राम और रहीम दोनेां का नाम बदनाम कर रहे हैं ये रामरहीम के अंधेभक्त

Posted by Rachana Priyadarshini
August 25, 2017

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भारतीय इतिहास महान संत कबीर ने यह कहते हुए कि- “गुरु गोबिंद दोउ खड़े, काको लागू पाय; बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय” गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर बताया था. पर यहां सवाल उठता है कि गुरु कौन? वह इनसान जो अपने अनुयायियों को प्रेम, सद्भवना, भाईचारा, अहिंसा और शांति का पाठ पढ़ाये. स्वकल्याण के साथ-साथ जनकल्याण के  लिए प्रेरित करें. संकट की घड़ी में अपना स्वविवेक न खोते हुए धैर्य और हिम्मत से काम ले. जिसका पहला और आखिरी उद्देश्य मानवता का कल्याण हो. पर आधुनिक भारतीय इतिहास के गुरुओं की तो लीला ही अपरंपार है. कोई अरबों-खरबों के घोटाले में फंसा है, तो किसी पर रेप और मर्डर चार्ज लगा हैं. उसके बावजूद इनके अंधेभक्तों को ये सब कुछ नजर नहीं आता…….इस पर बड़ी ही  हैरत होती है.

बाबा रामरहीम के भक्तों ने सीबीआई कोर्ट का निर्णय आने से सप्ताह भर पहले से लेकर अब तक जिस तरह पंजाब और हरियाणा में दहशत और गुंडागर्दी का माहौल फैला रखा है, उसे देख कर तो यह लगता ही नहीं कि इनके गुरु द्वारा इन्हें कभी प्रेम और मानवता का पाठ पढ़ाया गया होगा, क्योंकि जो इनसान किसी से प्रेम करता है, उसके मन में दूसरों के लिए करूणा और  सद्भाव की भावना होती है. जिस व्यक्ति ने मानवता का पाठ पढ़ा होगा, वह कभी भी किसी को हानि पहुंचाने की सोच भी नहीं सकता. मगर रामरहीम के अनुयायियों की बातें सुनकर और उनकी हरकतें देख कर तो लग ही नहीं रहा कि उनके गुरु से उन्हें कभी ऐसी कोई शिक्षा मिली भी होगी. अरे अगर गुरु इतने अच्छे और सच्चे ही हैं, तो फिर डर किस बात का. भरोसा रखें. झूठ चाहे कितने भी हाथ-पैर क्यूं न मार ले, अंतत:सच की ही जीत होनी है.(भक्तों के कथनानुसार)

वैसे भी बाबाजी इतने चमत्कारी हैं, तो वह चाहें तो निर्णय देनेवाले जजों तक का दिमाग फिरा कर अपने पक्ष में निर्णय करवा सकते थे, हालांकि अफसोस ऐसा हो नहीं पाया. शायद गुरुजी ने इसे सही नहीं पाया होगा या फिर वाहे गुरु ने उनके लिए सजा पाना ही  मुकर्रर कर रखा होगा. इसके बावजूद अगर उनके भक्तगण गुंडागर्दी करने पर उतारू हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें या तो अपने गुरु पर यकीन नहीं है या फिर वाहेगुरु पर. और अगर विश्वास है, तो मान कर चलें कि जीत हमेशा सच की ही होती है और उस ऊपरवाले की मरजी के बगैर कुछ नहीं होता, इसलिए……

देखो ओ दीवानों तुम ये काम न करो, राम का नाम बदनाम न करो.

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