सबर जनजाति के लोग मर रहे हैं, सुध लेने वाला कोई नहीं

Posted by Deepak Ranjeet in Hindi, Human Rights, Society
August 1, 2017

साहब, सबर जनजाति की स्थिति खराब है। ज़रा ध्यान दीजिए। दिनांक  29/07/2017 को PUCL की टीम खड़ीयाबस्ती, लुपुनडीह, प्रखंड निमडीह, ज़िला सरायकेला खरसवां, झारखंड पहुंची और वहां बसे 31 सबर आदिम जनजाति के परिवारों की स्थिति की जांच की। जांच के दौरान यह जानकारी मिली कि सबर आदिम जनजाति के उक्त परिवारों को राज्य सरकार की पहल पर सन 2000 में बसाया गया था।

House of people from Sabar Tribe
चिंताजनक हालत में घर

सरकार की तरफ से इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत सभी 31परिवारों को जंगल से लाकर दलमा पहाड़ के नीचे खाड़ीयाबस्ती में बसाया गया। जन विकास केन्द्र द्वारा सरकार से प्रति आवास मिले 20000 रूपये में अपनी ओर से 11000 रूपये और मिला कर उनके लिए 31000 में घर बना दिया गया। शौचालयों की भी व्यवस्था की गई। शुरुआती दिनों में ये सबर कृषि कार्य में भी लगे थे। लेकिन रोज़गार के अभाव में अब ये सबर अपनी जिंदगी ठीक से शुरू ही नहीं कर सकें।

People Of Sabar Community
बदहाल स्थिति में सबर जनजाति के लोग

इन सालों में 11 परिवारों ने उक्त जगह को छोड़ दिया बाकी 20 परिवारों की ज़िंदगी दयनीय है। उनके सारे घर ढह गये हैं। शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं। एक विद्यालय है। पांचवी तक पढ़ाई होती है। दो पारा शिक्षक हैं। एक आंगनबाड़ी केन्द्र है। बारिश के इन दिनो वही उनका सहारा है। सरकार के पास इस लुप्त प्रजाति को बचाने के लिए कोई योजना नहीं है।

Bad Amenities In The Village
खराब सरकारी सुविधाएं

पिछले 17 सालों में कोई अनुदान नहीं आया है, खेती समाप्त हो गई है, पूरा इलाका जंगल होकर सांपों का डेरा हो गया है। कुपोषण की शिकार यह जनजाति सरकारी उपेक्षा का दंश झेलते हुए विलुप्त होने के लिए अभिशप्त है। 2008 से 2017 तक सरकार को सौंपे गये दर्जनों स्मरणपत्रों के बावजूद सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी।

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