शायद उन्हें भूख भगा ले गई……..

Posted by naresh koshyari Koshyari
August 4, 2017

Self-Published

बात उन लाचार आंखों की है जो आज भी इन्तजार  करती है कि शायद वो वापस आ जाए…..ये उन लोगों की कहानी हैं जो चले गये उस विरानी को छोड़कर ,उन परिस्थितियों को छोडकर जिनसे उन्हें निकलकर आगे बड़ना था।  बात उस बीते हुए कल की है जब पहाड़ो में बसने वाले गाँवों  के लोग उस गरीबी से गुजरते थे जहाँ खाने के लिए भी नसीब नहीं होता , परिस्थितियाँ इतनी गंभीर थी कि काम चाह कर भी काम नहीं मिलता , वे अपने खेतों पर निरभर रहते  पर मौसम की मार,  वे छोटे-छोटे खेत शायद उनकी भूख न मिटा पाई। इसी भूख ने शायद पहाडो़ के नौजवानों को घर से दूर कर दिया ।   आप सोच रहे होंगे कि वे नौजवान आय के साधन के लिए गए होंगे पर  नहीं………….वे गये थे अपने पेट को भरने के लिए ,वे गये थे उन समस्याओं से भागकर जो उनपर आन पड़ी थी ।

पर जो भी हो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी छोड़ी , वे आज तक कभी लोट कर नहीं आये , पर ये सवाल कभी-कभी दुःख देता । क्या वे अपनी जिन्दगी  में खुश होगे , शायद नहीं अपने जिम्मेदारी को छोड़कर भागने वाला कैसे खुश रह सकता है।

बुड़े माँ-बाप का सहारा बन कर ,अपने लोगों का साथ दे कर जिसे आगे बढ़ना था ,वह इतना आगे बढ़ गया कि कभी  उसने पीछे मुड़  कर  देखा ही नहीं।  मैं अकसर  जब भी उनके  घर से गुजरता और कहता ,  अम्मा कोनू खबर मिली-तो वो रोने लग जाती और कहती बेटा अपना भाग ही फूटा है  और वो अपने भाग्य को कोश्ती …….और उनके आँसूओं से पता चलता कि उनके दिल में कितना पीढ़ा हैं।

बूढ़े माँ-बाप आज भी दोपहर की धूप में खेतों में काम करते दिखाई देते है। पर वो कभी घबराते नहीं इस काम से क्योंकि जब आखों के सामने काटें दिखाई दे तो शायद ही कोई घबराये?

कभी-कभी अनजानों की पीढ़ा भी अपनी लगने लगती हैं आखिर कयों? कोई नहीं जानता पर जो भी हो वह एक अहसास है पर जो भी हो क्या उन लोगों को यह अहसास नहीं होता होगा  जो भाग गये थे  और क्या वे वापस आईगे ये सवाल भी मुझे सताता हैं। सारा देश उन्नति विकास राजनीति सुनाने में लगा है पर उन बूड़ो को इससे करना क्या?  उन्हें तो पता भी नहीं ये सब होता क्या है । उनकी लब्जों को सुनकर आखों की पीढ़ा देखकर शायद कोई नोबल पुरस्कार लेने से भी मना कर दे।   और अम्मा हमेशा कहती है  “बेटा जब तक घुटने चल रहे है खाईगें जब रूक जाये तो भगवान भरोसे’

पर मैं कभी-कभी सोचता हूँ आँखे कमजोर हो रही है ,जस्बा कम होते जा रहा है और साथ मैं मेरे मन में एक डर पैदा हो रहा है कि कही उनका जस्बा टूट न जाए । ऐसा हुआ तो उन्हें सभालना मुश्किल हो जायेगा………………

 

 

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