5 महिलाएं बता रही हैं सेक्स टॉय्ज़ इस्तेमाल करने का अनुभव

दो साल पहले मेलबर्न से मेरे एक दोस्त ने मुझे टेक्स्ट किया ”मेरे घर के बिल्कुल सामने एक सेक्स शॉप है और वहां से तुम्हारे लिए कुछ खरीद सकते हैं!” बहुत लाज़िम सी बात है कि मैं भी एक्साइटेड हो गई। एक रूढ़ीवादी माहौल में पलने-बढ़ने के कारण मैंने आजतक कोई सेक्स टॉय नहीं देखा था, और मैं ये सोच के काफी उत्तेजित थी कि अब मेरे पास एक खुद का सेक्स टॉय होगा। और एकबार जब मैंने  उसे इस्तेमाल करना शुरु किया उसके बाद लगातार आगे बढ़ती गई और नए-नए सेक्स टॉय्ज़ इस्तेमाल करने लगी।

लेकिन इंडिया में सेक्स टॉय्ज के साथ ये इशू है। ना तो ये आसानी से मिलती है और ना ही ये आम जीवन में बात-चीत का कोई मुद्दा है। बहुत से हिंदुस्तानियों को तो ये पता भी नहीं है कि सेक्स टॉय्ज़ नाम की कोई चीज़ होती है और ये कहां बिकती है, वजह साफ है सेक्स टॉय्ज़ को लेकर टैबूज़। अगर किसी को मिल भी जाए(जैसे मुझे) तो उन्हें पता नहीं होता कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए(खासकर तब जब बिना यूज़र मैनुअल के आपके पास वो भेज दिया जाए)

सेक्स टॉय्ज़ का प्लेज़र

मैं ये जानने के लिए काफी उत्सुक थी कि क्या सेक्स टॉय्ज़ के साथ दूसरों का भी वही अनुभव था जो मेरा। यही जानने के लिए मैं दूसरी महिलाओं से उनके सेक्स टॉय्ज़ के साथ जुड़े एहसासों और अनुभवों को लेकर सवाल पूछने लगी।

20 साल कि लॉ स्टूडेंट शिप्रा को लगभग 2 साल पहले अपना पहला सेक्स टॉय मिला और शुरुआत में मेरी तरह वो भी उसका इस्तेमाल करने में हिचकिचा रही थी। शिप्रा ने बताया ये बेहद नया और अजीब सा था, हालांकि ऐसा नहीं है कि मुझे पता नहीं था कि एक वाइब्रेटर कैसा होता है, क्योंकि मैंने इसके बारे में पहले ही गूगल किया था। लेकिन ये बातें इतने अंदर तक मेरे ज़हन में घुसी हुई थी कि ये चीज़ें बुरी और विकृत होती है कि मैं काफी हिचकती थी शुरुआत में इस्तेमाल करने से।

ये बहुत ही ताज्जुब की बात थी कि मैंने मास्टरबेशन के दौरान सेक्स टॉय्ज़ इस्तेमाल करने वाली जितनी भी महिलाओं से बात की, सबने यही बताया कि सेक्स टॉय का इस्तेमाल सेक्स से ज़्यादा आनंद देने वाला होता है। और जिनके लिए ऐसा नहीं था उन्होंने भी ये माना कि लगभग बराबर मज़ा आता है।लेकिन एकबार जब उसने वाइब्रेटर इस्तेमाल करना शुरु किया तो सारी शुरुआती डर मानो गायब हो गए। वो कहती है कि ऐसा लगता है मानो सेक्शुअल प्लेज़र कि एक नई दुनिया खुल गई हो मेरे लिए। ऑर्गैज़्म इतना आनंद देने वाला था… असल में सेक्स करने से भी अच्छा।

मुग्धा, जो  दो बच्चों कि सिंगल मदर हैं वो बताती हैं ”मैं अब  30 साल से ज़्यादा की हो चुकी हूं और सच बताउं तो ना मेरे पास वक्त है और ना ही मेरी इच्छा कि किसी पार्टनर के साथ सेक्स करूं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मुझे सेक्स करने की इच्छा नहीं होती। ऐसे वक्त में एक वाइब्रेटर सेक्शुअल फ्रस्ट्रेशन को दूर करने और खुद को प्लेज़र देने का सबसे अच्छा तरिका है।”

मुग्धा, शिप्रा और इन जैसी और भी कई महिलाएं जो सेक्स टॉय्ज़ के ज़रिए सेक्शुअल प्लेज़र पा रही हैं उससे साफ है कि सेक्स टॉय सेक्शुअल आज़ादी में कितना अहम योगदान दे रहा है। हालांकि अगर इतिहास की बात करें तो उनका इस्तेमाल कई बार महिलाओं  कि यौनिकता पर अधिकार जमाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब वक्त बदला है और महिलाएं इसे अपने तरीके से अपने आनंद के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।

लेकिन सेक्स टॉय्ज़ का इस्तेमाल सिर्फ मास्टरबेशन तक ही सीमित नहीं है। एक रिसर्च के मुताबिक सेक्स टॉय्ज़ का इस्तेमाल करने वाली 78% महिलाएं रिलेशनशिप में हैं।

