मानसिक गुलामी और शोषित पिछड़ा भारतीय समाज

Posted by Suresh Chaudhary
August 30, 2017

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Suresh Kumar-Research Scholar, Dept. of Journalism and Creative Writing, Central University of Himachal Pradesh, Dharmshala, Kangra District, Himachal Pradesh-176215

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सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को 15 साल पुराने मामले मे दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया! बाबा के भक्त पुरे देश मे करोड़ों मे हैं! खुद को फ़क़ीर और भक्तों को फकीरी का सत्संग पढाने वाले बाबा का जीवन किसी पुराने समय के बिगडेल राजकुमार से कम नही है! फकीरी की आड़ में बाबा महंगी गाडिओं, रंगबिरंगी बेढंगी डिजाईन पोशाकों और ठाट बाट का शोकीन है! बाबा अपने भक्तों को अपना गुलाम समझता है! बलात्कारी बाबा अपने भक्तों के तन मन धन पर अपना अधिकार समझता है, जोकि उसे बलात्कार जैसे घिनोने कृत्य को करना अपना फर्ज समजता है – पिताजी की माफ़ी के रूप में! ऐसे ही सम्यभु बाबा प्राचीन समय में लोगों का शोषण करते रहे , बर्तमान में भी कर रहे हैं और परस्थितियां ऐसी ही रहीं तो भविष्य में भी करते रहेंगे! गुलामी कई रूपों और सवृपों में हो सकती है! यह सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक किसी भी रूप में हो सकती है ! गुलामी की महत्वपूर्ण पहचान है- सबन्धों का सस्व्रुप! गुलामी में मानवीय सवंध शक्ति और कमजोर के बीच होते हैं! कमजोर शक्ति का उपासक, भक्त और शोषित जबकि शक्तिशाली केवल और केवल शोषक बन कर रह जाता है! भारतीय समाज एक असमानता पर आधारित समाज रहा है! भारत की बहुल आबादी को जातपात के आधार पर मानसिक और बैचारिक गुलामी की जंजीरों में बाँध कर रखा गया ! इस वैचारिक और सांस्कृतक गुलामी को बर्षों तक बनाये रखने के लिए, कई प्रकार के मनगढंत किस्से, कहानियां, और बेतुके सिधांत गड़े गए !गुलामी के सभी रूपों में  सबसे और अन्य सब को पोषित करने बाला बैचारिक और मानसिक गुलामी ही है ! ऍम एस फियाह, मानसिक गुलामी को सबसे घटिया मानते हैं, क्यूंकि यह गुलाम को आजादी का झूठा एहसास दिलाता है ,यह आपमें आपके ही शोषक के प्रति विश्वास और प्यार पैदा करता है , और आप अपने ही शोषक के बचाव में होते हैं , जबकि जो मनुष्य आपको उससे आजाद करना चाहता है , बह आपको आपका दुश्मन लगने लगता है! यह बात उस उग्र भीड़ जो की आमदा थी, मरने- मारने के लिए , अपने ही शोषक के वास्ते लड़ने के लिए सही प्रतीत होती है! डेरों और बाबाओं के भक्तों में भारी संख्या में बहुजन, पिछड़ा और गरीब समाज इस बात को दर्शाता है की किस तरह से इन ढोंगी बाबाओं इन लोगों को मानसिक और वैचारिक रूप में बंधक बना कर, झूठी आजादी का अफीम खिला कर शोषित किया है, भारतीय पिछड़े समाज को जो सच्ची आजादी दिलाने की कोशिस की है, बह हमारे संविधान, सच्चाई और समानता के पुरोधाओं- अम्बेडकर,पेरियार ,फुले आदि ने की है, लेकिन वास्तविक आजादी का यह सपना पूरा न हो सका, क्यूंकि पिछड़े समाज का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी झूठे  बाबाओं और उनके ढोंगी प्रवचनों में बह रहा है!

जरुरत है बहुजन और पिछड़ा समाज अपना इतिहास जाने, महापुरषों को पढ़े, अपने समाज में चिन्तक पैदा करे, यह चिन्तक और सजग बर्ग समाज के गरीब और शोषित लोगों को मुक्ति का रास्ता बताये, अन्यथा ये गरीब और पिछड़ा समाज बर्तमान की ही तरह भविष्य में भी शोषित होता रहेगा और अपने ही शोषक को अपना मसीहा समझकर अपनी जान देते रहेंगे!

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