तीन तलाक और महिला अधिकारों की राजनीति

Posted by Pratima Tripathi
August 22, 2017

Self-Published

 

ओ भारतीय राजनीतिज्ञों,

हिन्दू मुस्लिम का झगड़ा बस अपने ही मनोरंजन के लिए रखो। वरना हम महिलाएँ तुम लोगों के इस मनोरंजन से हर जगह परेशान हैं। तीन तलाक जैसी घटिया प्रथा पे तुमने 1986 से लेकर अब तक सिर्फ गला फाड़ा, किया कुछ नहीं। अब कोर्ट ने दुबारा गलत ठहराया है तो अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की बजाय कुछ और काम भी करो। नेक्स्ट बिल जो बनाओ उसमें ये बातें भी शामिल करो-

१) परित्यक्ता महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक अधिकार सुरक्षित करो। और ऐसी महिलाओं के पतियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही करो। जिसकी शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री से हो, और हम सभी अपने2 घरों में मौजूद ऐसे शख्स के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायेंगे।

२) जो ये आपने घरेलू हिंसा का कानून कमजोर किया है उसके बाद आपको कोई हक नहीं बनता कि आप महिलाओं के हिमायती होने का राग आलापें। इस कानून को फिर से दुरुस्त करिये।

३) मैरिटल रेप को अपराध घोषित किया जाये और कड़ी सजा का प्रावधान हो।

४) तेजाब और बलात्कार पीड़ित महिलाओं के लिये डॉक्टरों के अलावा मनोचिकित्सकों से कॉउंसिलिंग आप उपलब्ध कराएं। और उसका डेटा पब्लिश करें।

५) नाबालिग बच्ची के केस में गर्भवती हुई लड़की को कोर्ट जाने की जरूरत ना हो, उसका एबॉर्शन उचित मेडिकल सुविधाओं के साथ तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में हो। बालिग के केस में उसे तय करने दें कि उसे एबॉर्शन करना है या नहीं।

६) स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत जो आप नाबालिग बच्चियों की शादी का रास्ता खोल रखें हैं वो बंद करें। हमें मालूम है कि कितने राज्यों में आपका वोट बैंक सिर्फ इसी आधार पे है कि आप कितने बड़े महिला विरोधी बन कर दिखाते हैं।

७) हॉनर किलिंग खत्म करने की पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही आपकी बनती है। खाप पंचायतों का अस्तित्व मिटायें। ये लव जिहाद का जो शिगूफा छेड़ा है वो बंद करें।

८) पुलिस सुधार तो जाहिर है आप करना चाहते नहीं। मौजूदा पुलिस का अमानवीय चेहरा आपके राजनीतिक हित को साधता है पर महिलाओं के नागरिक हित को सबसे ज्यादा चोट पहुँचाता है।

९) हर हाल में महिलाओं को संपत्ति में हिस्सा मिले इसके लिए मौजूद कानून को अनिवार्य कर दें। ताकि क्लेम का झंझट ही खत्म हो। क्योंकि महिलाओं के संपत्ति में भागीदारी का भारतीय प्रतिशत 1 से भी कम है।

१०) किसी नेता/अधिकारी द्वारा दिये गए महिला विरोधी बयानों को तुरंत संज्ञान में लाया जाए और ऐसे लोगों को उनके पद से मुक्त किया जाये। ऐसे नेता को पार्टी से निकाला जाए। चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया जाये।

११) सैनिटरी नैपकिन मुफ्त करें हर वर्ग की महिलाओं के लिए। और जरा मंदिर और मस्जिद की पॉलिटिक्स से बाहर आकर, पब्लिक शौचालयों और उसकी साफ सफाई पे पॉलिटिक्स करें। कचरा प्रबंधन पे काम करें।

१२) होमलेस लोगों को घर दें। विशेषकर सड़कों को महिलाओं के लिए सुरक्षित करें।

१३) हर किशोरी लड़की को उसके स्कूल से हर वर्ष दो माह के लिए आयरन सप्लीमेंट्स की दवाएँ दी जाएं।

१४) सभी विद्यालयों में लड़कियों के शौच की उचित व्यवस्था की जाए।

१५) मजदूर महिलाओं को उनके कार्य की आवश्यक ट्रेनिंग दी जाये, और उनके वेतन को किसी भी हाल में पुरुषों से कम ना किया जाए। माता श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाए। गर्भवती को छुट्टी और मेडिकल सहायता।

१६) यूनिवर्सिटी लेवल पर महिलाओं का एडमिशन आसान किया जाये। उनकी फीस कम की जाये। साथ ही उन्हें भी 24 Hr की लाइब्रेरी की सुविधा मिले।

१७) गृहणियों द्वारा किये गए काम को GDP की गणना में शामिल किया जाये और आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट में उन्हें कामकाजी ही माना जाए बेरोजगार नहीं। उन्हें इंसेंटिव्स दिए जायें।

१८) विवाह, मातृत्व, और नियोजन संबंधी योजनाओं में महिला हितों को प्राथमिकता दी जाए। इसलिए नियोजन की जो एकतरफा नीति है उसको त्यागा जाए।

१९) महिलाओं को जूडो कराटे सिखाने की चिरकुट योजनाओं पे बात करने की बजाय उनके पोषण पर जरूरी खर्च और जागरूकता बढ़ाई जाये। उनका पोषण सुरक्षित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी हो। और खेलकूद में उनकी भागीदारी बढ़ सके, उसपे कार्य हो।

२०) सेक्स एजुकेशन अनिवार्य हो। किसी भी किस्म की धार्मिक शिक्षा  25 वर्ष से पहले ना दी जाए। जेंडर सेंसिटिविटी को पाठ्यक्रम में अनिवार्य सब्जेक्ट के रूप में बचपन से ही पढ़ाया जाए।

२१) महिला आरक्षण बिल कम से कम अब पास कर दें। 1999 से अब तक बहुत बहाना कर लिया।

वैसे तो मांगें और भी हैं लेकिन अभी के लिए इतना ही कर दें तो मान लेंगे कि आप वाकई महिला हितों के लिए गंभीर हैं।

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