तुझे क्या मतलब

Posted by Rajeev Choudhary
August 7, 2017

Self-Published

समय, परिस्थितियां और जलवायु तेजी बदल रही है और हां शायद महिला समाज भी। यदि यहां बात बदलती महिला की करें, तो क्या हर्ज है? आज वो खुलकर अपने सेक्स अनुभव साझा कर रही हैं। अपनी प्रेगनेंसी, अपने पीरियड आदि पर पुरुष समाज की सोच को लेकर, उस पर मुखर होकर बात करने अलावा सार्वजनिक स्थानों पर अपने शिशु को स्तनपान कराने तक अपनी झिझक को तोड़ रही हैं, कुछ इस अंदाज़ के साथ कि ढूंढ़ों आखिर कब तक ममता में वासना खोजोंगे?

आज उस बदली हुई महिला ने डांस किया, अंग प्रदर्शन किया और सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से उसे सराहना भी मिली। प्रेम भी मिला और नफरत भी। संस्कृति की सीख भी मिली साथ में धर्म की दुहाई भी और तो और बलात्कार और हत्या जैसे कृत्य की धमकी भी मिली। लेकिन फिर भी उसने निर्भय होकर समाज के ढोंग को उजागर किया।

नारी को आरंभ से ही कोमलता, भावकुता, क्षमाशीलता, सहनशीलता की प्रतिमूर्ति माना जाता रहा है। घूंघट की आड़ से बाहर आ ही रही थी कि कुछ लोगो ने संस्कार का ताना दिया। भले ही भारत में आज भी लड़कियों को कई जगह सभ्यता के खूंटे से बांधने के लिए कहा जाता हो उसे भय दिखाया गया हो कि लड़की को समझाओ, न माने तो गंगाजी दिखाओ!

लेकिन फिर भी वो बढ़ती गयी, उसकी जिस पोशाक पर समाज ने उंगली उठाई, जिस पोशाक से संस्कृति के कथित ठेकेदार चिल्लाए! वही पोशाक पहने कुछ रोज़ पहले शाहदरा मेट्रो स्टेशन से एक लड़की मेट्रो में चढ़ी उम्र लगभग उन्नीस या बीस साल, कद 5 फीट, रंग सांवला कुछ ज्यादा ही सांवला था। मेट्रो में भीड़ थी, चढ़ते समय लगभग 50 साल की उम्र के एक कुरता पायजामा पहने एक युवक पर उसने छेड़खानी का आरोप लगाया। घटना मेरे से करीब 10 फीट दूरी की थी। उस युवक को लोगों ने खूब खरी खोटी सुनाई। यहां तक कहा “शर्म कर तेरी बेटी की उम्र की है” हालांकि इस बात को मैं समझ नहीं पा रहा था कि यदि वो शख्स लड़की की उम्र का होता तो क्या उसे छेड़ने का अधिकार था?

युवक बार-बार अपनी सफाई देना चाह रहा था, लेकिन पब्लिक के शोर के कचरे में उसकी सफाई धरी की धरी रह जाती। खैर कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन आ गया मैं वहां से राजीव चौक  के लिए मेट्रो बदली लेकिन यहां भी वही आवाज़ आई अबकी बार आवाज़ दूसरे डब्बे से आई मेरी उत्सुकता बढ़ी तो देखा लड़की वही बस युवक बदला इस बार युवक कोई 40 साल का रहा होगा। पहले वाकये से मुझे लगा छेड़छाड़ हुई होगी पर दुसरे वाकये ने मुझे समझाया कि लड़की सिर्फ आरोप जड़ना जानती है या कहो संवेदना की सस्ती लोकप्रियता समेट रही हो!!

चूँकि मेरा लेखन हमेशा नारीवादी रहा है लेकिन आज एक दूसरी घटना पर मेरा नज़रिया थोड़ा बदला, हुआ यूं कि मैं आज अपने दफ्तर के लिए सुबह जल्दी निकला राजीव चैक के लिए मेट्रो में चढ़ा ही था कि एक लड़का और लड़की थोडा मस्ती के मूड़ में थे। लड़की खड़ी थी, लड़का पीछे से उसे कभी कान पर तो कभी उसकी कमर पर टच कर रहा था। चांदनी चैक से एक बुजुर्ग चढ़े उसने कुछ पल तो देखा शायद बुजुर्ग उनका रिश्ता नहीं समझे और लड़के को टोक दिया “अरे शर्म कर क्यों लड़की को तंग कर रहा है?”

प्रतिउत्तर में लड़की ने बुजुर्ग की ओर देखा गुस्से से कहा- “तुझे क्या मतलब? ये मेरे साथ है चल अपना काम कर” बुजुर्ग अपना सा मुंह लेकर बैठ गया। पर लड़की की वो आवाज़ काफी देर तक मेरे कानों में गूंजती रही “तुझे क्या मतलब…”

मैं तब से सोच रहा हूं कि क्या सच में ही लोगों को कुछ मतलब नही है? शायद ऐसे जवाब के कारण कुछ दिन पहले मानसरोवर पार्क में ‘आदिल खान’ रिया गौतम पर चाकू से वार करता रहा और राह चलते लोग यही सोचकर आगे नहीं आए होंगे कि उन्हें क्या मतलब? हो सकता है ऐसे ही जवाबों के कारण बुराड़ी में करुणा पर सुरेन्द्र कैंची से वार करता रहा होगा और लोगों से यही सोचा होगा कि उन्हें क्या मतलब?
मैं तब इस बात का भी विरोध किया था कि लोग सामने क्यों नहीं आए और आज उस लड़की के इस जवाब से भी दुखी हुआ कि “तुझे क्या मतलब” तब से यही सोच रहा हूं कि अगली बार जब सच में कोई गुंडा सरेराह किसी लड़की को तंग कर रहा होगा क्या वो बुजुर्ग विरोध करेगा?
फिलहाल मैं मौजूदा हालातों को देखकर बता रहा हूं और एक महिला की आज़ादी के बारे में हमारे विचार इसी प्रतिक्रया से बन रहे हैं। मेरे हिसाब से एक नारी की आज़ादी की समझ ऐसे नहीं बननी चाहिए।

क्या आज अपनी मस्ती अपनी स्वतन्त्रता की चाह रखने वाली अधिकांश लड़की यह समझती है जींस टॉप और टूटी फूटी अंग्रेजी के सहारे वो पूर्ण स्वतंत्रता पा लेंगी और वो समाज में निर्भय होकर चल सकेगी तो मैं इसे उसका भ्रम कहूँगा। ये लिखते हुए मुझे कोई झिझक भी नहीं होगी कि आज आधुनिक नारी समाज में परिवर्तन के बुलबुले पोर्न मूवी या उसके बेडरूम में झाकने से नहीं बल्कि उसकी असल जिन्दगी में झाकने से भी दिखाई दे सकते है…

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.