“राम” का नाम, फर्जी काम !

Posted by sukant tiwari
August 28, 2017

Self-Published

“राम” का नाम, फर्जी काम !

हमेशा से भारत की पहचान एक धार्मिक, श्रद्धावान और पवित्र धरती के रूप में रही है। भक्ति में शक्ति की बात हम सदा से ही सुनते आए हैं, मगर पिछले कुछ समय से यह भक्ति ही हमारी कमज़ोरी बनती जा रही है। कहा जाता है कि अति हर चीज की बुरी होती है। अगर किसी से हद से ज्यादा नफरत हो तो वह तो बुरी है ही, मगर यदि किसी से हद से ज्यादा मोहब्बत हो जाये तो वह भी कहीं न कहीं हमें नुकसान पहुँचाती है। इसी तरह धर्म और भक्ति, हमारी शक्ति है मगर आज के दौर में होने वाली अंधभक्ति हमारी कमज़ोरी बनती जा रही है।

ये वही देश है, जहाँ त्रेता युग में राम जैसे मर्यादापुरुषोत्तम तो कलियुग में भी स्वामी विवेकानंद जैसे महान पुरुष हुए हैं। ये देश इन महान पुरुषों के पदचिन्हों पर चलने वाला देश है। इतिहास गवाह है, जब तक हम इन महान आत्माओं के अनुसार चले हैं तब तक हमारा देश विश्वगुरु रहा है। मगर आज के इस बदलते दौर की नयी भक्तिनयी श्रद्धा और तथाकथित नए भगवानों ने देश को और देश के लोगों को खाई की तरफ धकेलने का पूरा प्रयास ही नहीं किया है अपितु कहीं न कहीं वो लोग इसमें कामयाब भी हुए हैं।

जब हमें किसी चीज से अपार प्रेम हो जाता है तो उसकी बुरी बात भी हमें अच्छी लगने लगती है। इसी तरह जब हमें किसी पर अटूट श्रद्धा हो जाती है तो सिर्फ उसका नाम ही हमसे कुछ भी कराने के लिए काफी होता है। और यही हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी है। पिछले कुछ समय में उपजे ढोंगियों ने इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश की है। चाहे वो रामपाल हो, आशाराम हो या रामरहीम हो, सबने एक ऐसे शख्स के नाम का प्रयोग किया है, जिसके आगे मर्यादा, सुस्वभाव, तथा दुनिया के सब उच्च आचरण पानी भरते हैं। सिर्फ ये “राम” नाम ही किसी की आस्था और भक्ति हाशिल करने के लिए पर्याप्त है। इसी नाम का सहारा लेकर न जाने कितने ढोंगियों ने ख़ुद को भगवान घोषित कर दिया और हमारे देश के भोले लोग मूर्ख लोगों में तब्दील हो गए।

“राम” वह नाम है जिसे जब 14 वर्ष का बनवास मिला तो ग़लती न होने के बावजूद बिना किसी प्रश्न के अपनी गद्दी छोड़कर बन चले गए। और उनके भक्त वो, जो राम के साथ घरवार छोड़ने को तैयार थे मगर बनवास देने वाली माता को कुछ नहीं कहा और न ही अपने राज्य का कोई अहित ही किया। मगर आज के ये राम नाम का सहारा लेने वाले पाखंडी एक महिला का बलात्कार कर देते हैं और जब इन्हें सज़ा सुनायी जाती है तो इनके तथाकथित मूर्ख भक्त देश में भय का माहौल उत्पन्न कर देते हैं।

देश के राजा की, देश के प्रधान की ये ज़िम्मेदारी बनती है कि वह देश में ऐसा माहौल उत्पन्न करे कि कोई व्यक्ति बीच चौराहे पर भी किसी अपराधी को अपराधी कहने में डर या भय का अनुभव न करे। जब एक अपराधी को अपराधी कहने के लिए 5 राज्यों में हाई अलर्ट और 2-3 राज्यों में कर्फ्यू लगाना पड़ जाए तो राम की इस धरती का इससे बड़ा दुर्भाग्य शायद कुछ नहीं हो सकता। लोगों को समझना पड़ेगा कि भक्ति सिर्फ नाम से नहीं, आचरण से हुआ करती है। अगर लोग इसी तरह इन पाखंडियो को भगवान बनाकर सिर चढ़ाते रहे तो देश का पतन निश्चित है। हमें ये बात समझनी पड़ेगी कि “भक्ति” तो ठीक है मगर “अंधभक्ति” ठीक नहीं। इसलिए अब हमें इन “राम” के नाम से फर्जी काम चलाने वालों से दूर से ही “राम-राम” कर लेनी चाहिए।

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