चिएवेलू थेले की पोस्टर देखना और अपनी नस्लभेद पर शर्म करना

Posted by Rajeev Choudhary in Hindi, News, Society
August 13, 2017

गोल चेहरा, छोटे नयन, दूध जैसा साफ रंग और अपने औसत कद के साथ अब आपको दिल्ली पुलिस के पोस्टर पर नजर आने वाली लड़की कोई और नहीं, बल्कि नगालैंड की चिएवेलू थेले हैं। चिएवेलू थेले ने अपनी बहादुरी और कर्मठ शैली से दिल्ली समेत उत्तर भारत की सभी लड़कियों को पीछे छोड़ते हुए राजधानी पुलिस की पोस्टर गर्ल बनकर प्रेरणा दे रही हैं।

सच लिखे तो हमारे बहुत बड़े देश की सोच छोटी है। आज़ादी के 70 साल बाद भी हम अपनी सोच का दायरा नहीं बढ़ा पाए। आमतौर पर जब हमारे पूर्वोत्तर राज्यों के लोग दिल्ली समेत उत्तर भारत में मिलते तो लोग आसानी से उन्हें भूटानी, नेपाली, या चीनी या चिंकी कह देते हैं।

इसमें अनपढ़ पढ़े लिखे या फिर आमजन भी दायरा सिमित रखे हुए हैं। पिछले साल जुलाई की खबर ही ले लीजिये मणिपुर की मोनिका खांगेमबम जब राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े एअरपोर्ट पर इमिग्रेशन डेस्क पर आई तब एक अधिकारी ने उनका पासपोर्ट देखा और कहा कि ‘इंडियन तो नहीं लगती हो?

दिल्ली पुलिस के पोस्टर में चिएवेलु थेले

आमतौर पर पूर्वोत्तर के लोगों के साथ शेष भारत में भेदभाव की खबरें आती रहती हैं। इसी वर्ष जून में दिल्ली गोल्फ क्लब में मेघालय की एक महिला को उनके पारंपरिक खासी परिधान में होने की वजह से बाहर जाने को कह दिया गया। हालांकि, इस मामले के तूल पकड़ने पर दिल्ली गोल्फ क्लब ने माफी मांग ली थी।

हिमालय की तराई से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक का व्यक्ति गोल चेहरे के साथ छोटे नयनों वाला है। हम वहां के लोगों को खुद से कुछ कम समझते हैं और तिरछी आंखों वाले और कुछ बेहद भद्दे नामों से पुकारने में कोई हिचक नहीं रखते हैं, ये हमारी बेशर्मी है। बेशर्मी का बड़प्पन पूर्वोत्तर के लोगों को हीन भावना से देखते हैं और उन पर अपमानजनक टिप्पणियां करने से नहीं हिचकिचाते।

असम, नागालैंड, मिज़ो़रम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों से बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में नौजवान लड़के-लड़कियाँ दिल्ली, पुणे, बेंगलुरू, मुंबई जैसे भारत के अलग अलग शहरों में आते हैं। लेकिन इनकी सबसे बड़ी समस्या रोज़गार के बजाय होती है नस्लभेदी टिप्पणियां।

लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस सोच पर प्रहार करते हुए अपनी प्रोमोशनल गतिविधियों के लिए पोस्टर गर्ल तलाश ली है। दरअसल, नॉर्थ ईस्ट की रहने वाली 41 लड़कियां पहली बार दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनी हैं, जिन्हें स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग दी गई है। इन कमांडो में सबसे बेहतर कमांडो रही थेले को दिल्ली पुलिस ने अपनी पोस्टर गर्ल भी चुना है। इस पोस्टर में दिल्ली पुलिस ने लोगों से सहयोग करने की अपील की है और साथ ही थेले की एके -47 लिए हुए फोटो लगाई गई है। थेले ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी तस्वीर टीवी और अखवारों में आएगी। इसे देखकर वो और उनके परिजन बेहद खुश हैं।

चंद लोगों को छोड़के यहाँ करोड़ों नहीं जानते कि पूवोत्तर और उत्तर दोनों में कितनी समानता है सोच समझदारी को लेकर बच्चें 18 साल की उम्र में बालिग हो जाते हैं पर हमारी क्षेत्रवादी मानसिकता की बालिग होने की उम्र क्या है पता नहीं?

फोटो आभार- दूरदर्शन ट्विटर हैंडल।

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