रिक्शे वाले दारू नहीं पसीना पीते हैं

Posted by Vishnu Prabhakar in Hindi, Society
August 10, 2017

हर रिक्शेवाला दारू पीता है, जितना कमाता है उतने की दारू पी जाता है। ये रिक्शेवालों के बारे में आम धारणा है। ऐसा जन मानस के दिमाग में बैठ चुका है कि हर रिक्शेवाला जितना कमाता है उतने का दारू पी जाता है।

इलाहाबाद में रहते मुझे 9 साल हो गए हैं और मैं ये सब बातें 9 साल से सुन रहा हूं। मैं रिक्शे से तो बहुत कम कहीं जाता हूं पर जब रिक्शे पर बैठता हूं तो रिक्शे वाले से ये ज़रूर पूछता हूं, “क्या आप दारू पीते हैं?” यकीन मानिए हर रिक्शेवाले से मुझे लगभग एक ही जवाब मिला है, “दारू पियेंगे तो बच्चों को क्या खिलाएंगे, बीबी को क्या खिलाएंगे?” कुछ रिक्शे वालों ने आगे ये ज़रूर जोड़ा “रात को जब कभी बहुत ज़्यादा थक जाते हैं तो थोड़ा पी लेते हैं। रोज़-रोज़ पीने लगेंगे तो बचाएंगे क्या?”

मैं आपको ये क्यों बता रहा हूं! मैंने फेसबुक पर एक रिक्शेवाले की फोटो डाली और लिखा  “ई-रिक्शा आ जाने से रिक्शेवालों की कमाई कम हो गयी है। यहां तक कि रिक्शे का किराया भी नहीं निकल पा रहा है।” इस पर एक फेसबुक मित्र ने कहा कि उससे कहो दारू पीना बंद करे और ई रिक्शा ख़रीदे।

ये बताने के पीछे मेरा मकसद यह है कि लगभग सभी लोग ये सोचते हैं कि सारे रिक्शाचालक दारू पीते हैं और वो सारी कमाई पीने में ही उड़ा देते हैं। लेकिन ये बात बिल्कुल गलत है, मैंने बहुत से रिक्शेवालों से बात की है जो बिलकुल भी नहीं पीते हैं और अगर एक-दो को छोड़ दें तो लगभग सारे बिना पिए हुए ही मिले हैं।

ये जो मानसिकता है ठीक वैसे ही है जैसे हर गरीब अपनी गरीबी का ज़िम्मेदार है। कभी-कभी होता ये है कि हम अपने दिमाग से नहीं सोचते हैं बल्कि दूसरे के दिमाग से सोच रहे होते हैं और हमें लगता है हम खुद सोच रहे हैं। यहां दूसरे का मतलब से मेरा तात्पर्य राज्य (स्टेट) से है। राज्य हमारे दिमाग में इस तरह के विचार इम्प्लांट करता है ताकि हम वो न सोच पाएं जो हमें सोचना चाहिए।

रिक्शेवाले सड़क पर या रिक्शे पर ही सो जाते हैं, क्या किसी ने रिक्शेवालों के लिए कोई आरामगाह देखी है कहीं? मैंने तो नहीं देखी। रिक्शेवाले एक्सीडेंट में मर जाते हैं, क्या उनके घर वालों को कोई मुआवज़ा मिलता है? मैंने तो नहीं सुना। बस यहां से अगर सोचेंगे तो ये जान पाएंगे कि ऐसा क्यों कहा जाता है कि हर रिक्शेवाला दारू पीता है। कभी रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड में जाइए और देखिए, पता करिए कि रिक्शेवाले कैसे जीते हैं, कैसे कमाते हैं। जिस दिन उनको आप महसूस करेंगे यक़ीनन आप ये कहना छोड़ देंगे। एक और बात ये भी पता करियेगा कि ये रिक्शेवाले किस समुदाय से आते हैं। जबाब आपको मिल जाएगा।

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