डोकलाम से पीछा छूटा और डेरा से सौदा टूटा

Posted by ANKIT ROY in Hindi, Society
August 29, 2017

28 अगस्त का दिन, ये कोई आम दिन नहीं था। सब कुछ पहले से तय था, हम जानते थे कि क्या होने वाला है। 25 अगस्त को ही पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दे दिया था। उसने यह भी तय कर दिया था कि उसकी सज़ा का ऐलान 28 अगस्त (सोमवार) को होगा। हम 25 अगस्त को हरियाणा में हुई हिंसा भी देख चुके थे, 38 लोगों की मौत देख चुके थे, पंचकुला जैसे खूबसूरत शहर को जलते और तबाह होते देख चुके थे। गुरमीत राम रहीम के भक्तों को छोड़कर सभी के मन में गुस्सा तो था ही। हम चाहते थे कि ऐसे शख्स को जिसकी वजह से इतनी बर्बादी और डर का माहौल पैदा हुआ उसे कड़ी से कड़ी सज़ा होनी चाहिए। 

बस इसलिए हम सुबह से दोपहर के 2.30 बजने का इंतज़ार कर रहे थे, जब रेप केस के दोषी राम रहीम को सज़ा सुनाई जानी थी। सबकी नज़रें लगातार टीवी, ट्विटर पर बनी हुई थी। हमने राम रहीम से जुड़ी हर खबर को सुना, उसका कोर्ट में कम सज़ा के लिए गिड़गिड़ाना, गिरकर कुर्सी को पकड़ लेना, रोना और ना जाने क्या-क्या। फैसला आने के एक घंटे के अंदर-अंदर तमाम बड़ी वेबसाइटों के होम पेज, सिर्फ और सिर्फ राम रहीम से जुड़ी खबरों से पटे पड़े थे। पहले तो सबसे पहले खबर ब्रेक करने के चक्कर में सभी मीडिया कंपनियों ने राम रहीम को 10 साल की सज़ा सुना दी। लेकिन देर शाम होते-होते जिन चैनलों ने 10 साल सज़ा की खबर सबसे पहले ब्रेक करने का दावा किया था, उन्होंने फिर एक ब्रेकिंग अपडेट करते हुए कहा 10 नहीं कुल 20 साल की सज़ा हुई है।

जिन सभी ने 10 साल की सज़ा की खबर ब्रेक करने का दावा किया था, उनमें से किसी ने भी ये कहने की या माफी मांगने की ज़हमत नहीं उठाई कि उनके पास पूरी खबर नहीं थी। अपनी गलती तो क्या ही मानते, उल्टा ये कहकर खुश होने लगे कि 10 नहीं 20 साल की सज़ा हुई है, न्याय की जीत हुई है। खैर मीडिया कंपनियां भी क्या करें, खबरें ब्रेक करने के दौर में माफी मांगने का मौका कहां मिलता है किसी को।

इस बीच गज़ब की बात ये रही कि 28 अगस्त को ही डोकलाम में चीन और भारत के बीच जो टकराव की स्थिति बनी थी, वो खत्म हो गई और दिल्ली की बवाना सीट पर हुए उपचुनाव का परिणाम भी आया। राम रहीम वाली खबर की टाइमिंग कुछ ऐसी रही कि डोकलाम गतिरोध और दिल्ली में बवाना की सीट पर बीजेपी की हार का मुद्दा मीडिया में लीड नहीं ले पाया।

ये बीजेपी की खुशकिस्मती ही रही कि राम रहीम के फैसले ने मीडिया को ना डोकलाम पर पैदा हुए कन्फ्यूज़न पर चर्चा करने का मौका दिया और ना ही दिल्ली उपचुनाव में हार पर जिसे कि प्रतिष्ठा के सवाल की तरह देखा जाता है। कुल मिलाकर डेरा सच्चा सौदा से अपना सौदा खत्म करने का दूरगामी प्रभाव हरियाणा में बीजेपी पर जो भी हो, फिलहाल पार्टी दिल्ली की हार और डोकलाम विवाद के निपटारे पर जवाब तलब से ज़रूर बच गई है। वहीं, बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी धीरे से हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए साइड हो लिए और मीडिया ट्रायल से बच गए।

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