सेक्स टॉय्ज़ की उपलब्धता और टैबूज़

जितनी भी महिलाओं से मैंने बात की उन सबका ये मानना तो था कि सेक्स टॉय का इस्तेमाल एक गज़ब का अनुभव होता है और ऑर्गैज़्म के लिए इसका इस्तेमाल एक बेहतरीन एहसास देता है लेकिन एक शिकायत जो सबने की- ये आसानी से उपलब्ध नहीं होते।

मुग्धा मज़ाक करते हुए कहती हैं कि शुरुआत में मुझे जाने कहां कहां जाना पड़ता था अपने वाइब्रेटर के लिए, तब इनटरनेट भी नहीं था। तो मेरे कुछ दोस्त थें जो विदेश से लेकरक आते थे, या किसी ऑफिस के कॉन्टैक्ट को बोलना पड़ता था पता लगाने के लिए। लेकिन अब चीज़ें आसान हैं, कई  ऑनलाइन स्टोर्स हैं जो घर तक सेक्स टॉय्ज़ डिलिवर करते हैं।

हालांकि शुरुआत में ये ऑनलाइन स्टोर्स आपको  थोड़े अजीब लग सकते हैं लेकिन उनके पास वाकई बहुत इनट्रेस्टिंग आइटम्स होते हैं। That’s Personal, Kink Pin और Masala Toys सबसे लोकप्रीय ऑनलाइन स्टोर्स में से हैं जो कई तरह के सेक्स टॉय्ज़ ऑफर करते हैं।

अफसोस की बात है कि भारत में कोई असल दुकान है ही नहीं। IPC की धारा 292 किसी भी तरह की अश्लील उत्पाद को भारत में बेचने पर रोक लगाती है। हालांकि शुरुआत में ये कानून अश्लील किताबों और पैंपलेट्स के लिए था लेकिन परिभाषा में ऐसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं जिससे सेक्स टॉय्ज़ की बिक्री पर भी रोक जायज़ हो जाता है।

भारतीय समाज में जिस तरह से सेक्स को अश्लीलता और अनैतिकता से जोड़ा जाता है उस हिसाब से सेक्स टॉय्ज़ के इस्तेमाल को लेकर हमारे मन में जो धारणाएं बनी हैं वो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। एक संस्कृति के तौर पर हम सेक्स के बारे में खुले में बात करने से भी शर्माते हैं और ये मानने से भी इनकार करते हैं कि सेक्स प्राकृतिक है। इन बातों का ही परिणाम है कि हमारे समाज में इतनी मिथ्याएं और वर्जनाएं हैं।

सबसे मूर्खता वाली बात जो मैंने एक लड़की से सुनी वो ये कि मेरी मां ने मुझे बताया कि जो लड़कियां वाइब्रेटर्स इस्तेमाल करती हैं वो गर्भवती नहीं हो पाती हैं।एक ग्रैजुएट छात्र मालविका जो अक्सर डिल्डो का इस्तेमाल करती हैं बताती हैं, मैंने एक बहुत ही अजीब बात सुनी है, चूकि वो इसके बारे में ज़्यादा जानती नहीं हैं या कभी ज़्यादा देखा नहीं, इसलिए वो समझ नहीं पाते कि ये क्या है और अंत में अजीब से मिथ्स बना लेते हैं। वो कहते हैं कि सेक्स टॉय्ज़ गंदी और दर्दनाक चीज़ें होती हैं, और इससे योनी का नुकसान पहुंचता है।

बातें यहीं नहीं रुकती, इसको लेकर मिथ और भी खतरनाक होते जाता है।

मैनेजमेंट ट्रेनी खुशी बताती हैं कि मेरी मां ने बाथरूम में मेरा वाइब्रेटर देख लिया और उसके बाद तो जैसे कयामत ही आ गई, पहले उन्हें पता नहीं चला कि ये क्या है लेकिन जब मैंने उन्हें बताया तो उन्होंने ऐसे रिएक्ट किया जैसे मैंने पूरे खानदान को कलंकित करने वाला कोई काम किया है। उन्होंने पूरे परिवार को बताया कि मुझे सेक्स कि लत लग चुकी है।

ये हमारे समाज का दुखद सच है कि कैसे हम महिलाओं को बस सेक्शुअल प्लेज़र पाने का ज़रिया भर समझते हैं। जब जब कोई महिला अपनी यौनिकता को अपने हिसाब से जीना चाहती है पितृसत्ता की जड़ें हिलने लगती है।

सेक्स टॉय्ज़ आदिमकाल से ही रहे हैं, और अपने निजी अनुभव से मैं बता सकती हूं कि ये महिलाओं के लिए एक गिफ्ट है, तो इसको लेकर इतनी शर्म और मिथ्याएं क्यों? वक्त आ चुका है कि हम उन दकियानूसी विचारधाराओं को खत्म करें। और अगर WiFi से चलने वाले रैबिट वाइब्रेटर से ही इसकी शुरुआत हो तो वही सही।

*सारे नाम बदल दिए गए हैं।

ऑथर नोट: ये लेख लिखने के क्रम में मुझे ऐसे लोगों को ढूंढने में जो सेक्स टॉय्ज़ के बारे में बात करे काफी मशक्कत करनी पड़ी।और आखिरकार सिर्फ महिलाएं ही इसपर बात करने को तैयार हुईं। अगर आपके पास भी ऐसा कोई अनुभव हो तो शेयर करने में शर्माएं ना और लिखकर पब्लिश करें Youth Ki Awaaz पर। 

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