंगा. ये बस एक अधिकतम १० सेकंड की ही हिचकिचाहट थी तभी धरती से दूसरा सन्देश आया co pilote next . अगले ही कदम नील आर्मस्ट्रांग ने अपना पहला कदम चन्द्रमा की सतह पर रखा और वो इतिहास का हिस्सा बन गए, दुनिया का इतिहास एक पल में बदल गया एडविन हर मामले में नील से कई बेहतर थे मगर एक पल की हिचकिचाहट ने उन्हें गुमनामी के अंधेरो में धकेल दिया एडविन को वो शोहरत कभी नहीं मिली जो नील को मिली.
मनुष्य यानि हमारे पास अदभूद क्षमता मोजूद है जो की सिर्फ मनुष्य के अलावा किसी और प्राणी में नहीं है यदि हमें कोई हरा सकता है या रोक सकता है तो वो है सिर्फ हमारा डर और हिचकिचाहट. अपने अंदर के डर को भगाओ परिणाम की चिंता किये बगेर अपनी क्षमता से निर्णय करे सफलता आपके कदम चूमेगी
संदीप पंचाल

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