एक रेप की सज़ा में दूसरी लड़की का रेप, पाकिस्तान का ये कैसा न्याय?

दक्षिण एशिया खासकर भारत पाकिस्तान में इज़्जत के नाम पर महिलाओं की हत्या आम बात है। भ्रूण के रूप में लड़कियां बाप के हाथों मारी जाती हैं, सम्मान के नाम पर भाइयों के हाथों मारी जाती हैं और पत्नी के रूप में दहेज के लिए मारी जाती हैं। सच को लिखने में हर्ज क्या? मतलब नारी के पेट और घुटनों के बीच के शारारिक स्थान को यहाँ पुरुष की इज़्जत समझा जाता रहा है।

लेकिन इज़्जत के नाम पर हत्या ही हो ज़रूरी नहीं है। इज़्जत के नाम पर इज़्जत तार-तार कर देने वाले किस्से भी इसी दक्षिण एशिया में होते रहे है। यदि इज़्जत के नाम हत्या को ऑनर किलिंग कहा जाता है तो इन मामलो को ऑनर रेप कहा जाये तो क्या गलत होगा?

हाल ही में पाकिस्तान के मुल्तान में एक लड़की का बलात्कार करने का आदेश देने के आरोप में करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। खबर है इस गांव की पंचायत ने सज़ा के तौर पर एक लड़के को 16 साल की लड़की का बलात्कार करने का आदेश दिया। 16 साल की इस रेप सर्वाइवर का गुनाह ये था कि उसके भाई ने 12 साल की एक दूसरी लड़की का बलात्कार किया था। इस गुनाह की सज़ा के तौर पर 12 साल की रेप सर्वाइवर के भाई को पंचायत ने गुनहगार की 16 साल की बहन से रेप करने का आदेश सुनाया। पर सवाल यह है एक लड़की के बलात्कार का बदला दूसरी लड़की से बलात्कार कर कहाँ का न्याय है?

पाकिस्तान के डॉन अखबार के अनुसार लड़की को लोगों के सामने पेश होने के लिए कहा गया जिसके बाद उनके माता-पिता और सभी लोगों की मौजूदगी में उसका रेप किया गया। दोनों लड़कियों की माओं ने बाद में इसकी शिकायत पुलिस में की।

यदि यहां अपराध को परिभाषित करें तो मेरे हिसाब से जो कृत्य एक सभ्य समाज की नज़र में गलत हो और जिसके लिए कानून हो उसे अपराध कहा जाता है। लेकिन जब किसी अपराध के लिए उस समाज का ज़िम्मेदार तबका ही शरीक हो जाये फिर उसे परिभाषित करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। सबसे बड़ा सवाल है यह कि जब समाज, संस्कृति और मज़हब का कथित ठेकेदार पुरुष वर्ग ही इस तरह के फरमान सुनाएगा तो अपराध को रोकने सामने कौन आएगा?

ठीक इसी तरह साल 2002 में पाकिस्तान की एक पंचायत ने 28 साल की मुख्तार माई के साथ सामूहिक बलात्कार की सज़ा सुनाई थी।  मुख्तार माई के 12 साल के भाई पर अपने से अधिक उम्र की एक महिला के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाने के बाद सामूहिक रूप से रेप किया गया और कौन भूल सकता है कि रेप करने के बाद उन्हें गांव भर में नंगा घुमाया गया था।

सरहद लांघकर यदि अब भारत में आएं तो देश का सिर्फ नाम बदलता है पितृसत्तामक समाज की सोच ज्यों की त्यों है। मुज़फ्फरनगर जिले में एक युवती को गांव का एक युवक लेकर फरार हो गया था। पंचायत ने आरोपी युवक की बहन की शादी युवती के भाई से करा दी, लेकिन शादी के बाद युवती के देवरों ने उससे गैंगरेप किया और उसे घर से निकाल दिया। मामला फिर से पंचायत में पहुंचा तो पंचायत ने कहा था, आंख के बदले आंख ही वास्तविक फैसला है।

पिछले साल दिल्ली से सटे बागपत के एक पंचायत ने 15 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप करने वाले तीन आरोपियों को गांव वालों के सामने पांच जूते मारने की सज़ा दी और उन्हें छोड़ दिया था। क्या इसे भी न्याय कहा जायेगा?

साल 2014 में उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक व्यक्ति एक शादीशुदा महिला को लेकर फरार हो गया था।  इसके बाद गांव की पंचायत ने फरमान सुनाया कि फरार प्रेमी की बीवी उस आदमी को देने को कहा जिसकी बीवी भाग गई थी।

ये सब वो खबरें है जो संज्ञान में आई है वरना पता नहीं ऐसी कितनी खबरें हर रोज़ शर्म, इज़्जत और लोकलाज की देहरी नहीं लांघ पाती। पूरे दक्षिण एशिया में अनेक क्षेत्रों की आज भी इस इज़्जत के इस खेल में महिलाएं ही यौन शोषण और मौत का शिकार हो रही हैं। गैरत (सम्मान) के नाम पर कत्ल जैसी कोई चीज़ नहीं होती है। ये वाक्य ही अपने आप में अपमानजनक है। आखिर एक पुरुष की इज़्जत महिला के शरीर में क्यों होती हैं?

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।